West Bengal : विधानसभा में विधेयक हुआ पास, अब बिल्डिंग प्लान की मंजूरी होगी 15 दिनों में

पश्चिम बंगाल के नगरपालिका क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए 60 दिन के बजाय 15 दिन में बिल्डिंग प्लान मंजूर किये जाने का प्रस्ताव दिया गया था. जिसे विधानसभा में विधेयक पास कर दिया गया है. वहीं नगरपालिकाओं के कार्य में पारदर्शिता रखने के लिए अब बिल्डिंग प्लान को ऑनलाइन जारी किया जायेगा.
पश्चिम बंगाल के शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के मंत्री फिरहाद हकीम (Firhad hakim) ने विधानसभा में ‘पश्चिम बंगाल नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2022’ पेश किया. इस विधेयक में राज्य के नगरपालिका क्षेत्रों में भवन निर्माण के लिए 60 दिन के बजाय 15 दिन में बिल्डिंग प्लान मंजूर किये जाने का प्रस्ताव है. विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने ध्वनि मत से बिल के पारित होने की घोषणा की. अब विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जायेगा. राज्यपाल के हस्ताक्षर करने के साथ ही यह बिल नये कानून का रूप ले लेगा.
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बिल को पेश किये जाने के दौरान मंत्री फिरहाद हकीम ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि, पहले नगरपालिका क्षेत्र में 60 दिनों में बिल्डिंग प्लान को मंजूर किया जाता था. जिसे घटा कर अब 15 दिन कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि बोर्ड ऑफ काउंसिलर्स द्वारा बिल्डिंग प्लान अब मंजूर किया जायेगा. इससे पहले नगरपालिकाओं के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर भवन निर्माण से संबंधित सभी तरह की जांच करेंगे. इसके लिए बिल में उन्हें विशेषाधिकार दिये जाने का प्रस्ताव किया गया है. सभी तरह की जांच के बाद वे बिल्डिंग प्लान मंजूर किये जाने के लिए बोर्ड ऑफ काउंसिलर्स की बैठक में प्रस्ताव रखेंगे. इसके बाद ही बिल्डिंग प्लान मंजूर होगा.
वहीं नगरपालिकाओं के कार्य में पारदर्शिता रखने के लिए अब बिल्डिंग प्लान को ऑनलाइन जारी किया जायेगा. विधानसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कुल नौ विधायकों ने अपने-अपने विचार रखे. गौरतलब है कि कोलकाता में पहले से ही 15 दिनों में बिल्डिंग प्लान को मंजूर किया जा रहा है. वहीं कोलकाता समेत राज्य भर में ऑनलाइन म्युटेशन जारी किया जा रहा है.
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मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि नगरपालिकाओं के काम-काज को और बेहतर ढंग से करने की जरूरत है. प्रशासनिक कार्यों के लिए पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) अधिकारियों की कमी है. इसके चलते हमें बार- बार राज्य सरकार से इन अधिकारियों की मांग करनी पड़ती है. डब्ल्यूबीसीएस प्रशासनिक कामकाज को करने में सक्षम होते हैं. पर इनकी संख्या कम होने की वजह से हमें सेवानिवृत्त अधिकारियों से काम कराना होता है. लेकिन ऐसे अधिकारी वित्तीय फैसले नहीं ले सकते हैं. इससे नगरपालिकाओं के कामकाज में बाधा पड़ती है. ‘म्युनिसिपल सर्विस’ नाम से नया पद सृजित कर म्युनिसिपल सर्विस कमीशन के जरिये डिप्टी मैनेजर या सीनियर डिवीजन क्लर्क को नियुक्त किया जायेगा. मंत्री ने कहा कि बड़ी नगरपालिकाओं में डब्ल्यूबीसीएस अधिकारी की ज्यादा कमी नहीं है. ग्रुप सी और डी स्तर की नगरपालिका के कामकाज को कराने के लिए हमें ऐसे अधिकारी नहीं मिल रहे हैं.
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