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Vande Bharat Train : अब वंदे भारत ट्रेन में भी मिलेगी स्लीपर क्लास की सुविधा, जानें क्या है इसकी खासियत

Updated at : 10 Jan 2023 7:32 AM (IST)
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Vande Bharat Train : अब वंदे भारत ट्रेन में भी मिलेगी स्लीपर क्लास की सुविधा, जानें क्या है इसकी खासियत

भारतीय रेलवे वंदे भारत के तीसरे वर्जन की डिजाइन पर काम कर रहा है. रिपोर्ट की मानें तो भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेन में स्लीपर क्लास जोड़ने की तैयारी कर रही है, जो यात्रियों की लंबी दूरी के सफर को आसान बनाएगी.

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Vande Bharat Train : भारत में रेल से सफर तय करने वाले यात्रियों की आसानी के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत की जा रही है. देश में 2019 में सबसे पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत की गई थी. करीब तीन साल के अंतराल में भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ओर से अब तक देश में करीब 7 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों (Vande Bharat Express Trains) की शुरुआत हो चुकी है. सबसे बड़ी बात यह है कि नए साल 2023 के दौरान देश में कुल 75 नई वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत होनी है और भारतीय रेलवे यात्रियों के सफर को आसान बनाने के लिए वंदे भारत ट्रेनों में स्लीपर कोच (Sleeper Coach) लगाने की योजना पर काम कर रहा है.

200 नई स्लीपर रेक के निर्माण का टेंडर जारी

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे वंदे भारत के तीसरे वर्जन की डिजाइन पर काम कर रहा है. रिपोर्ट की मानें तो भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेन में स्लीपर क्लास जोड़ने की तैयारी कर रही है, जो यात्रियों की लंबी दूरी के सफर को आसान बनाएगी. रेल मंत्रालय के हवाले से मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, इस नए जनरेशन की वंदे भारत ट्रेन की 200 नई रेक के निर्माण के लिए भारतीय रेलवे टेंडर भी जारी कर चुका है. वंदे भारत के ये सभी 200 रेक सिर्फ स्लीपर क्लास के लिए डिजाइन किए जाएंगे.

एल्युमिनियम से बना होगा स्लीपर कोच

रिपोर्ट के मुताबिक वंदे भारत ट्रेन के नए जेनरेशन की बॉडी एल्युमिनियम से बनी होगी. पहले वंदे भारत एक्सप्रेस के मुकाबले नए जनरेशन की ट्रेन का वजन 2 से 3 कम होगा. स्लीपर क्लास कोच से लैस वंदे भारत 3.0 ट्रेन में वाई-फाई की सुविधा होगी. साथ ही, इसमें पैसेंजर को अपडेट रखने के लिए एलईडी स्क्रीन भी होगा. सेफ्टी, सहज और आरामदायक सफर बनाने के लिए इस ट्रेन में ऑटोमैटिक फायर सेंसर, GPS सिस्टम समेत बाकी सुविधाएं होंगी.

मध्यम और निम्न वर्ग की जरूरतों को करेगी पूरा

हाल ही में, रेलमंत्री अश्वनी वैष्णव ने इस बात का ऐलान किया था कि वंदे मेट्रो ट्रेन एक बड़ी छलांग लगाने जा रही हैं, क्योंकि सरकार फोकस अंतिम उपभोक्ता नहीं है. हाइड्रोजन से चलने वाली वंदे मेट्रो ट्रेनें मध्यम और निम्न वर्ग की जरूरतों को पूरा करेंगी. उन्होंने कहा कि इकोफ्रेंडली ट्रेनें हर एक भारतीय के डेली लाइफ में बदलाव लाएगी. रेलवे की ओर से उठाया गया कदम सबसे बड़ी पहलों में से एक है क्योंकि हाइड्रोजन ट्रेनें एनर्जी की बचत करती हैं. साथ ये बहुत कम शोर भी करती हैं नतीजतन वंदे मेट्रो ट्रेन से बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं होता है.

किन-किन रूटों पर चल रही वंदे भारत ट्रेन

  • दिल्ली से वाराणसी : देश की पहले वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन 2019 में दिल्ली से वाराणसी के बीच शुरू हुई थी. यह वंदे भारत ट्रेन का प्रोटोटाइप था और इसे ट्रेन को ट्रेन-18 नाम दिया गया था.

  • दिल्ली से कटरा : देश की दूसरी वंदे भारत ट्रेन दिल्ली से कटरा माता वैष्णो देवी के बीच चलती है. 22439 नंबर की वंदे भारत ट्रेन सुबह 6 बजे नई दिल्ली से चलकर दोपहर 2 बजे कटरा पहुंचती है. इसके अलावा, 22440 नंबर की ट्रेन कटरा से दोपहर 3 बजे चलकर रात के 11 बजे दिल्ली पहुंचती है. यह वंदे भारत ट्रेन मंगलवार को छोड़कर सभी दिन इस रूट पर संचालित की जाती है.

  • मुंबई सेंट्रल से गांधीनगर : देश की तीसरी वंदे भारत ट्रेन मुंबई सेंट्रल से गांधीनगर के बीच चलती है. यह मुंबई सेंट्रल से चलकर सूरत, वडोदरा और अहमदाबाद होते हुए गांधीनगर राजधानी पहुंचती है. यह ट्रेन रविवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन संचालित की जाती है. यह सेमी हाई स्पीड ट्रेन है.

  • ऊना से चंडीगढ़ : देश की चौथी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन हिमाचल के ऊना से चंडीगढ़ होते हुए नई दिल्ली पहुंचती है. नई दिल्ली से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 22447 सुबह 5.50 पर खुलती है और यह 10.30 बजे यह ट्रेन हिमाचल के ऊना पहुंचती है और 11.05 मिनट पर यह ऊना जिले के अंब अंदौरा रेलवे स्टेशन पर अपनी यात्रा समाप्त कर देती है.

  • चेन्नई से मैसूर : दक्षिण भारत की चेन्नई से मैसूर के बीच भी वंदे भारत ट्रेन शुरुआत हो गई. यह देश की पांचवी वंदे भारत ट्रेन है, जो चेन्नई-बेंगलुरु और मैसूर रूट पर शुरू हुई है. ट्रेन एमजीआर चेन्नई सेंट्रल से सुबह 5:50 बजे खुलकर सुबह 10:25 बजे बेंगलुरु सिटी जंक्शन पर पहुंचेगी. इसके बाद, बेंगलुरु से यह सुबह 10:30 बजे खुलकर दोपहर 12:30 बजे मैसूर पहुंचती है. दक्षिण भारत की इस पहली वंदे भारत ट्रेन को चेन्नई से बेंगलुरु पहुंचने के लिए 4 घंटे 35 मिनट का समय निर्धारित है, जबकि बेंगलुरु से मैसूर पहुंचने में इसे 2 घंटे लगते.

  • नागपुर से बिलासपुर : महाराष्ट्र में नागपुर से छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के बीच देश की छठी वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत की गई. पिछले 11 दिसंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत की. यह ट्रेन 5.30 पांच घंटे में करीब 413 किलोमीटर की दूरी तय करती है.

  • हावड़ा से न्यू जलपाईगुड़ी : पश्चिम बंगाल की पहली और देश की सातवीं वंदे भारत ट्रेन की शुरुआत पिछले साल 30 दिसंबर 2022 को की गई. यह ट्रेन हावड़ा से चलकर न्यू जलपाईगुड़ी तक जाती है. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस दिन इस ट्रेन की शुरुआत की गई, उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीरा बेन का निधन हो गया था और उन्होंने मां की अंत्येष्टि करने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाकर इस ट्रेन की शुरुआत की. ये ट्रेन हावड़ा, न्यू फरक्का, मालदा और जलपाईगुड़ी को जोड़ती है. ट्रेन बुधवार को छोड़कर सप्ताह के छह दिन इस रूट पर चलेगी. यह करीब 7.50 घंटे में करीब 600 किलोमीटर की दूरी तय करेगी.

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क्या है वंदे भारत ट्रेन की खासियत

  • वंदे भारत ट्रेन भारत की सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेन है.

  • यह ट्रेन महज 52 सेकेंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है.

  • सभी वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित हैं और उनमें स्वचालित दरवाजे हैं.

  • वंदे भारत ट्रेन के चेयर को 180 डिग्री तक रोटेट किया जा सकता है.

  • ट्रेन में जीपीएस आधारित इंफॉर्मेशन सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, वैक्यूम टॉयलेट हैं.

  • इसमें पावर बैकअप का भी इंतजाम है.

  • यह ट्रेन सुरक्षा कवच से लैस है.

  • नई वंदे भारत एक्सप्रेस में 2 कोच ऐसे हैं, जिनसे पूरी ट्रेन पर नजर रखी जा सकेगी.

  • सफर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया गया है.

  • इसमें पुश बटन स्टॉप की सुविधा भी दी गई है.

  • किसी भी आपात स्थिति में ट्रेन को एक बटन दबाकर रोका जा सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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