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अमेरिकी कंपनी मूडीज एनालिटिक्स का दावा : रूस-यूक्रेन युद्ध से गाड़ियां, मोबाइल फोन समेत कई चीजें महंगी

अमेरिकी कंपनी मूडीज एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़ा प्रभाव चिप की सप्लाई पर पड़ेगा. सेमीकंडक्टर बनाने में प्रमुख कच्चे माल की आपूर्ति इन्हीं दोनों देशों से की जाती है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
कई उद्योगों में होता सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल
कई उद्योगों में होता सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल
फोटो : ट्विटर

मुंबई : रूस-यूक्रेन युद्ध का आज 10वां दिन है. दोनों देशों के इस युद्ध से विश्व में अशांति फैली है. आर्थिक और कारोबारी तौर पर कई प्रकार के कयास और दावे किए जा रहे हैं. अमेरिकी रिसर्च कंपनी मूडीज एनालिटिक्स ने दावा किया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सेमीकंडक्टर चिप की सप्लाई पर पड़ेगी. इसकी सप्लाई चेन में कमी आने का सबसे बुरा प्रभाव कई प्रकार के उद्योगों पर पड़ने की आशंका है. अमेरिकी कंपनी ने दावा किया है कि सेमीकंडक्टर चिप की सप्लाई प्रभावित होने से भारत में गाड़ियां, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सामान और मोबाइल फोन महंगे हो सकते हैं.

सेमीकंडक्टर चिप कहा होता है इस्तेमाल?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई चेन के प्रभावित होने से सबसे बुरा प्रभाव जारी सेमीकंडक्टर चिप संकट पर पड़ सकता है. इस सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल गाड़ियां, मोबाइल फोन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स सामान समेत कई दूसरे उद्योगों में प्रमुखता से किया जाता है. इसलिए भारत में ये प्रोडक्ट अब और महंगे हो सकते हैं.

रूस-यूक्रेन से होती है कच्चे माल की सप्लाई

अमेरिकी कंपनी मूडीज एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़ा प्रभाव चिप की सप्लाई पर पड़ेगा. सेमीकंडक्टर बनाने में प्रमुख कच्चे माल की आपूर्ति इन्हीं दोनों देशों से की जाती है. रिपोर्ट के अनुसार, रूस की पैलेडियम की वैश्विक आपूर्ति में 44 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि यूक्रेन नियोन की वैश्विक आपूर्ति में 70 फीसदी का योगदान देता है. इन दोनों कच्चे माल का इस्तेमाल प्रमुखता से चिप बनाने में किया जाता है. रिपोर्ट में कहा गया कि अगर रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य संकट और गहराता है, तो दुनिया में चली आ रही चिप संकट और भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. इससे इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, गाड़ियां, मोबाइल फोन के निर्माण में दिक्कतें आएंगी.

टीएमटी सरिया 5000 टन महंगा

घरेलू इस्पात बनाने वाली कंपनियों ने हॉट रोल्ड कॉयल और टीएमटी सरिये का दाम 5000 रुपये प्रति टन तक बढ़ा दिया है. रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से घरेलू निर्माताओं ने इस्पात के दाम बढ़ाए हैं. उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इस्पात की कीमतों में वृद्धि की गई है और आने वाले हफ्तों में रूस-यूक्रेन युद्ध बढ़ने के साथ इसकी कीमत में और वृद्धि होने के आसार है.

कीमतों में बदलाव के बाद एचआरसी का भाव 66,000 रुपये प्रति टन पर पहुंच गया है. इसी तरह टीएमटी की कीमत लगभग 65,000 रुपये प्रति टन पर आ गई है. एक इस्पात कंपनी के अधिकारी के अनुसार, इस्पात की कीमतों में कुछ हफ्ते पहले की तुलना में लगभग 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.

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