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कोविड-19 महामारी में भी खुदरा महंगाई ने इंडस्ट्रियल वर्कर्स की तोड़ी कमर, बढ़ती कीमतों के कारण बदहाल रहे लोग

By Agency
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महंगाई की मार ने तोड़ी कमर.
महंगाई की मार ने तोड़ी कमर.
प्रतीकात्मक फोटो.

नयी दिल्ली : देश में फैली कोविड-19 महामारी के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र के कर्मचारियों को इस साल के जुलाई महीने में खुदरा महंगाई से राहत नहीं मिली. इस दौरान जरूरी सामानों समेत खाद्य पदार्थों और सब्जियों की कीमतें आसमान छूती रहीं. आलम यह कि बढ़ती कीमतों के बीच लोग बेहाली में बेवस रहे और जीवन गुजारने के लिए महंगी कीमतों पर भी जरूरी सामानों की खरीदारी की. हालांकि, कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होने से औद्योगिक कर्मचारियों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई महीने में मामूली घटकर 5.33 फीसदी रही. एक साल पहले इसी महीने में यह 5.98 फीसदी थी.

जुलाई में 6.38 फीसदी रही खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर : श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सालाना आधार पर सभी जिंसों की मुद्रास्फीति इस साल जुलाई में 5.33 फीसदी रही. एक महीने पहले जून 2020 में यह 5.06 फीसदी और एक साल पहले जुलाई 2019 में यह 5.98 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर जुलाई महीने में 6.38 फीसदी रही. यह पिछले महीने जून में 5.49 फीसदी और एक साल पहले जुलाई 2019 में 4.78 फीसदी थी.

एक महीने में 1.20 फीसदी बढ़ी खुदरा महंगाई : अखिल भारतीय औद्योगिक कर्मचारियों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-आईडब्ल्यू) जुलाई 2020 में 4 अंक बढ़कर 336 अंक रहा. प्रतिशत के हिसाब से पिछले महीने के मुकाबले यानी जून-जुलाई के बीच इसमें 1.20 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले इसी महीने की तुलना में 0.95 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

आवासीय समूह में सबसे अधिक तेजी : श्रम मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार, मौजूदा सूचकांक में सर्वाधिक तेजी आवास समूह से आयी है. इसका कुल बदलाव में योगदान (+) 2.28 फीसदी रहा. जिंसों के आधार पर गेहूं आटा, सरसों तेल, दूध (भैंस), हरी मिर्च, बैगन, पालक, परवल, आलू, टमाटर रसोई गैस, लकड़ी, बस का किराया, पेट्रोल, सिलाई शुल्क आदि के कारण सूचकांक में बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, दूसरी तरफ चावल, ताजी मछली, बकरे का मांस, पाल्ट्री (चिकेन), नींबू आदि सस्ता होने से सूचकांक में तेजी पर अंकुश लगा.

जमशेदपुर में सबसे अधिक 36 अंक की वृद्धि : केंद्र के स्तर पर जमशेदपुर में सर्वाधिक 36 अंक की वृद्धि हुई. उसके बाद हल्दिया (23 अंक), तिरूचिरापल्ली (13 अंक), कोडरमा और फरीदाबाद (12-12 अंक), श्रीनगर (11 अंक), लखनऊ और दमदम, तिनसुकिया (10-10 अंक) का स्थान रहा. आंकड़ों के अनुसार दो केंद्रों में 8-8 अंक, पांच केंद्रों में 7-7 अंक, आठ केंद्रों में 6-6 अंक, सात केंद्रों में 5-5 अंक, दस केंद्रों में 4-4 अंक, नौ केंद्रों में 3-3 अंक, नौ दूसरे केंद्रों पर 2-2 अंक और नौ अन्य केंद्रों में 1-1 अंक की वृद्धि हुई.

31 केंद्रों का सूचकांक राष्ट्रीय स्तर से कहीं अधिक : इसके विपरीत मदुरै में 5 अंक की गिरावट आयी। इसके अलावा एक केंद्र में 3 अंक, एक और केंद्र में 2 अंक और दो केंद्रों में 1-1 अंक की गिरावट आयी. शेष छह केंद्रों में सूचकांक स्थिर रहे. कुल 31 केंद्रों का सूचकांक आखिल भारतीय सूचकांक से अधिक है, जबकि 45 केंद्रों में यह आखिल भारतीय स्तर से नीचे है. छिंदवाड़ा और जालंधर केंद्रों का सूचकांक आखिल भारतीय स्तर के बराबर है.

क्या कहते हैं श्रम मंत्री?

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि मुख्य रूप से आवास किराया और आलू, टमाटर, औषधि, बस किराया, पेट्रोल आदि के दाम बढ़ने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बढ़ा है. सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते के निर्धारण में सीपीआई-आईडब्ल्यू मानक है. मंत्री ने कहा कि सीपीआई-आईडब्ल्यू (रहन-सहन की लागत) में वृद्धि का संगठित क्षेत्र में काम करने वाले औद्योगिक कर्मचारियों के अलावा सरकारी कर्मचारियों के वेतन/मजदूरी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

क्या है महंगाई बढ़ने का असली कारण?

श्रम ब्यूरो के महानिदेशक डीएस नेगी ने कहा कि कोविड-19 के कारण आंकड़ा संग्रह में कर्मचारियों को हुई परेशानी के बावजूद श्रम ब्यूरो बिना किसी बाधा के निर्धारित समय पर मासिक सूचकांक लाने में सफल रहा है. उन्होंने कहा कि सूचकांक में वृद्धि का मुख्य कारण आवास और खाद्य समूह के उत्पाद हैं. आवास सूचकांक हर साल छह महीने के आधार जनवरी और जुलाई में संशोधित होता है. खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में आलू और टमाटर बढ़ोतरी के लिए प्रमुख कारक रहे. इसके अलावा, रसोई गैस और पेट्रोल के कारण कीमतें बढ़ीं.

Posted By : Vishwat Sen

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