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कौन हैं सुधीर राजभर, जिनके 'चमार स्टुडियो' के उत्पादों के फैन हैं रिहाना और राहुल गांधी

Updated at : 13 Mar 2025 4:59 PM (IST)
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Sudhir Rajbhar, Rahul Gandhi and Rihanna

मुंबई के धारावी स्थित चमार स्टुडियो के संस्थापक सुधीर राजभर (बाएं), कांग्रेस नेता राहुल गांधी (बीच में) और पॉप सिंगर रिहाना (दाहिने).

Success Story: सुधीर राजभर ने मुंबई में चमार स्टूडियो की स्थापना की और समाजिक चुनौतियों को अवसरों में बदला. अब वे एक प्रेरणादायक उद्यमी बन चुके हैं. उनके उत्पादों की पहचान यह है कि पॉप सिंगर रिहाना और राहुल गांधी भी उसके फैन और प्रशंसक हैं.

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Success Story: कोई क्या इस बात का अनुमान लगा सकता है कि जिस शब्द के सुनने से ही लोग घृणात्मक मुद्रा बना लेते हैं, वह नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकने लगेगा और उसके उत्पादों का फैन पॉप सिंगर रिहाना और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी हो सकते हैं. शायद आप उस आदमी का नाम जानना चाहेंगे, जिसने यह मुकाम हासिल किया है. उस आदमी का नाम सुधीर राजभर है. सुधीर राजभर मुंबई के धारावी में चमार स्टूडियो के संस्थापक और प्रेरणादायी उद्यमी हैं, जिन्होंने समाजिक चुनौतियों को अवसरों में बदला.

जौनपुर के सुधीर राजभर का मुंबई में हुआ पालन-पोषण

द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले सुधीर राजभर का पालन-पोषण मुंबई में हुआ. उन्होंने ड्राइंग और पेंटिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. गांव जाने पर उन्हें जातिसूचक शब्द ‘चमार’ से संबोधित किया जाता था, जिससे उन्हें आघात पहुंचता था.

सुधीर राजभर ने 2018 में की चमार स्टूडियो की स्थापना

सुधीर राजभर ने साल 2018 में मुंबई के धारावी में चमार स्टूडियो की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य ‘चमार’ शब्द को गौरव प्रदान करना था. उन्होंने चमड़े के उत्पाद जैसे हैंडबैग, जूते और टोटे बैग बनाना शुरू किया. स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर उन्होंने फुटपाथ पर अपने उत्पाद बेचे, जिससे व्यवसाय का विस्तार हुआ.

चमार स्टुडियो के उत्पादों की कीमत

चमार स्टूडियो के उत्पाद 1,500 रुपये से 6,000 रुपये तक की कीमत में उपलब्ध हैं. ब्रांड के उत्पाद अमेरिका, जर्मनी और जापान में भी बिकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है. सुधीर राजभर ने चमार स्टुडियो की स्थापना से लेकर अब तक करीब 10 लाख सोफा का उत्पादन किया है. उनके उत्पादों की शोहरत की बात करें, तो पॉप सिंगर रिहाना चमार स्टुडियो के सोफा को खरीदने वाली उपभोक्ता हैं.

राहुल गांधी ने एक्स पर की सुधीर राजभर की तारीफ

सोशल मीडिया मंच पर राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा है, “चमार स्टूडियो के सुधीर राजभर भारत के लाखों दलित युवाओं के जीवन और यात्रा को समेटे हुए हैं1 बेहद प्रतिभाशाली, विचारों से भरपूर और सफल होने के लिए भूखे लेकिन अपने क्षेत्र के अभिजात वर्ग से जुड़ने के लिए पहुंच और अवसर की कमी है. हालांकि, अपने समुदाय के कई अन्य लोगों के विपरीत उन्हें अपना खुद का नेटवर्क बनाने का अवसर मिला. उन्होंने धारावी के कारीगरों के छिपे हुए कौशल को समझा और उन्होंने एक ऐसा ब्रांड बनाया, जिसे वैश्विक स्तर पर फैशन के सबसे प्रतिष्ठित गलियारों में पहचाना जाता है.”

पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक उद्यमिता पर काम करता है चमार स्टुडियो

राहुल गांधी ने आगे लिखा है कि चमार स्टूडियो की सफलता इस बात पर प्रकाश डालती है कि पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक उद्यमिता कैसे एक साथ काम कर सकती है, ताकि कुशल कारीगरों को उस सफलता का एक हिस्सा मिल सके, जो उन्होंने अपने हाथों से बनाई है. आज धारावी में सुधीर और उनकी टीम के साथ काम करते हुए मैंने समावेशी उत्पादन नेटवर्क के महत्व को रेखांकित किया, जो विभिन्न क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों को आगे बढ़ाता है.

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सुधीर राजभर का मॉडल कारगर है: राहुल गांधी

राहुल गांधी ने लिखा, “मुझे लगा कि सुधीर के लिए अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरों के साथ साझा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. इसलिए, हम अपने दोस्त रामचेत मोची को सुल्तानपुर से उनसे मिलने लाए और समझा कि कैसे डिज़ाइन और नवाचार उनके व्यवसाय को बदल सकते हैं.” उन्होंने लिखा है, “मैंने लोकसभा में इस बारे में बात की थी कि कैसे एक समृद्ध भारत का निर्माण केवल “उत्पादन और भागीदारी” के माध्यम से किया जा सकता है. चमार स्टूडियो की सफलता से पता चलता है कि यह मॉडल कारगर है और मुझे उम्मीद है कि हम पूरे भारत में इस तरह के मॉडल को अपना सकते हैं.”

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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