RBI का बड़ा खुलासा! अब भी प्रचलन में हैं 2000 रुपये के नोट, जानें क्या है सच्चाई?

Rs 2000 note
RBI: आरबीआई के अनुसार, 2000 रुपये के नोटों को प्रचलन से हटाने के दो साल बाद भी 6,181 करोड़ रुपये मूल्य के नोट अब भी प्रचलन में हैं. 98.26% नोट वापस आ चुके हैं, लेकिन ये नोट अभी भी वैध मुद्रा हैं. अब इन्हें केवल आरबीआई के 19 कार्यालयों में जमा किया जा सकता है या डाक के माध्यम से भेजा जा सकता है. नोटों को सिस्टम से पूरी तरह हटाने की प्रक्रिया अभी जारी है.
RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि 2000 रुपये के नोटों को प्रचलन से वापस लिए जाने के दो साल बाद भी वे पूरी तरह से सिस्टम से बाहर नहीं हुए हैं. आरबीआई के अनुसार, 31 मई 2025 तक 2000 रुपये के नोटों का कुल मूल्य 6,181 करोड़ रुपये अब भी प्रचलन में है.
98.26% नोट लौटे, फिर भी 6,181 करोड़ रुपये प्रचलन में
आरबीआई ने 19 मई 2023 को 2000 रुपये के नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की थी. उस समय 2000 रुपये के नोटों का कुल मूल्य 3.56 लाख करोड़ रुपये था. अब तक इस राशि का 98.26 % हिस्सा लोगों द्वारा वापस कर दिया गया है या बैंकों में जमा किया जा चुका है.
2000 रुपये का नोट अब भी वैध मुद्रा
हालांकि, 2000 रुपये के नोटों को प्रचलन से हटा दिया गया है. फिर भी, ये नोट वैध मुद्रा बने हुए हैं. इसका मतलब यह है कि इन्हें अब भी किसी लेन-देन में कानूनी रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है.
बैंक शाखाओं में सुविधा बंद, RBI कार्यालयों में जारी
आरबीआई के अनुसार, 2000 रुपये के नोटों को बदलने और जमा कराने की सुविधा 7 अक्टूबर 2023 तक सभी बैंक शाखाओं में दी गई थी. इसके बाद यह सुविधा केवल भारतीय रिजर्व बैंक के 19 निर्गम कार्यालयों तक सीमित कर दी गई.
डाक के जरिए भी जमा करा सकते हैं नोट
9 अक्टूबर 2023 से आरबीआई के ये कार्यालय लोगों और संस्थाओं से 2000 रुपये के नोट उनके बैंक खातों में जमा करने के लिए स्वीकार कर रहे हैं. इसके अलावा, आरबीआई ने यह विकल्प भी उपलब्ध कराया है कि कोई भी व्यक्ति भारतीय डाक के माध्यम से देश के किसी भी डाकघर से 2000 रुपये के नोट संबंधित आरबीआई कार्यालय को भेज सकता है, ताकि वह राशि उसके बैंक खाते में जमा की जा सके.
अभी भी लोगों के पास बचे हैं नोट
इस खुलासे से स्पष्ट है कि भले ही अधिकांश 2000 रुपये के नोट वापस आ चुके हैं, लेकिन अब भी बड़ी मात्रा में यह करेंसी आम लोगों या संस्थानों के पास बची हुई है. इसे धीरे-धीरे सिस्टम से बाहर किया जा रहा है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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