Budget से पहले क्यों अहम होता है Economic Survey, कैसे तय करता है सरकार की दिशा

भारत में पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में जारी किया गया था
Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण हर साल तैयार की जाने वाली एक अहम सरकारी रिपोर्ट है, जिसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs– DEA) द्वारा प्रकाशित किया जाता है. इसे सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन की निगरानी में तैयार किया जाएगा
Economic Survey: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश कर सकती हैं. बजट से ठीक पहले वित्त मंत्रालय द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) जारी किया जाता है, जिसे देश की अर्थव्यवस्था का “रिपोर्ट कार्ड” माना जाता है. इस अवसर पर मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सर्वेक्षण की प्रमुख बातों को साझा करते हैं.
आर्थिक सर्वेक्षण क्या होता है?
आर्थिक सर्वेक्षण हर साल तैयार की जाने वाली एक अहम सरकारी रिपोर्ट है, जिसे वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs– DEA) द्वारा प्रकाशित किया जाता है. इसे सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन की निगरानी में तैयार किया जाएगा. इस रिपोर्ट में बीते वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, महंगाई, रोजगार, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है.
आर्थिक सर्वेक्षण का उद्देश्य क्या है?
आर्थिक सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य सरकार, संसद और आम जनता को यह बताना होता है कि
- देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है.
- किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है.
- आगे के लिए नीतिगत सुझाव क्या हो सकते हैं.
- यही कारण है कि बजट बनाने से पहले आर्थिक सर्वेक्षण को बेहद अहम माना जाता है.
आर्थिक सर्वेक्षण में क्या-क्या शामिल होता है?
आर्थिक सर्वेक्षण को आमतौर पर दो भागों – भाग A और भाग B में बांटा जाता है.
| भाग | मुख्य विषय |
|---|---|
| भाग A | सालभर के प्रमुख आर्थिक घटनाक्रम |
| जीडीपी ग्रोथ, महंगाई और राजकोषीय स्थिति | |
| कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन | |
| वैश्विक अर्थव्यवस्था का भारत पर प्रभाव | |
| भाग B | सामाजिक सुरक्षा योजनाएं |
| गरीबी और असमानता | |
| शिक्षा और स्वास्थ्य | |
| मानव विकास | |
| जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे |
हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण और बजट दो अलग-अलग दस्तावेज हैं, लेकिन दोनों का आपस में गहरा संबंध होता है. आर्थिक सर्वेक्षण में दिए गए आंकड़े, विश्लेषण और सुझाव ही अक्सर आने वाले बजट की नीतियों और घोषणाओं की दिशा तय करते हैं.
पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण कब पेश किया गया था?
भारत में पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में जारी किया गया था. शुरुआत में यह दस्तावेज 1964 तक केंद्रीय बजट के साथ ही पेश किया जाता था, लेकिन बाद में इसे बजट से अलग कर बजट से पहले पेश करने की परंपरा शुरू की गई, ताकि बजट निर्माण में इसका बेहतर उपयोग हो सके.
आर्थिक सर्वेक्षण सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह सरकार की आर्थिक सोच, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति को भी दर्शाता है. निवेशकों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए यह दस्तावेज देश की आर्थिक सेहत को समझने का सबसे भरोसेमंद स्रोत माना जाता है.
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लेखक के बारे में
By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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