Delhi assembly election results 2020: सत्ता की चाबी पूर्वांचलियों के हाथ, इस बार भी ये साबित हो गया

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्लीः दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 नतीजे सामने आ गए हैं. आम आदमी पार्टी(AAP) एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है. इसी के साथ अरविंद केजरीवाल लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बनेंगे. इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्वांचली-बिहारी वोटरों ने अहम भूमिका निभायी. आम आदमी पार्टी (आप) के जिन उम्मीदवारों की जीत हुई है, उनमें 11 बिहार के रहनेवाले हैं.

वहीं, भाजपा जिन ने आठ सीटों पर जीत दर्ज की है, उनमें सात सीटें पूर्व और उत्तर-पूर्व दिल्ली की हैं. इन्हीं इलाकों में पूर्वांचली और बिहार-झारखंड के लोग सबसे ज्यादा रहते हैं, लेकिन भाजपा के लिए यह आंकड़ा नाकाफी है. जिस तरह का असर पूर्वांचली पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रखते हैं, उसके हिसाब से ये टैली कुछ भी नहीं है. इस चुनावी नतीजे से पता चलता है कि 2015 की तरह इस बार भी पूर्वांचली वोटर्स ने आम आदमी पार्टी को ही वोट दिया है.

बिहार के नेताओं के लेखा-जोखा

बिहार के 13 नेता चुनाव जीत कर दिल्ली के विधायक बने हैं. इनमें एक बीजेपी के अभय वर्मा हैं. दरभंगा के रहनेवाले वर्मा ने लक्ष्मीनगर सीट पर विजयी दर्ज की है. हालांकि, यह भी कटु सत्य है कि बिहार की पार्टियां जेडीयू ने दो, एलजेपी ने एक और आरजेडी ने चार सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये थे. लेकिन, इनमें से एक के भी सिर पर जीत का सेहरा नहीं बंध पाया. बिहार से आनेवाले आम आदमी पार्टी के 11 उम्मीदवार दोबारा विधायक बने हैं. उम्मीदवार विनय मिश्र ने पहली बार जीत हासिल की है. जेडीयू और एलजेपी के उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे. जबकि, आरजेडी के चारों उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी.

Delhi assembly election results 2020: सत्ता की चाबी पूर्वांचलियों के हाथ, इस बार भी ये साबित हो गया

पूर्वांचली वोटर्स की अहम भूमिका

दरअसल, दिल्ली के चुनाव में पूर्वांचली वोटर्स की अहम भूमिका होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए साल 2016 में मनोज तिवारी को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन जिन पूर्वांचली वोटर्स ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को झोली भर-भर के वोट दिये, उसने इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को गच्चा दे दिया.

पूर्वांचली वोटर्स पिछले दो बार से विधानसभा चुनाव में भाजपा को गच्चा देते आये हैं. एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली में बिहार और यूपी के रहने वाले पूर्वांचली वोटर दिल्ली की करीब 25 से 30 सीटों पर अपना असर रखते हैं. इनमें 15 सीटें पूर्वांचल बहुल सीटें हैं. इन सीटों की किस्मत पूर्वांचल के वोटर ही तय करते हैं. पूर्वांचल के वोटर्स सावधानी से वोट करते हैं. केंद्र के चुनाव में उनके भाजपा को वोट करने का पैटर्न मिलता है, तो राज्य के चुनाव में आम आदमी पार्टी को.

राजनीतिक दलों में पूर्वांचल हितैषी बनने की होड़

दिल्ली विधानसभा चुनाव के एलान के साथ ही भाजपा,आर औऱ कांगेस नेताओं में पूर्वांचल हितैषी बनने की होड़ मची रही. ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है कि दिल्ली का राजनीतिक समीकरण बदल गया. पहले राजनीतिक पार्टियों का फोकस पंजाबी और वैश्य समुदाय के मतदाताओं पर होता था. अब उनका ध्यान पूर्वांचली वोटरों पर गया. अनाधिकृत कॉलोनियों में भी इनकी बड़ी तादाद है. ऐसे में सभी प्रमुख पार्टियों की नजर भी इन्हीं मतदाताओं पर रहा.

दिल्ली चुनाव में बिहारी नेताओं का रहा दबदबा

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के अलावा सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने चुनाव के लिए बिहारियों पर भरोसा किया. कांग्रेस ने जहां बिहार से ताल्लुक रखने वाले कीर्ति झा आजाद को दिल्ली चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया. तो आरजेडी ने मनोज झा को दिल्ली का प्रभारी बनाया.

वहीं बीजेपी की सहयोगी पार्टी जनता दल युनाइटेड यानी जेडीयू ने भी संजय झा को दिल्ली का प्रभारी बनाया. बीजेपी ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और बिहार से सांसद नित्यानंद राय को दिल्ली का प्रभारी बनाया. मतलब सभी प्रमुख राजनीतिक दल के दिल्ली प्रभारी बिहार के ही रहने वाले हैं. बीजेपी की दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पहले से ही बिहार के रहने वाले हैं.

पूर्वांचल के मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा

पूर्वांचल के इन वोटर्स के लिए हिंदुत्व और राष्ट्रवाद एक बड़ा मुद्दा है. इसलिए दिल्ली चुनावों के दौरान इन मुद्दों को भाजपा ने जोरदार तरीके से उठाया भी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा जैसे नेताओं ने भड़काऊ और तीखे बयान भी दिये, लेकिन फिर भी उनके वोट हासिल नहीं कर सके. केजरीवाल ने अपनी सधी और संयमित प्रतिक्रिया से मामले को और बिगड़ने नहीं दिया.

एक बड़ी बात ये भी रही है कि दिल्ली में पूर्वांचल के ज्यादातर वोटर्स वर्किंग क्लास से आते हैं. बहुत सारे लोग मेहनत मजदूरी करने वाले हैं. इन लोगों के लिए केजरीवाल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने काम किया. इस वजह से भी एक तरफ वे मोदी के चेहरे को केंद्र में देखना चाहते थे, तो राज्य में उन्हें केजरीवाल जैसा सीएम ही चाहिए था. दिल्ली का मिडिल क्लास पूर्वांचली वोटर्स भी आम आदमी पार्टी का समर्थक है. इसकी वजह है बिजली और पानी पर मिलने वाली छूट. सरकारी स्कूलों की बेहतर हालत और स्वास्थ्य सेवाओं की सुधरती स्थित है.

2015 में भी आप ने 13 सीटें पूर्वांचली इलाकों से जीती थीं

2015 में भी पूर्वांचली वोटर्स ने ‘आप’ का साथ दिया था. 2015 में ‘आप’ से जीते 67 उम्मीदवारों में 13 पूर्वांचल से थे. इस जीत के बाद भी केजरीवाल ने पूर्वांचली वोटर्स तक अपनी पहुंच और ज्यादा पहुंचायी. छठ पर्व के मौकों पर घाटों की साफ सफाई इसी कड़ी का एक हिस्सा थी.

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