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KVS Admission 2022: 6 वर्ष ही रहेगी KV कक्षा 1 में एडमिशन की उम्र सीमा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

Updated at : 27 Apr 2022 4:34 PM (IST)
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KVS Admission 2022: 6 वर्ष ही रहेगी KV कक्षा 1 में एडमिशन की उम्र सीमा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

KVS Admission 2022: न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ के 11 अप्रैल के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ अभिभावकों की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी.

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KVS Admission 2022: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है, और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है, जिसमें शैक्षणिक वर्ष 2022-2023 से कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष करने के निर्णय को चुनौती दी गई थी.

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ के 11 अप्रैल के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ अभिभावकों की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी. पीठ ने कहा कि कुछ अन्य याचिकाकर्ताओं ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया था और उन इंट्रा-कोर्ट अपीलों को भी खारिज कर दिया गया था. पीठ ने कहा कि वह एकल पीठ के विचार से “पूर्ण सहमति” में थी और खंडपीठ ने अपीलों को खारिज कर दिया.

उम्र सीमा NEP के अनुसार

बता दें कि केवीएस ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया था कि कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार बढ़ाई गई थी. केवीएस ने इस तर्क का भी खंडन किया कि निर्णय अधिकार का उल्लंघन करता है. केवीएस ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम कक्षा 1 की प्रवेश आयु को 6 वर्ष या उससे अधिक मानता है. इसके अलावा, कक्षा / ग्रेड -1 में प्रवेश के लिए आयु मानदंड एनईपी 2020 के अनुरूप होना चाहिए क्योंकि कार्यपालिका के पास यह तय करने की क्षमता है कि नीति को कैसे आकार या लागू किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट की अभिभावकों को सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सलाह दी है कि बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को देखते हुए बहुत ही कम उम्र में उन्हें स्कूल नहीं भेजना चाहिए. माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे 2 साल की उम्र से ही स्कूल जाना शुरू कर दें लेकिन ऐसा करने से बच्चों के मेंटल और फिजकिल हेल्थ पर बुरा असर पड़ेगा. जस्टिस संजय किशन कौल और एमएम सुंदरेश की पीठ ने इस पर टिप्पणी की है.

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