₹93.50 के स्तर तक गिर सकती है भारतीय मुद्रा; कच्चा तेल और मजबूत डॉलर ने बढ़ाई चिंता

Published by :Abhishek Pandey
Published at :14 Apr 2026 8:37 PM (IST)
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Rupee vs dollar

सांकेतिक तस्वीर (फोटो: Canva)

Rupee Vs Dollar: एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. फरवरी 2026 से अब तक $20 बिलियन से अधिक की निकासी हो चुकी है.

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Rupee Vs Dollar: भारतीय रुपये के लिए यह सप्ताह चुनौतियों भरा रहने वाला है. अमेरिका-ईरान राजनयिक प्रयासों की विफलता और फारस की खाड़ी में नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल आपूर्ति ठप होने का डर पैदा कर दिया है. इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें $102 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं.

चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल में $10 का हर उछाल देश के चालू खाता घाटे (CAD) को सालाना लगभग $15 बिलियन बढ़ा सकता है.

भारी उतार-चढ़ाव और ग्लोबल प्रेशर

पिछले सप्ताह रुपये में जबरदस्त अस्थिरता (Volatility) देखी गई. यह ₹95.23 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर को छूने के बाद सुधार के साथ ₹92.40 तक आया था, लेकिन संघर्ष बढ़ने के साथ यह फिर से ₹93.30 के स्तर पर कमजोर हो गया है. इसके अलावा, सुरक्षित निवेश (Safe-haven demand) के रूप में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग और बढ़ते बॉन्ड यील्ड ने उभरते बाजारों की मुद्राओं, विशेषकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है.

विदेशी निवेशकों की निकासी

एक तरफ जहां कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. फरवरी 2026 से अब तक $20 बिलियन से अधिक की निकासी हो चुकी है. हालांकि, राहत की बात यह है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास $697.1 बिलियन का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) मौजूद है. यह भंडार रुपये में होने वाली किसी भी अनियंत्रित गिरावट को रोकने के लिए एक ‘डिफेंसिव कुशन’ का काम करेगा.

आयातित महंगाई और CAD का बढ़ता जोखिम

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें न केवल रुपये को कमजोर कर रही हैं, बल्कि ‘आयातित महंगाई’ (Imported Inflation) का खतरा भी बढ़ा रही हैं. इससे देश के व्यापार संतुलन पर बुरा असर पड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार, जब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें स्थिर नहीं होतीं या पश्चिम एशिया में शांति की कोई ठोस उम्मीद नहीं दिखती, तब तक रुपये का रुझान कमजोर (Bearish) बना रहेगा.

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लेखक के बारे में

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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