डेंगू को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट, स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर कर रही जांच, जानें क्या है लक्षण...
सरायकेला सदर अस्पताल.
सरायकेला-खरसावां में डेंगू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। घर-घर जाकर जांच और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बचाव के उपाय जानें।
सरायकेला : बारिश के मौसम में डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में घर-घर जाकर सघन जांच और जागरूकता अभियान चला रही हैं. सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह ने बताया - स्वास्थ्य कर्मी सीधे लोगों के घरों तक पहुंचकर उन्हें डेंगू के प्रकोप और उससे बचाव के तौर-तरीकों की जानकारी दे रहे हैं.
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जल जमाव वाले स्थानों का विशेष निरीक्षण
जांच अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा विशेष रूप से कूलर, फूल के गमले, पानी की टंकी, फ्रिज की डिफ्रॉस्ट ट्रे और कबाड़ में पड़े पुराने टायरों का निरीक्षण किया जा रहा है. ये वे स्थान हैं जहां अक्सर साफ पानी जमा रहता है और मच्छरों के लार्वा पनपते हैं. लोगों को हिदायत दी जा रही है कि वे इन जगहों पर अधिक समय तक पानी जमा न रहने दें. प्रशासन ने विशेष जागरूकता संदेश भी दिया है. प्रत्येक रविवार, प्रातः 10 बजे, 20 मिनट, अपने घर के अंदर और बाहर पानी के जमाव को साफ करने को कहा गया है. इसको लेकर आमजन को प्रेरित किया जा रहा है.
जिले में अब तक एक भी मामला नहीं, मलेरिया की भी जांच जारी
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि राहत की बात यह है कि फिलहाल सरायकेला-खरसावां जिले में डेंगू का एक भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, फिर भी एहतियात के तौर पर विभाग ने पूरी मुस्तैदी बरत रखी है. अभियान के दौरान मलेरिया रोकथाम के तहत बुखार से पीड़ित मरीजों के ब्लड सैंपल लेकर त्वरित जांच की जा रही है. रिपोर्ट के आधार पर मरीजों को मौके पर ही दवाएं और चिकित्सकीय परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
जिले में नहीं है डेंगू जांच की सुविधा, जमशेदपुर पर निर्भरता
सिविल सर्जन डॉ. सिंह ने बताया कि सरायकेला-खरसावां जिले में डेंगू की पुष्टि के लिए एलिजा जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके लिए जिला पूर्ण रूप से जमशेदपुर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पर निर्भर है. जिले में किसी भी संदिग्ध मरीज के पाए जाने पर उसका सैंपल तुरंत जांच के लिए एमजीएम भेजा जाता है, जहां से रिपोर्ट आने के बाद ही डेंगू की आधिकारिक पुष्टि होती है.
दिन के समय काटता है एडीस मच्छर
डेंगू के प्रसार की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन ने बताया कि यह बीमारी एडीस मच्छर के काटने से फैलती है. इस मच्छर की खासियत है कि यह अमूमन दिन के समय, खासकर सुबह और शाम के वक्त ही लोगों को अपना शिकार बनाता है. घरों के अंदर व बाहर साफ पानी का जमा होना, दिन में पूरी आस्तीन के कपड़े न पहनना तथा मच्छरदानी का उपयोग न करना इसके फैलने के प्रमुख कारण हैं.
तेज बुखार व जोड़ों में दर्द हैं डेंगू के प्रमुख लक्षण
सिविल सर्जन के अनुसार, अचानक 104 डिग्री तक तेज बुखार आना, असहनीय सिरदर्द, आंखों के पिछले हिस्से में दर्द होना और मांसपेशियों व जोड़ों में तेज खिंचाव डेंगू के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं. शरीर में ऐसे लक्षण दिखायी देते ही बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
सतर्कता और स्वच्छता ही सबसे बड़ा बचाव
डेंगू से बचाव के उपायों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हर सप्ताह कूलर, गमले और टंकियों का पानी अनिवार्य रूप से बदलें. पानी के बर्तनों को हमेशा ढक कर रखें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें. बुखार आने पर स्वयं से कोई दवा (सेल्फ मेडिकेशन) न लें और शरीर में पानी की कमी न होने दें. इसके लिए नारियल पानी, ओआरएस व अन्य तरल पदार्थों का प्रचुर मात्रा में सेवन करें. सिविल सर्जन ने अपील की है कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही पनपता है, इसलिए सफाई ही इसका अचूक उपाय है. पैनिक होने के बजाय सतर्कता बरतें.
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