MCX को मिलेगी टक्कर! NSE लॉन्च करेगा ‘कच्चा तेल’ फ्यूचर्स, रात 11:55 तक कर सकेंगे ट्रेडिंग

Crude Oil Price (Photo: Canva)
Crude Oil Futures: NSE 13 अप्रैल 2026 से ‘डेटेड ब्रेंट क्रूड ऑयल’ फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट (BRCRUDEOIL) लॉन्च करने जा रहा है. सेबी से मंजूर यह कॉन्ट्रैक्ट कैश-सेटल होगा और इसका समय रात 11:55 बजे तक रहेगा.
Crude Oil Futures: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे वैश्विक कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों को प्रभावित करता है. NSE द्वारा शुरू किया जा रहा यह नया फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट भारतीय बाजार के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेजिंग टूल (Hedging Tool) उपलब्ध कराएगा, जिससे वे कीमतों के जोखिम को कम कर सकेंगे.
ब्रेंट क्रूड के लिए BRCRUDEOIL सिंबल का इस्तेमाल
NSE के सर्कुलर के अनुसार, इस नए कॉन्ट्रैक्ट को BRCRUDEOIL सिंबल के तहत ट्रेड किया जाएगा. यह पूरी तरह से ‘S&P ग्लोबल एनर्जी’ के डेटेड ब्रेंट असेसमेंट पर आधारित होगा. चूंकि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों के निर्धारण के लिए ब्रेंट क्रूड को सबसे विश्वसनीय मानक माना जाता है, इसलिए इसे NSE प्लेटफॉर्म पर लाना मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए अत्यंत फायदेमंद साबित होगा.
रात 11:55 बजे तक कर सकेंगे ट्रेडिंग
ग्लोबल मार्केट (विशेषकर अमेरिकी बाजार) के उतार-चढ़ाव का लाभ उठाने के लिए NSE ने ट्रेडिंग के समय को काफी लचीला रखा है:
- कार्य दिवस: सोमवार से शुक्रवार.
- समय: सुबह 9:00 बजे से शुरू होकर रात 11:30 बजे या 11:55 बजे तक (यूएस डेलाइट सेविंग टाइम के अनुसार).
- लिस्टिंग: ये कॉन्ट्रैक्ट मंथली (मासिक) आधार पर लिस्ट किए जाएंगे, जिससे शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के ट्रेडर्स को मौका मिलेगा.
रुपयों में सेटलमेंट और RBI रेट का आधार
ट्रेडर्स के लिए सबसे बड़ी सुविधा यह है कि ये कॉन्ट्रैक्ट कैश-सेटल (Cash-Settled) होंगे. इसका मतलब है कि एक्सपायरी के समय आपको कच्चे तेल की भौतिक डिलीवरी लेने की चिंता नहीं करनी होगी.
- सेटलमेंट प्राइस: फाइनल रेट तय करने के लिए महीने भर के ‘डेटेड ब्रेंट क्रूड’ के औसत रेट को आधार बनाया जाएगा.
- करेंसी कन्वर्जन: अंतरराष्ट्रीय कीमतों को भारतीय रुपयों में बदलने के लिए RBI के USD-INR रेफरेंस रेट का उपयोग किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी.
क्वालिटी और मार्केट कॉम्पिटिशन
NSE ने स्पष्ट किया है कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए ‘S&P ग्लोबल एनर्जी’ द्वारा तय किए गए कड़े क्वालिटी नियमों का पालन किया जाएगा. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि NSE के इस कदम से कमोडिटी सेगमेंट में लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ेगी. अब तक कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए मुख्य रूप से MCX पर निर्भर रहने वाले ट्रेडर्स को अब एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी विकल्प मिलेगा.
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By Abhishek Pandey
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