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सिर्फ 32% लोग ही जॉब इंटरव्यू के लिए खुद को रखते हैं तैयार, बाकी पीटते रह जाते हैं ताली

Updated at : 22 May 2025 6:59 PM (IST)
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ECIL recruitment 2025

ECIL recruitment 2025

Job Interview: सिर्फ 32% भारतीय ही खुद को जॉब इंटरव्यू के लिए पूरी तरह तैयार मानते हैं, जबकि बाकी उम्मीदवार तैयारी में पिछड़ जाते हैं. अपनाडॉटको की रिपोर्ट ‘साक्षात्कार तत्परता सूचकांक-2025’ में अनुभव, आत्मविश्वास, शिक्षा और भाषा के आधार पर साक्षात्कार तैयारी के अंतर को उजागर किया गया है. फ्रेशर्स सबसे कमजोर वर्ग में हैं, जबकि जेन एक्स सबसे आत्मविश्वासी हैं. रिपोर्ट बताती है कि भारत में अवसर तो भरपूर हैं, लेकिन तैयारी और आत्मविश्वास में भारी अंतर है.

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Job Interview: देश में नौकरी की तलाश करने वाले सिर्फ 32% लोग ही ऐसे हैं, जो साक्षात्कार देने के लिए खुद को हमेशा तैयार रखते हैं. बाकी लोग साक्षात्कार की तैयारी करने में ताली पीटते नजर आते हैं. एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अवसरों और कंडीडेट्स की तैयारी के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है. नौकरी ढूंढने वाले सिर्फ 32% लोग साक्षात्कार के लिए खुद को तैयार मानते हैं.

साक्षात्कार के लिए आत्मविश्वास जरूरी

नौकरी प्लेटफॉर्म अपना डॉट को की ओर ‘साक्षात्कार तैयारी सूचकांक-2025’ को देशभर में 10,000 से ज्यादा लोगों के बातचीत के अधार पर तैयार किया गया है. रिपोर्ट से पता चलता है कि नौकरी चाहने वालों के बीच कार्य अनुभव और साक्षात्कार के प्रति आत्मविश्वास के बीच एक मजबूत संबंध है. छह साल से ज्यादा अनुभव वाले लगभग आधे (49%) उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए अच्छी तरह से तैयार महसूस करते हैं. तीन से छह साल का अनुभव रखने वाले 34% लोग साक्षात्कार के लिए खुद को तैयार मानते हैं और एक से तीन साल के अनुभव वाले शुरुआती करियर पेशेवरों के लिए यह आंकड़ा 29% है.

फ्रेशर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती

पहली बार नौकरी तलाश करने वाले फ्रेशर्स को सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, क्योंकि एक साल से कम के अनुभव वाले केवल 21% उम्मीदवार खुद को साक्षात्कार के लिए तैयार मानते हैं. चिंता, अप्रत्याशित सवालों का डर और सीमित व्यावहारिक अनुभव इन नए लोगों के आत्मविश्वास को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बनकर उभरे हैं.

जेन एक्स में सबसे अधिक आत्मविश्वास

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साक्षात्कार के प्रति आत्मविश्वास विभिन्न आयु समूहों में किस तरह से भिन्न होता है. ‘जेन एक्स’ यानी 45 वर्ष से अधिक आयु वालों में सबसे अधिक आत्मविश्वास देखा गया. इनमें 54% प्रतिभागियों ने साक्षात्कार के लिए खुद को अच्छी तरह से तैयार पाया. ‘मिलेनियल्स’ यानी 25 से 44 वर्ष तक आयु वालों में आत्मविश्वास का स्तर 36% से कम है और युवा उम्मीदवारों में यह और भी कम है.

भारत के नौकरी बाजार में अपार अवसर

अपनाडॉटको के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) निर्मित पारिख ने कहा, “भारतीय नौकरी बाजार में अपार अवसरों के बावजूद अकेले अपनाडॉटको पर 2025 की पहली तिमाही में 3.1 लाख नौकरियों की सूचना दी गई हैं. कई उम्मीदवार अभी भी आत्मविश्वास के साथ संघर्ष करते हैं और प्रभावी साक्षात्कार की तैयारी के मामले में कमी दिखती हैं. यह अंतर बड़ी संख्या में नौकरी चाहने वालों को उनकी वास्तविक क्षमता को उजागर करने और संभावनाओं को उजागर करने से रोकता है.”

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आत्मविश्वास पर शिक्षा और भाषा का प्रभाव

अपना.को के ‘साक्षात्कार तत्परता सूचकांक-2025’ में नौकरी चाहने वालों के बीच साक्षात्कार के प्रति आत्मविश्वास पर शिक्षा और भाषा आदि के बढ़ते प्रभाव के असर का भी उल्लेख किया गया है. अंग्रेजी माध्यम की पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा आत्मविश्वास पाया गया, जिनमें 44% ने साक्षात्कार के लिए पर्याप्त रूप से तैयार होने का अनुभव किया. वहीं, हिंदी माध्यम के संस्थानों से 34% और क्षेत्रीय भाषा के स्कूलों से निकले अभ्यर्थियों में 26% ने आत्मविश्वास महसूस किया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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