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कोरोना से जंग में 2000 से अधिक कर्मियों की NTPC ने बचायी जान, '5 T' रणनीति के तहत कोविड सेंटरों में हुआ उपचार

By Prabhat khabar Digital
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कोरोना महामारी में जीवन और आजीविका बचाने को तत्पर महारत्न कंपनी एनटीपीसी
कोरोना महामारी में जीवन और आजीविका बचाने को तत्पर महारत्न कंपनी एनटीपीसी
NTPC

Corona Crisis In India NTPC News मार्च के बाद देश ने कोरोना महामारी की एक अप्रतिम, दूसरी लहर देखी. संकट का दौर गहराया तो बुनियादी इलाज को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी और काले बाजार का एक अमानवीय रूप हमें देखने को मिला. इस बीच, चिकित्सा के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हुए देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी ने एक बेहद कठोर लड़ाई लड़ी. एनटीपीसी के विभिन्न पावर प्लांट से उत्पादित बिजली ने एक ओर जहां सैकड़ों अस्पतालों को संबल दिया. वहीं, इन प्लांट की प्राण-वायु एनटीपीसी के कर्मठ कर्मचारियों को बड़ी संख्या में संक्रमित होते देख उन्हें त्वरित उपचार भी दिया. आज, जब हम सामान्य दौर की ओर गमन कर रहे हैं, आइये जानते हैं कि कैसे एनटीपीसी ने कैसे एक पेशेवर और कार्यकुशल एक्शन प्लान की मदद से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की अपनी परियोजनाओं में बचाईं 2000 से भी अधिक जिंदगियां.

1- संसाधनों और आपसी समन्वय के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है. सभी अधिकारी रोटेशन में संक्रमित व्यक्तियों के लिए आवश्यक दवाइयों और उपचार का प्रबंध करने के लिए 24x7 हेल्पलाइन के तहत कार्यरत थे. क्योंकि, एनटीपीसी के अधिकांश संयंत्र दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं, इसलिए किसी गंभीर मामले के सामने आने पर कोलकाता, पटना और रांची के स्पेशियलिटी अस्पताल में ऑक्सीजन और आईसीयू सपोर्ट वाले बेड का तत्काल प्रबंध भी इन कर्मियों द्वारा किया जाता है. कई बार इन अस्पतालों में रोगियों की लंबी कतार भी होती है, लेकिन यह सभी कर्मी प्रतिबद्धता से अनेक अस्पतालों से संपर्क करते रहते हैं.

दूसरी लहर के दौरान एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा लागू की गईं विशिष्ट पहल के बारे में बताते हुए पूर्वी क्षेत्र मुख्यालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा है कि एनटीपीसी न केवल मदद के लिए हाथ बढ़ाने में अपने सभी संसाधनों का उपयोग कर रहा है, बल्कि इसके लिए टेलीमेडिसिन उपचार जैसे नए उन्नत प्रयासों को प्राथमिकता दे रहा है. शीर्ष प्रबंधन के साथ नेतृत्व नियमित रूप से स्थिति का जायजा ले रहा है और एनटीपीसी के कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए राहत उपायों को लागू कर रहा है.

कोरोना के गंभीर मरीजों को एक छोटे अस्पताल से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एयरलिफ्ट करने का निर्णय, एनटीपीसी के शीर्ष प्रबंधन की विशेष पहल का हिस्सा है. इसके माध्यम से क्षेत्रीय टास्क फोर्स एयरलिफ्टिंग की व्यवस्था करते हुए दवाओं की बचत, मरीज की निगरानी, उसे कार्यस्थल से दूर एक स्थान पर परिचारकों की देखभाल की आवश्यकताओं को पूरा करता है.

2- बाढ़ परियोजना में कोविड उपचार केंद्र की स्थापना

बिहार में देश को 1320 मेगावॉट बिजली आपूर्ति कर रही एनटीपीसी की बाढ़ परियोजना ने पिछले साल अगस्त में एक समर्पित कोविड केंद्र स्थापित करने के निर्णय लिया. यहां '5 टी' रणनीति के तहत- टेस्ट, ट्रैक, ट्रेस, ट्रीट और टेक्नोलोजी को बड़े पैमाने पर लागू किया गया है. संक्रमितों की पहचान करने के लिए यहां ट्रू-नैट, एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच को युद्धस्तर पर किया गया और मरीजों को उनके लक्षण के मुताबिक उपचार दिया गया. एनटीपीसी पूर्वी क्षेत्र-1 के एक अधिकारी बताते हैं कि समय पर संक्रमित की पहचान, त्वरित आइसोलेशन और प्रभावी उपचार की दिशा में सैंपल टेस्टिंग को कर्मचारियों, सहयोगियों और उनके परिवार के बीच प्राथमिक रणनीति के रूप में मान्यता दी गई थी.

3- टीकाकरण अभियान चरम पर

इस बीच पूर्वी क्षेत्र की सभी 9 इकाइयों में एक मजबूत टीकाकरण अभियान जारी है. एनटीपीसी के लगभग सभी कर्मचारियों को वैक्सीन लगवाई जा चुकी है और उनके परिवारजनों के लिए भी टीकाकरण अभियान जोरों पर है. वहीं, अपने एसोसिएट्स को इसका हिस्सा बनाते हुए सीआईएसफ, आईसीएच और प्लांट में कार्यरत संविदा श्रमिकों के लिए भी एनटीपीसी के डेडिकेटेड अस्पताल वैक्सीनेशन अभियान चला रहे हैं. अकेले बाढ़ परियोजना में ही 1200 से अधिक संविदा कर्मियों को वैक्सीन की पहली डोज लगाई जा चुकी है.

4- एक नजर में...

इस महामारी में एनटीपीसी पूर्वी क्षेत्र की इकाइयों ने सक्रिय निगरानी, विस्तृत परीक्षण, संपर्क ट्रेसिंग, आइसोलेशन और मामलों के प्रबंधन के लिए आवश्यक चिकित्सा और पैरा-मेडिकल के बुनियादी ढांचे का कुशल प्रबंधन किया है. इस बीच कर्मचारियों, एसोसिएट्स और उनके परिवार के सदस्यों को मास्क, सामाजिक दूरी और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर के बारे में शिक्षित करने के लिए अनेक माध्यमों का वृहद उपयोग किया गया है.

एनटीपीसी के अधिकारी बताते हैं कि अस्पताल से शिफ्ट किए गए मरीजों के परिचारकों को कंपनी के गेस्ट हाउस में रहने की व्यवस्था और उनके निवास के दौरान अन्य सुविधाएं प्रदान करना भी प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है. उन्होंने बताया कि कंपनी का शीर्ष प्रबंधन आगे भी इसी तरह क्षेत्रीय मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहकर इलाज पर नजर रखेगा. हम आशा करते हैं कि जिस प्रकार एनटीपीसी प्रबंधन ने निर्बाध विद्युत आपूर्ति करते हुए कोरोना से जंग में अपने दो हज़ार से भी अधिक कर्मियों की जान बचाई है, उससे हौसला लेते हुए हमारी सभी कोरोना वॉरियर अपने-अपने तरीके से यह लड़ाई यूं ही जारी रखेंगे.

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