जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा हरिभंजा, आस्था की डोर खींच हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचाया महाप्रभु का रथ

Author Sachindra Dash|Edited by Sweta Vaidya
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खरसावां के हरिभंजा में भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई। हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डोर खींचकर महाप्रभु को गुंडिचा मंदिर पहुंचाया।

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खरसावां : श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम गुरुवार को हरिभंजा में देखने को मिला, जब जय जगन्नाथ के गगनभेदी जयघोष के बीच चतुर्धा मूर्ति (भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन) की ऐतिहासिक रथयात्रा निकाली गई. सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. शंखध्वनि, हरिनाम संकीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चतुर्धा विग्रह को पारंपरिक पोहंडी विधि से मंदिर से रथ तक लाया गया. जैसे ही प्रभु रथ पर विराजमान हुए, हजारों श्रद्धालुओं ने आस्था की डोर थामकर रथ को मौसीबाड़ी स्थित गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया. रथयात्रा मार्ग श्रद्धालुओं, भजन-कीर्तन और जयघोष से दिनभर भक्तिमय बना रहा.

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हरिभंजा में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन को रथ पर चढ़ाते श्रद्धालु
हरिभंजा में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन को रथ पर चढ़ाते श्रद्धालु

छेरा-पहंरा के साथ निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा

रथयात्रा आरंभ होने से पहले हरिभंजा के जमींदार परिवार ने पारंपरिक छेरा-पहंरा की रस्म निभाई. जमींदार परिवार के संजय सिंहदेव एवं राजेश सिंहदेव ने रथ मार्ग पर चंदन मिश्रित जल का छिड़काव कर झाड़ू लगाई. इसके बाद पुरोहित पंडित प्रदीप कुमार दाश एवं भरत त्रिपाठी ने विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महाप्रभु को रथ पर विराजमान कराया. इसके पश्चात भक्तों ने रथ को खींचते हुए श्रीमंदिर से श्रीगुंडिचा मंदिर तक पहुंचाया. गुंडिचा मंदिर पहुंचने पर चतुर्था मूर्ति का आरती उतारी गयी तथा भोग लगाया गया.


हरिभंजा में प्रभु बलभद्र को रथ में चढ़ाते श्रद्धालु
हरिभंजा में प्रभु बलभद्र को रथ में चढ़ाते श्रद्धालु

गुंडिचा मंदिर में हुई विशेष पूजा, बंटा महाप्रसाद

रथ को खींचते हुए श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते गुंडिचा मंदिर पहुंचे, जहां प्रभु की आरती उतारी गई और विशेष भोग अर्पित किया गया. इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया. दिनभर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही.


हरिभंजा में छेरा पोहरा रस्म को निभाते जमींदार परिवार के सदस्य
हरिभंजा में छेरा पोहरा रस्म को निभाते जमींदार परिवार के सदस्य

घंटा-घुमुरा नृत्य बना आकर्षण का केंद्र

रथयात्रा में पश्चिम ओड़िशा के बोलांगीर से पहुंचे लगभग 100 कलाकारों ने घंटा एवं घुमुरा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया. पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और लोकनृत्य ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया. श्रद्धालु भी भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए.


मंडप पर विराजमान प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा
मंडप पर विराजमान प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा

नया रथ बना आकर्षण का केंद्र

ओड़िशा के कारीगरों द्वारा निर्मित नया भव्य रथ भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा. इसकी पारंपरिक नक्काशी और रंग-सज्जा की लोगों ने जमकर सराहना की. रथयात्रा के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं यातायात की व्यापक व्यवस्था की गई थी. हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में हरिभंजा की ऐतिहासिक रथयात्रा एक बार फिर क्षेत्र की समृद्ध उत्कलीय संस्कृति, आस्था और परंपरा की जीवंत मिसाल बन गई.


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