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Inflation in India: महंगाई की मार से बाहर निकलने लगा भारत, रिजर्व बैंक ने जतायी ये उम्मीद..

Updated at : 20 Oct 2023 9:57 AM (IST)
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Inflation in India: महंगाई की मार से बाहर निकलने लगा भारत, रिजर्व बैंक ने जतायी ये उम्मीद..

Inflation in India: देश के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपने एक लेख में संभावना जतायी है कि खुदरा महंगाई जुलाई में अपने उच्चतम स्तर पर से सितंबर में धीरे-धीरे करके नीचे आ रही है.

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Inflation in India: भारत में खुदरा महंगाई अब धीरे-धीरे नियंत्रित होने लगा है. देश के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ने अपने एक लेख में संभावना जतायी है कि खुदरा महंगाई जुलाई में अपने उच्चतम स्तर पर से सितंबर में धीरे-धीरे करके नीचे आ रही है. आरबीआई ने अपने लेख में कहा है कि खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में जुलाई के अपने उच्चस्तर से नीचे आ चुकी है, जिससे वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत हुई है. तीसरी तिमाही से वैश्विक वृद्धि अपनी रफ्तार गंवा चुकी है. आरबीआई के बुलेटिन में बृहस्पतिवार को प्रकाशित लेख अर्थव्यवस्था की स्थिति में कहा है कि प्रमुख आंकड़ों से पता चलता है कि भारत व्यापक आधार पर गति पकड़ रहा है. इसमें कहा गया है उच्च क्षमता उपयोग से भारी पूंजीगत उद्योगों को रफ्तार पकड़ने में मदद मिली है. RBI के लेख में कहा गया है कि भारतीय रुपये का उतार-चढ़ाव कम हुआ है. मुद्रास्फीति जुलाई के शिखर से नीचे आ गई है जिससे वृहद आर्थिक बुनियाद मजबूत हुई है. सब्जियों और ईंधन की कीमतों में नरमी से खुदरा मुद्रास्फीति सितंबर में सालाना आधार पर घटकर तीन माह के निचले स्तर 5.02 प्रतिशत पर आ गई है. वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में 6.83 प्रतिशत और सितंबर, 2022 में 7.41 प्रतिशत पर थी. जुलाई में यह 7.44 प्रतिशत के उच्चस्तर पर पहुंच गई थी.

तीसरी तिमाही से वैश्विक वृद्धि की रफ्तार पड़ी सुस्त

रिजर्व बैंक ने अपने लेख में कहा है कि लेख कहता है कि इस साल की तीसरी तिमाही से वैश्विक वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ गई है. इसकी वजह विनिर्माण गतिविधियों में कमजोरी तथा विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय स्थिति कमजोर होना है. वहीं दूसरी ओर, कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने वृद्धि के मोर्चे पर हैरान करने वाला प्रदर्शन किया है. इसमें कहा गया है कि कच्चे तेल के बढ़ते दाम वैश्विक वृद्धि के लिए प्रमुख जोखिम हैं. रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि लेख में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और ये केंद्रीय बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.

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बैंकों ने बाधारहित ऋण मंच से अबतक 1,400 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित किया

आरबीआई ने कहा है कि बैंकों ने बाधारहित ऋण (Frictionless Credit) मंच से अबतक 1,400 करोड़ रुपये का कर्ज वितरित किया है. इस मंच की शुरुआत 17 अगस्त को हुई थी. उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम से इतर आरबीआई के कार्यकारी निदेशक अजय कुमार चौधरी ने कहा कि अभी लगभग 20,000 केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) लेनदेन दैनिक आधार पर हो रहे हैं. आरबीआई ने इसी साल एक नया ‘दृष्टिकोण’ पेश किया था जिसके तहत बैंक कृषि क्षेत्र की तरह खुदरा कर्ज का वितरण कुछ मिनट में कर पा रहे हैं. इसमें एक ‘एनालिस्टिक्स इंजन’ का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें विभिन्न स्रोतों से कर्ज लेने वालों का ब्योरा जुटाया जाता है. उन्होंने कहा कि 17 अगस्त से अबतक 70,000 कर्ज और 1,400 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि अभी यह योजना प्रायोगिक चरण में है, ऐसे मे मात्रा ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है. उन्होंने कहा कि भविष्य में इस योजना की संभावनाएं काफी व्यापक हैं. चौधरी ने कहा कि इस योजना के तहत ऋणदाताओं की परिचालन लागत भी काफी कम हो जाती है.

कोविड महामारी के दौरान भी नहीं घटा भारतीय कंपनियों का शोध एवं विकास खर्च

भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों के एक विश्लेषण से पता चलता है कि कोविड महामारी के समय भी भारतीय कंपनियों ने शोध एवं विकास (आरएंडडी) खर्च में कटौती नहीं की है. सिद्धार्थ नाथ, श्रुति जोशी और साधन कुमार चट्टोपाध्याय द्वारा 1,161 कंपनियों के आंकड़ों और खुलासों का विश्लेषण करने के बाद तैयार परिपत्र में कहा गया है कि कोविड की वजह से आर्थिक सुस्ती के बाद भी कंपनियों की शोध एवं विकास गतिविधियों में कोई व्यापक बदलाव नहीं आया है. इसमें कहा गया है, कोविड-19 महामारी के बावजूद शोध एवं विकास गतिविधियों की मजबूती दीर्घावधि में भारतीय कंपनियों के सतत नवोन्मेषण और उत्पादकता वृद्धि की दृष्टि से अच्छी है. हालांकि, यह आरबीआई के संस्थागत विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है. इसमें मार्च, 2017 से मार्च, 2022 के दौरान कंपनियों के आरएंडडी खर्च का विश्लेषण किया गया है.

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