छेरा पहंरा के साथ जीवंत हो उठी सदियों पुरानी परंपरा

Author Sachindra Dash|Edited by Sweta Vaidya
Updated:
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हरिभंजा में रथ यात्रा के दौरान छेरा पोहरा रश्म को निभाते जमींदार परिवार के सदस्य संजय सिंहदेव और राजेश सिंहदेव | Prabhat Khabar Network

हरिभंजा में रथ यात्रा के दौरान छेरा पोहरा रस्म को निभाते जमींदार परिवार के सदस्य संजय सिंहदेव और राजेश सिंहदेव | Prabhat Khabar Network

सरायकेला-खरसावां की ऐतिहासिक रथयात्रा में छेरा पहंरा की रस्म के साथ सदियों पुरानी राजपरंपरा जीवंत हो उठी। जानिए इस अद्भुत धार्मिक अनुष्ठान की पूरी जानकारी।

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खरसावां. सरायकेला-खरसावां की ऐतिहासिक रथयात्रा में गुरुवार को एक बार फिर सदियों पुरानी राजपरंपरा जीवंत हो उठी. प्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू होने से पहले राजघराने के प्रतिनिधियों ने पारंपरिक छेरा पहंरा की रस्म निभायी. इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद ही महाप्रभु का रथ मौसीबाड़ी स्थित गुंडिचा मंदिर के लिए रवाना हुआ. रथयात्रा के दौरान इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. आजादी के बाद देशी रियासतों का भारत गणराज्य में विलय हो गया, लेकिन सरायकेला, खरसावां और हरिभंजा में राजवाड़ा काल से चली आ रही रथयात्रा की परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभायी जाती हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण परंपरा छेरा पहंरा की है. मान्यता है कि इस रस्म के बिना रथयात्रा प्रारंभ नहीं होती. छेरा पहंरा के दौरान राजघराने के प्रतिनिधि रथ के मार्ग पर चंदन मिश्रित जल का छिड़काव करते हैं तथा पारंपरिक रीति से झाड़ू लगाकर मार्ग को पवित्र करते हैं. यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है. सरायकेला में राजघराने के राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव, खरसावां में राज गोपाल नारायण सिंहदेव तथा हरिभंजा में राजेश सिंहदेव ने छेरा पहंरा की रस्म अदा कर वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया. धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा का रथ मौसीबाड़ी के लिए रवाना हुआ. रथयात्रा के दौरान पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, नृत्य और जय जगन्नाथ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. सदियों पुरानी इस परंपरा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी सरायकेला-खरसावां की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पूरी जीवंतता के साथ सुरक्षित है.


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Sachindra Dash

लेखक के बारे में

By Sachindra Dash

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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