बाबा मंदिर में गंगाजल से बनने वाली खिचड़ी भोग की परंपरा है वर्षों पुरानी, जानें इसकी महत्ता
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Jan 2022 10:21 PM
jharkhand news: बाबा मंदिर में खिचड़ी भोग की परंपरा वर्षों पुरानी है. मकर संक्रांति से शुरू होकर एक माह तक खिचड़ी का विशेष भोग लगेगा. पुजारी परिवार बिना अन्न-जल ग्रहण किये गंगाजल से इस विशेष खिचड़ी को बनाते हैं.
Jharkhand news: देवघर के बाबा मंदिर की पूजा परंपरा के निर्वहन के लिए पुरोहित समाज के दो परिवारों काे अधिकार दिया गया है. इसमें पहला ओझा परिवार व दूसरा शृंगारी परिवार हैं. अहले सुबह पट खुलने से लेकर दिन के 11 बजे तक ओझा परिवार के द्वारा ही सभी पूजा-पाठ किये जाते थे. उसके बाद पट बंद होने तक श्रृंगारी परिवार के द्वारा परंपरा का निवर्हण किया जाता था. ये परंपरा मंदिर के महंत के द्वारा बनायी गयी थी.
बाबा बैद्यनाथ के दैनिक शृंगार पूजा को भी शृंगारी परिवार के द्वारा ही किया जाता था. साथ मंदिर के हर तरह के भोग खासकर खिचड़ी, अद्रा आदि बनाने से लेकर भोग लगाने की जिम्मेवारी भी शृंगार परिवार के द्वारा ही की जाती थी. वहीं, बहुत साल पहले ओझा परिवार से कुछ विवाद होने के बाद बाबा की शृंगार पूजा भी ओझा परिवार के द्वारा की जाने लगी. यह जानकारी शृंगारी परिवार से जानकार पंडित नुनु बेटा श्रृंगारी ने दी.
पंडित जी ने बताया कि पूर्व में राजाराम गुमास्ता, सीताराम गुमास्ता, मणी गुमास्ता तथा बुलांकी गुमास्ता जिसके वंशज शालीग्राम पंडा कहलाते हैं, इन परिवारों के द्वारा ही बाबा मंदिर के सारे भोग बनाने की जिम्मवारी थी. उसमें भी परंपरा के अनुसार जिस शृंगारी परिवार के द्वारा मंदिर पट बंद होने के समय बाबा को कांचा जल अर्पित करने की बारी होती है, भोग भी उन्हीं को बनाना व लगाना होता है, जो आजतक जारी है. वर्तमान में चार घर से सैकड़ों घर हो गये हैं, सबकी अपनी-अपनी बारी होती है.
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बाबा को लगने वाले इस मौसमी भोग को पुजारी परिवार बिना अन्न-जल ग्रहण किये ही बनाते हैं. वहीं, इस भोग में सामान्य जल का उपयोग नहीं होता है. गंगाजल से ही खिचड़ी बनायी जाती है. इस सात्विक भोग को श्री यंत्र में अलग-अलग भगवान को अलग-अलग पत्ते में परोस कर भोग अर्पित करने की परंपरा है.
शृंगारी परिवार में छुतका होने के कारण खचड़ी का भोग शुक्रवार को पहले दिन ओझा परिवार से जरुवाडीह निवासी मनोज झा ने बनाया तथा मल्लू झा ने भोग लगाया. शृंगारी परिवार में छुतका खत्म होने तक ओझा परिवार के द्वारा ही भोग बनाने की परंपरा का निर्वहन किया जायेगा.
रिपोर्ट : संजीव मिश्रा, देवघर.
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