फ्रंट रनिंग मामले में 9 यूनिट्स पर चला सेबी का चाबुक, 21 करोड़ रुपये की अवैध कमाई जब्त
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 02 Jan 2025 6:25 PM
SEBI Ban: सेबी ने एक जनवरी, 2021 से 19 जुलाई, 2024 तक जांच की थी थी. अपनी जांच में सेबी ने पाया कि पीएनबी मेटलाइफ में अधिकांश लेन-देन से संबंधित फैसले परफॉर्मेंस के लिए सचिन दगली को सौंपे गए थे.
SEBI Ban: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के इक्विटी डीलर सचिन बकुल दगली समेत 9 यूनिट्स से जुड़ी एक ‘फ्रंट-रनिंग’ योजना का भंडाफोड़ किया है. इन लोगों ने इस योजना के जरिये 21.16 करोड़ रुपये का अवैध कमाई की थी. फिलहाल, सेबी ने इन सभी यूनिट्स पर रोक लगा दी है.
पीएनबी मेटलाइफ ने की अनुशासनात्मक कार्रवाई
गुरुवार को पीएनबी मेटलाइफ की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि उसने जांच के दौरान सेबी को पूरा साथ दिया और इस मामले में शामिल व्यक्ति के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की है. कंपनी ने बयान में कहा, ‘‘अपनी इंटरनल प्रोसेस के तहत हमने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. मेटलाइट कंपनी संचालन और पारदर्शिता के हाई स्टैंडर का पालन करती है.’’
क्या है फ्रंट रनिंग
‘फ्रंट रनिंग’ का मतलब एडवांस इन्फॉर्मेशन के आधार पर शेयर बाजार में लेन-देन करना और लाभ कमाना है. उस समय तक यह इन्फॉर्मेशन ग्राहकों को उपलब्ध नहीं होती. इस मामले से जुड़ी यूनिट्स की ओर से फ्रंट-रनिंग तीन साल से अधिक समय तक जारी रही.
सेबी ने नौ यूनिट्स को किया बैन
सेबी ने हाल ही में जारी अपने एक अंतरिम आदेश में सचिन बकुल दगली और आठ दूसरी यूनिट्स को सिक्योरिटी मार्केट से बैन कर दिया. इसके साथ ही, सेबी उनकी अवैध कमाई को को जब्त भी कर दिया. सेबी ने कुछ इकाइयों की ओर से बड़े ग्राहकों के पीएनबी मेटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के लेन-देन में संदिग्ध ‘फ्रंट रनिंग’ की जांच की थी.
जनवरी 2021 से जांच कर रहा था सेबी
सेबी की जांच का मकसद यह पता लगाना था कि क्या संदिग्ध यूनिट्स ने डीलरों या फंड मैनेजर सहित दूसरे लोगों के साथ मिलीभगत करके बड़े ग्राहकों के लेन-देन में फ्रंट रनिंग की थी. इस तरह इन लोगों ने सेबी के पीएफयूटीपी (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध) नियमों और सेबी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया था. जांच की अवधि एक जनवरी, 2021 से 19 जुलाई, 2024 तक थी. अपनी जांच में सेबी ने पाया कि पीएनबी मेटलाइफ में अधिकांश लेन-देन से संबंधित फैसले परफॉर्मेंस के लिए सचिन दगली को सौंपे गए थे.
फ्रंट रनिंग के जरिए ऐसे करते थे लेन-देन
सेबी ने पाया कि सचिन बकुल दगली (इक्विटी डीलर, पीएनबी मेटलाइफ) और उनके भाई तेजस दगली (इक्विटी सेल्स ट्रेडर, इन्वेस्टेक) ने पीएनबी मेटलाइफ और इन्वेस्टेक के संस्थागत ग्राहकों के आने वाले ऑर्डर के बारे में गोपनीय, गैर-सार्वजनिक जानकारी प्राप्त की. उन्होंने इस जानकारी का इस्तेमाल लेन-देन के लिए किया और इसे संदीप शंभरकर के साथ साझा किया. संदीप शंभरकर ने धनमाता रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड (डीआरपीएल), वर्थी डिस्ट्रिब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड (डब्ल्यूडीपीएल) और प्रग्नेश संघवी के खातों के जरिये फ्रंट रनिंग लेन-देन किया.
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डीआरपीएल और डब्ल्यूडीपीएल के निदेशकों ने भी उठाया फायदा
डीआरपीएल और डब्ल्यूडीपीएल के निदेशक ने भी इस योजना का फायदा उठाया, जिनमें अर्पण कीर्तिकुमार शाह, कविता साहा और जिग्नेश निकुलभाई दाभी शामिल हैं. इन लोगों ने सेबी अधिनियम और धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार (पीएफयूटीपी) विनियमों का उल्लंघन करते हुए एक धोखाधड़ी वाली फ्रंट-रनिंग योजना बनाने और उसे चलाने के लिए मिलीभगत कर अवैध लाभ कमाया.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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