Success Story: ₹300 से शुरू हुआ सफर, 300 गुना ओवरसब्सक्राइब्ड IPO तक, जानिए सुरेश मंशारामानी का जुनून

Updated at : 13 May 2025 12:54 PM (IST)
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suresh mansharamani

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Success Story: सुरेश मंशारामानी ने ₹300 प्रति माह की नौकरी से शुरुआत की और 1995 में 300 गुना ओवरसब्सक्राइब्ड IPO के साथ अपनी कंपनी लिस्ट कराई. 2002 में सब कुछ खोने के बाद भी उन्होंने फिर से शुरुआत की और आज वे प्रेरणादायक कोच और उद्यमी हैं.

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Success Story: इस दुनिया में जहां  सफलता अक्सर विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए ही सुरक्षित लगती है, बिज़नेस कोच सुरेश मंघरमानी दृढ़ता और आत्मविश्वास का एक चमकदार उदाहरण हैं. महाराष्ट्र के एक रिफ्यूजी कैंप में जन्मे सुरेश जी ने मात्र ₹300 प्रति माह की नौकरी से अपना सफर शुरू किया था. कठिनाइयों से हार न मानते हुए, उन्होंने अपनी कंपनी खड़ी की, जिसे 1995 में 300 गुना ओवरसब्सक्राइब्ड IPO के साथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट कराया. इस असाधारण उपलब्धि के लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा बिज़नेस एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया. हालांकि, किस्मत ने एक बार फिर कड़ी परीक्षा ली. 2002 में उन्होंने अपना सब कुछ खो दिया: कंपनी, घर और सारी संपत्ति. लेकिन सच्चे उद्यमी कभी हार नहीं मानते. सुरेश मंशारामानी ने फिर से जीरो से शुरुआत की और आज वे गर्व के साथ खड़े हैं. 

  • भारत के पहले इंटरनेशनल OKR कोच
  • सर्टिफाइड गैलप स्ट्रेंथ्स कोच
  • चार बार के TEDx स्पीकर
  • Tajurba के CEO, जो भारत का सबसे तेजी से बढ़ता MSME समुदाय है
  • सात किताबों के बेस्ट-सेलिंग लेखक

आज सुरेश जी के पास 2 मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स और 1 मिलियन से ज्यादा यूट्यूब सब्सक्राइबर्स हैं, जो उनके बिज़नेस डेवेलपमेंट, गोल-सेटिंग और लीडरशिप से जुड़े गहन अनुभवों को बड़े श्रद्धा से फॉलो करते हैं.

21 साल की उम्र से कोचिंग का सफर शुरू करने वाले सुरेश जी ने अब तक 10,000 से अधिक बिज़नेस ओनर्स को मेंटर किया है और भारत भर में 5000+ सदस्यों का एक मजबूत समुदाय खड़ा किया है. वे आज भारत के सर्वश्रेष्ठ OKR कोच, SME कोच, सेल्स ट्रेनर, SME IPO कोच और प्रेरणादायक मोटिवेशनल स्पीकर्स में से एक माने जाते हैं.

आज अपने IPO लॉन्च इनिशिएटिव प्रोग्राम के माध्यम से, सुरेश मंशारामानी का मिशन है 500 MSMEs को सफलतापूर्वक IPO लॉन्च करने में मार्गदर्शन देना भारत के उद्यमिता सपनों को पंख देने के लिए. एक रिफ्यूजी कैंप से 300 गुना ओवरसब्सक्राइब्ड IPO और भारत के सबसे बड़े MSME समुदाय के निर्माण तक — सुरेश मंशारामानी की कहानी इस बात का प्रमाण है कि असफलताएँ अक्सर एक महान वापसी का मंच तैयार करती हैं.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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