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सिर्फ 36 बिहारी मजदूर और गांव नहीं, बसा दिया पूरा देश

Updated at : 13 Mar 2025 7:33 PM (IST)
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1834 Indian Workers Mauritius

1834 में मॉरीशस जाने वाले बिहारी मजदूरों की टुकड़ी. फोटो साभार: इंडियन न्यूजलिंक

Mauritius: मॉरीशस में 1834 में सिर्फ 36 बिहारी मजदूरों का एक समूह आया था, जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद यहां एक समृद्ध भारतीय समुदाय की नींव रखी. इन मजदूरों ने मॉरीशस की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण योगदान दिया और एक नई पहचान बनाई.

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Mauritius: अफ्रीका महाद्वीप का एक पिद्दी-सा द्वीपीय देश मॉरीशस भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक तौर पर भारत से उसका सीधा संबंध है. भारत को दुनिया भर से एक साल में जितना प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) हासिल होता है, उसमें मॉरीशस योगदान 25% है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आज से करीब 191 साल पहले वर्ष 1834 में सिर्फ 36 बिहारी मजदूरों का एक समूह मॉरीशस गया था. वहां जाकर इस समूह ने गांव नहीं बसाया, बल्कि पूरा देश बसा दिया.

191 साल पहले मॉरीशस गए थे 36 बिहारी मजदूर

द इंडियन डायसपोरा इन मॉरीशस-इनसाइक्लोपिडिया ब्रिटानिका की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 191 साल पहले, 1834 में, भारत से 36 मजदूरों का एक समूह मॉरीशस (Mauritius) पहुंचा था. यह मजदूर मूल रूप से बिहार से थे और ब्रिटिश साम्राज्य की ओर से उनके देश से मॉरीशस भेजे गए थे, जहां वे गन्ने के खेतों में काम करने के लिए लाए गए थे. हालांकि, इन 36 मजदूरों की संख्या मामूली थी, लेकिन उन्होंने आने वाले समय में अपनी कड़ी मेहनत, साहस और सामाजिक समर्पण से मॉरीशस में एक समृद्ध भारतीय समुदाय की नींव रखी. इस घटना का भारतीय समुदाय और मॉरीशस दोनों के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है.

ब्रिटिश काल और मजदूरों की स्थिति

हिस्ट्री ऑफ इंडियन लेबरर्स इन मॉरीशस-नेशनल अर्काइब ऑफ मॉरीशस के अनुसार, 19वीं सदी के शुरुआती वर्षों में ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत को अपनी उपनिवेशी बस्तियों के लिए मजदूर भेजने का निर्णय लिया. इस निर्णय के बाद मजदूरों को विशेष रूप से चीनी बागानों में काम करने के लिए मॉरीशस भेजा गया. इस दौरान भारतीय मजदूरों को अनुबंध (contract) पर काम करने के लिए भेजा जाता था. इन मजदूरों का जीवन बहुत कठिन था, क्योंकि उन्हें बेहद कम मजदूरी पर खराब स्थितियों में काम करना पड़ता था.

1834 में बिहारी मजदूरों का पहला समूह पहुंचा था मॉरीशस

1834 में भारतीय मजदूरों के पहले समूह ने मॉरीशस की यात्रा की थी. इन 36 मजदूरों में अधिकतर लोग उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य से थे. ये मजदूर मॉरीशस में आकर गन्ना खेतों में काम करने लगे. हालांकि, उनकी संख्या बहुत कम थी, लेकिन उनका प्रयास और संघर्ष मॉरीशस के समाज के विकास में एक नया मोड़ साबित हुआ.

बिहारी मजदूरों का मॉरीशस में सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान

मॉरीशस टूरिज्म की इंडियन इन मॉरीशस: देयर इम्पैक्ट ऑन द आइसलैंड्स कल्चर एंड इकोनॉमी रिपोर्ट के अनुसार, इन 36 मजदूरों ने जब मॉरीशस में अपना कदम रखा, तो उन्होंने अपनी मेहनत से नए समाज की नींव रखी. धीरे-धीरे भारतीय मजदूरों की संख्या बढ़ने लगी और उन्होंने अपनी संस्कृति, धर्म और परंपराओं को मॉरीशस में स्थापित करना शुरू किया. इन मजदूरों ने मॉरीशस की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया. खासकर, कृषि और चीनी उद्योग के क्षेत्र में इनका अमूल्य योगदान रहा. भारतीय मजदूरों के योगदान के कारण मॉरीशस में एक नया कृषि और औद्योगिक विकास देखने को मिला.

मॉरीशस में भारतीय संस्कृति का प्रभाव

मॉरीशस में भारतीय संस्कृति का प्रभाव अब भी देखने को मिलता है। यहाँ के अधिकांश लोग हिंदू धर्म को मानते हैं, और भारतीय त्योहार जैसे दीवाली, होली, गणेश चतुर्थी आदि बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। इसके अलावा, भारतीय पारंपरिक संगीत, नृत्य और भोजन का भी मॉरीशस की संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है।
सामाजिक संघर्ष और सफलता

बिहारी मजदूरों को करना पड़ा सामाजिक संघर्षों का सामना

द इंडियन डायसपोरा इन मॉरीशस-इनसाइक्लोपिडिया ब्रिटानिका के अनुसार, मॉरीशस में आकर भारतीय मजदूरों ने न केवल कड़ी मेहनत की, बल्कि उन्होंने कई सामाजिक संघर्षों का सामना भी किया. शुरुआत में उन्हें अत्यधिक शोषण और भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए संघर्ष किया. भारतीय मजदूरों ने खुद को संगठित किया और मॉरीशस के समाज में अपनी पहचान बनाई. उनके संघर्ष और मेहनत ने अंततः उन्हें सामाजिक और राजनीतिक अधिकार दिलवाए, और वे अब मॉरीशस के मुख्य धारा समाज का हिस्सा बन चुके हैं.

बिहारी मजदूरों के संघर्ष के बाद बना एक नया मॉरीशस

मॉरीशस टूरिज्म की इंडियन इन मॉरीशस: देयर इम्पैक्ट ऑन द आइसलैंड्स कल्चर एंड इकोनॉमी की रिपोर्ट में कहा गया है कि आज 191 साल बाद हम देख सकते हैं कि इन 36 मजदूरों ने सिर्फ मॉरीशस में एक नया समुदाय नहीं बनाया, बल्कि एक समृद्ध और जीवंत भारतीय संस्कृति को भी स्थापित किया. वे मजदूर जो कभी अपने परिवार और गांवों से दूर अजनबी देश में काम करने के लिए भेजे गए थे, अब मॉरीशस के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

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भारत के कुल एफडीआई में मॉरीशस का 25% योगदान

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, मॉरीशस से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) महत्वपूर्ण मात्रा में आता है. अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल एफडीआई का लगभग 25% मॉरीशस के माध्यम से आया है, जो लगभग 177.18 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर है. यह निवेश भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मॉरीशस से आने वाला एफडीआई भारत के कुल एफडीआई का एक बड़ा हिस्सा है. इसके बाद सिंगापुर से 24%, अमेरिका से 10%, नीदरलैंड से 7%, जापान से 6%, ब्रिटेन से 5% और अन्य देशों से भी निवेश आता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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