मुफ्त की सौगातें या आर्थिक आफत ? चुनावी वादों से राज्यों पर पड़ेगा ₹1.6 लाख करोड़ का बोझ
बंगाल में महिलाओं और बेरोजगारों को हर महीने ₹3,000 की नकद सहायता का वादा किया है. (फोटो : Canva)
State Elections 2026 Promises : चुनावी वादों ने बढ़ाई राज्यों की टेंशन! पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों पर पड़ेगा ₹1.6 लाख करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ. जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स.
State Elections 2026 Promises : हालिया विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए वादों की झड़ी लगा दी है. लेकिन इकोनॉमिक टाइम्स और नोमुरा जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट एक डरावनी तस्वीर पेश कर रही हैं. अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इन वादों को पूरा करने के चक्कर में राज्यों के खजाने पर 1.6 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
पश्चिम बंगाल: ₹72,600 करोड़ का ‘वित्तीय झटका’
पश्चिम बंगाल में भाजपा के वादों को लागू करने के लिए राज्य के बजट पर बड़ा दबाव आने वाला है.
- वादा: महिलाओं और बेरोजगारों को हर महीने ₹3,000 की नकद सहायता (DBT).
- केवल इस एक वादे से राज्य की जीडीपी (GDP) पर 3.4% का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
- किसानों को ₹9,000 का भुगतान और धान के MSP में 30% की वृद्धि जैसे वादों से राजकोषीय गणित पूरी तरह बिगड़ सकता है, जबकि पहले ही घाटा 2.9% प्रस्तावित था.
तमिलनाडु: सोना, साड़ी और सब्सिडी का गणित
नवेली टीवीके पार्टी ने तमिलनाडु में बड़ी जीत हासिल की है, लेकिन उनके वादों को पूरा करने की कीमत ₹87,900 करोड़ आंकी गई है.
- वादे: ₹2,500 मासिक नकद ट्रांसफर, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, और साल में 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर.
- शादी का तोहफा: गरीब परिवारों की बेटियों के लिए 8 ग्राम सोना और रेशमी साड़ी.
- आर्थिक विश्लेषण: एमके ग्लोबल के अनुसार, इन वादों को लागू करने पर राज्य की जीडीपी का 2.2% हिस्सा खर्च होगा, जिससे राजकोषीय घाटा बजट सीमा (3%) से काफी ऊपर जा सकता है.
केरलम् : पेंशन का बढ़ता दबाव
केरलम् में पहले से ही वित्तीय स्थिति चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में पेंशन राशि बढ़ाने के वादे से राज्य के खर्च में ₹8,500 करोड़ का इजाफा होगा. वित्त वर्ष 2026 के लिए कुल घाटा जीडीपी का 3.4% रहने का अनुमान है, जो बजट अनुमान (3.1%) से ज्यादा है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स ?
सोनल वर्मा (नोमुरा की अर्थशास्त्री): लोकलुभावन (Populist) वादे अब राजनीति का मुख्य आधार बन गए हैं. जीत के बाद इन वादों को पूरा करने का दबाव उन राज्यों की राजकोषीय स्थिति को और खराब कर देगा जो पहले से ही कर्ज और वित्तीय बोझ के तले दबे हुए हैं.
| राज्य | अतिरिक्त बोझ (अनुमानित) | प्रमुख चिंता |
| पश्चिम बंगाल | ₹72,600 करोड़ | GDP का 3.4% अतिरिक्त बोझ |
| तमिलनाडु | ₹87,900 करोड़ | GDP का 2.2% अतिरिक्त बोझ |
| केरल | ₹8,500 करोड़ | बढ़ता राजकोषीय घाटा |
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लेखक के बारे में
By अभिषेक पाण्डेय
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करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।
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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।
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