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भारत के लोगों को साल 2022 में महंगाई राहत मिलने की उम्मीद नहीं, दुनिया में 50 साल बाद फिर टूट सकता है रिकॉर्ड

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में साल 1982 के बाद 2021 में महंगाई पुराने सारे रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए चरम पर है. वहीं, भारत में थोक महंगाई दर के आंकड़े ने 12 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है.

By Prabhat khabar Digital
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महंगाई की मार.
महंगाई की मार.
फोटो : ट्विटर.

नई दिल्ली : कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो साल से भारत समेत दुनिया भर के लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं. साल 2021 समाप्त होने वाला है और 2022 आने वाला है. नए साल से लोगों को ढेर सारी उम्मीदें हैं. सबसे बड़ी उम्मीद महंगाई से राहत मिलने की है, मगर अब तक भारत समेत दुनिया भर के देशों से जारी आंकड़ों को देखें, तो अगले साल भी लोगों को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है.

अमेरिका में 1982 के बाद टूटे सारे रिकॉर्ड्स

मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका में साल 1982 के बाद 2021 में महंगाई पुराने सारे रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए चरम पर है. वहीं, भारत में थोक महंगाई दर के आंकड़े ने 12 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है. विशेषज्ञों की मानें, तो साल 2022 के दौरान पूरी दुनिया में 50 साल बाद महंगाई एक बार फिर पुराने सारे रिकॉर्ड्स को तोड़ सकती है. इस आधार पर आशंका यह जाहिर की जा रही है कि नए साल में भी लोगों को महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

कोरोना महामारी से हुआ बड़ा नुकसान

दुनिया भर में कोरोना महामारी की शुरुआत से ही हाहाकार मचा हुआ है और तभी से भारत समेत तमाम देशों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई अभी तक नहीं हो पाई है. इसके साथ ही, कोरोना वायरस के नए वेरिएंट्स से दुनिया भर के आम लोगों में खौफ होने के साथ ही सरकार की पेशानी पर भी चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं. सरकारें इस सोच में डूबी हुई हैं कि अगर महामारी ने फिर से तेजी पकड़ी तो बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और ऐसे में महंगाई को काबू कर पाना आसान नहीं है.

भारत में थम नहीं रही महंगाई की रफ्तार

अगर हम भारत की बात करें, तो यहां कोरोना महामारी की शुरुआत से ही महंगाई की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई नवंबर में 4.9 फीसदी के स्तर पर पहुंच चुकी है. हालांकि, यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्धारित दायरे में हैं. इसलिए यह अभी बेकाबू नहीं हुई है, मगर इससे आम लोगों को राहत नहीं मिल रही है. वहीं, थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित थोक महंगाई पिछले 12 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है. फिलहाल, देश में थोक महंगाई 14.23 फीसदी के स्तर पर है. इससे पहले साल 1992 में थोक महंगाई का आंकड़ा 13.8 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर था. 

भारत में पेट्रोल-डीजल समेत तमाम उपभोक्ता सामानों के बढ़े दाम

इतना ही नहीं, साल 2021 के दौरान भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर आम उपभोक्ताओं से जुड़ी रोजमर्रा की चीजों के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई. नौकरी-पेशा आदमी, कारोबारी और श्रमिकों की कमाई के मुकाबले खर्च काफी बढ़ गया है. अभी हाल ही में आरबीआई का सर्वे रिपोर्ट सामने आई है कि भारतीय परिवार निकट भविष्य और मध्यम अवधि में महंगाई बढ़ने से घबरा रहे हैं. यह सर्वे 25 अक्तूबर से 3 नवंबर के बीच देश के 18 प्रमुख शहरों में आयोजित किया गया था. इस दौरान इन शहरों में रहने वाले लगभग 5,910 परिवारों की प्रतिक्रियाएं ली गईं. इनमें अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, पटना और तिरुवनंतपुरम में रहने वाले परिवार शामिल हैं.

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