सरकारी अफसर कौन बनता है? किताबी कीड़ा नहीं, ये 3 आदतें होनी चाहिए 

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Who Can Become Government Officer Tanu Jain Tells: सरकारी अफसर बनने के लिए सिर्फ टॉपर होना काफी नहीं होता. डॉ तन्नू जैन के मुताबिक, एक सफल अफसर में तर्कसंगत सोच, संवेदनशीलता और तार्किक नजरिया होना बेहद जरूरी है. जानिए वो 3 गुण जो ये तय करता है कि आप सरकारी अफसर (Government Officer) बन पाएंगे या नहीं.

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Who Can Become Government Officer Tanu Jain Tells: भारत में युवाओं के बीच सरकारी नौकरी को लेकर जबरदस्त क्रेज देखने को मिलता है. लाखों छात्र हर साल UPSC, PCS, SSC, बैंक और पुलिस जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, क्योंकि सरकारी अफसर बनना सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक सम्मान और जिम्मेदारी भी मानी जाती है. लेकिन सवाल यह है कि आखिर सरकारी अफसर कौन बनता है और उनमें कौन-सी खास खूबियां होती हैं? मशहूर मोटिवेशनल स्पीकर डॉ तन्नू जैन के मुताबिक, सरकारी अफसर वही बनता है जो सिर्फ पढ़ाई में तेज नहीं, बल्कि सोच में परिपक्व, फैसलों में संतुलित और जनता के प्रति संवेदनशील होता है. आइए, जानते हैं उन्होंने इस बारे में क्या कहा.

Who Can Become Government Officer: सरकारी अफसर में होने चाहिए ये तीन गुण

तर्कसंगत सोच रखने वाला (Rational)

एक सरकारी अफसर (Sarkari Officer) को हर फैसले में तर्क और तथ्य के आधार पर सोचना आना चाहिए. वह भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि नियम, कानून और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय ले. तर्कसंगत सोच रखने वाला अफसर पक्षपात से दूर रहता है और हर नागरिक को समान रूप से देखता है. ऐसे अफसर के फैसले मजबूत होते हैं और उन पर सवाल उठाना मुश्किल होता है.

संवेदनशील और सहानुभूति रखने वाला (Empathetic)

अफसर को सिर्फ कानून जानना ही नहीं, बल्कि लोगों की परेशानियों को महसूस करना भी आना चाहिए. जब वह आम जनता की स्थिति, दर्द और मजबूरी को समझता है, तो उसके फैसले ज्यादा इंसानी बनते हैं. संवेदनशील अफसर जनता के साथ सम्मान से बात करता है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेता है. ऐसे अफसर पर लोग भरोसा करते हैं और खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं.

तार्किक और व्यवस्थित सोच रखने वाला (Logical)

एक अच्छा अफसर हर समस्या को लॉजिकल तरीके से हल करता है. वह किसी भी मामले की जड़ तक जाता है और कारण-परिणाम को समझकर समाधान निकालता है. तार्किक सोच वाला अफसर जल्दबाजी में गलत फैसले नहीं लेता. उसके निर्णय स्पष्ट, संतुलित और लंबे समय तक असरदार होते हैं.

ड्यूटी सबसे जरूरी हो

इसके अलावा तन्नू जैन (Ex Officer Tanu Jain) ने कहा कि अफसर ऐसा नहीं होता कि मेरा मूड खराब है तो दंगे हो तो हो मैं नहीं जानता. अफसर ऐसा होता जिसके लिए ड्यूटी सबसे ज्यादा जरूरी है. अफसर ऐसा होता है कि जो काम करना है, वो करना है.

Dr Tanu Jain: कौन हैं डॉ तन्नू जैन?

डॉ तन्नू जैन यूपीएससी अभ्यर्थियों का मॉक टेस्ट लेती हैं और पूर्व में यूपीएससी के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थीं. सोशल मीडिया पर दी जानकारी के अनुसार, वे AFHQ (Armed Forces Headquarters) में महत्वपूर्ण पद पर थीं. तन्नू जैन ने वर्ष 2014 में अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 648वीं रैंक हासिल की थी.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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