RBI स्थापना दिवसः जान लीजिए, कब और कैसे, किन हालात में बना देश के बैंको का बैंक

Author Utpal kant
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RBI स्थापना दिवसः जान लीजिए, कब और कैसे, किन हालात में बना देश के बैंको का बैंक

एक अप्रैल को भले ही दुनिया में लोग एक दूसरे को मूर्ख बनाकर मजा लेते हों, लेकिन इतिहास में इस तारीख पर कई बड़ी घटनाएं दर्ज हैं. जैसे भारत में रिजर्व बैंक की स्थापना एक अप्रैल 1935 को हुई थी. एक जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण किया गया.

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एक अप्रैल को भले ही दुनिया में लोग एक दूसरे को मूर्ख बनाकर मजा लेते हों, लेकिन इतिहास में इस तारीख पर कई बड़ी घटनाएं दर्ज हैं. जैसे भारत में रिजर्व बैंक की स्थापना एक अप्रैल 1935 को हुई थी. एक जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण किया गया. यह केन्द्रीय बैंकिंग प्रणाली है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है. रिजर्व बैंक भारत की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित करता है. नयी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं. आज स्थापना दिवस है तो आइए इससे जुड़ी कुछ बाते बताते हैं.

RBI का आज 85वां स्थापना वर्ष है. वर्ष 1926 में इंडियन करंसी एंड फाइनेंस से संबंधित रॉयल कमिशन ने भारत के लिए एक केंद्रीय बैंक बनाने का सुझाव दिया. उस कमिशन को हिल्टन यंग कमिशन के नाम से भी जाना जाता था. अलग केंद्रीय बैंक की स्थापना का उद्देश्य करंसी और क्रेडिट के कंट्रोल के लिए एक अलग संस्था बनाना और सरकार को इस काम से मुक्त करना था. साथ ही देश भर में बैंकिंग सुविधा मुहैया कराना भी मकसद था. वर्ष 1934 के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट के तहत रिजर्व बैंक की स्थापना हुई और 1935 में इसने अपना कामकाज शुरू किया. शुरुआत में ऑफिस कोलकाता था जिसे बाद में मुंबई शिफ्ट किया गया. उसके बाद से जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र का स्वरूप बदलता रहा, वैसे-वैसे रिजर्व बैंक की भूमिकाओं और कामकाज में बदलाव होता रहा.

क्यों पड़ी सेंट्रल बैंक की जरूरत ?

आजादी से पहले कई रुपये के कई अलग-अलग सिक्के चलन में थे जिनकी अलग-अलग वैल्यू होती थी. अग्रेजों ने ने एक स्टैंडर्ड सिक्का मार्केट में लाने की कोशिश की. कई सालों तक मुर्शिदाबाद का सिक्का सैद्धांतिक रूप से मानक सिक्का रहा जो सिक्कों के लिए रेट्स ऑफ एक्सचेंज का आधार था. मुगलों के समय से एक मानक सिक्के का चलन रहा. उस सिक्के के वजन से अन्य सिक्कों का वजन अगर कम होता तो उस पर एक चार्ज वसूला जाता था जिसको अंग्रेजी में डिस्काउंट और हिंदी में बट्टा कहा जाता था. अभी भी अगर आप फटे-पुराने नोट बदलवाने जाते हैं तो कुछ पैसे आपके काटते हैं जिसको बट्टा ही बोलते हैं. उस समय के सिक्कों की स्थिति अभी की दुनिया भर में डॉलर और अन्य करंसी की स्थिति से समझ सकते हैं.

अभी तो पूरे भारत में एक ही मुद्रा यानी रुपया चलन में है जिसकी हर जगह एक वैल्यू है. लेकिन दुनिया भर में अलग-अलग करंसी है जिसकी वैल्यू डॉलर के मुकाबले तय होती है. उसी तरह भारत में भी अलग-अलग सिक्कों का चलना था जिसका मूल्य अलग होता था. ऐसे में एक ऐसी संस्था की जरूरत महसूस हुई जो देश भर में कोई एक मानक सिक्का को चलवाए. इसी मकसद से केंद्रीय बैंक की स्थापना की जरूरत पड़ी. आजादी के बाद कुछ सालों तक रिजर्व बैंक पाकिस्तान को भी सेंट्रल बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराता था जिसे 1948 में बंद किया गया.

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