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कोयलांचल के किसानों को सरकार को धान बेचने में क्यों नहीं है रुचि, जानिए पूरा मामला

Updated at : 20 Dec 2020 11:58 AM (IST)
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कोयलांचल के किसानों को सरकार को धान बेचने में क्यों नहीं है रुचि, जानिए पूरा मामला

धनबाद (संजीव झा) : कोयलांचल के किसानों को सरकारी दर पर धान बेचना रास नहीं आ रहा है. बाजार से लगभग दो गुना दर मिलने के बावजूद अधिकांश पैक्स की जगह बिचौलियों की धान बेच रहे हैं. धनबाद जिला के 15 पैक्सों (धान अधिप्राप्ति केंद्रों) में से तीन पर ही पहले चार दिन के दौरान केवल नौ किसानों ने लगभग 145 क्विंटल धान बेचा है. जबकि लगभग 30 किसानों ने धान बेचने के लिए निबंधन कराया है.

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धनबाद (संजीव झा) : कोयलांचल के किसानों को सरकारी दर पर धान बेचना रास नहीं आ रहा है. बाजार से लगभग दो गुना दर मिलने के बावजूद अधिकांश पैक्स की जगह बिचौलियों की धान बेच रहे हैं. धनबाद जिला के 15 पैक्सों (धान अधिप्राप्ति केंद्रों) में से तीन पर ही पहले चार दिन के दौरान केवल नौ किसानों ने लगभग 145 क्विंटल धान बेचा है. जबकि लगभग 30 किसानों ने धान बेचने के लिए निबंधन कराया है.

राज्य सरकार की तरफ से इस ‌वर्ष 15 दिसंबर से धान खरीददारी शुरू की गयी है. धनबाद जिला में 15 केंद्र बनाये गये हैं. लेकिन, नौ केंद्रों पर ही विधिवत खरीददारी हो रही है. कुछ नये केंद्रों में संसाधनों के अभाव में धान क्रय की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी है. 15 से 18 दिसंबर के बीच यहां के तीन पैक्सों विराजपुर, टुंडी तथा तोपचांची में नौ किसानों से धान खरीद हो पायी थी. जबकि निरसा, पुटकी, खानूडीह, राजगंज, गोविंदपुर, पूर्वी टुंडी जैसे केंद्रों में एक भी किसान ने धान नहीं बेचा. किसानों की मानें तो सरकारी पैक्सों पर धान बेचने में कई पोशानियां हैं. एक तो जमीन का लगान रसदी अप टू डेट होना चाहिए. दूसरा विभाग से निबंधित होना चाहिए. तीसरा कृषि विभाग से एसएमएस मिलने के बाद ही पैक्स में जाते हैं. चौथा धान में नमी की मात्रा 17 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए. साथ ही धान से पैक्स तक धान का ट्रांसपोर्टिंग भी किसानों को अपने खर्च पर करना होगा.

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तोपचांची के एक किसान ने बताया कि सरकारी दर पर धान बेचने में आर्थिक रूप से लाभ होता है. लेकिन, सरकारी संस्था को धान देने में इतना पेंच है कि आधा से अधिकांश किसान चाह कर भी नहीं बेच पाते. बिचौलिया को धान देने में किसानों को कोई कागजी खानापूर्ति नहीं करनी पड़ती. बिचौलिया सीधे खेत तक पहुंच कर धान का वजन कराते हैं. टेंपों में लोड करवाते हैं. किसानों को नगद राशि देते हैं. हालांकि, बिचौलियों एवं पैक्सों के दर में 40 से 50 फीसदी का अंतर होता है. हालांकि, ट्रांसपोर्टिंग व मजदूरी का दर घटा दें तो भी दर में लगभग 30 फीसदी का अंतर आता है.

धनबाद जिला में 80 हजार से अधिक किसानों ने अपना निबंधन कृषि विभाग से करा रखा है. लगभग 28 हजार आवेदन अभी भी निबंधन के लिए पड़ा है. जांच के बाद पिछले दो वर्षों से 65 हजार से अधिक किसान पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत छह हजार रुपये का पेंशन ले रहे हैं. लेकिन, जब धान बेचने की बारी आती है तो पैक्सों में धान बेचने वाले किसानों की संख्या दस हजार से भी कम होती है. जबकि सरकार के तरफ से किसानों को बोनस तक दिया जा रहा है.

जिला आपूर्ति पदाधिकारी भोगेंद्र ठाकुर ने कहा कि पैक्सों से अभी धान क्रय की प्रक्रिया तेज नहीं हो पायी है. विभाग की तरफ से निबंधित किसानों को एसएमएस भेजा जा रहा है. साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है. विभाग के आदेश पर इस वर्ष यहां 15 अधिप्राप्ति केंद्र बनाये गये हैं. नौ पुराने केंद्रों में धान खरीददारी चल रही है. नये केंद्रों में एक-दो दिनों में शुरू हो जायेगा. किसानों से धान लेने के बाद 24 घंटे में राशि उनके खाता में ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो जा रही है.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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