कस्टमर्स को झांसे में नहीं रख पाएंगी कंपनियां, अप्रैल से पैकेटबंद सामानों पर छापना होगा यूनिट सेल प्राइस

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 1 किलोग्राम से अधिक की मात्रा का पैकटबंद सामान बेचने वाली कंपनियों को एमआरपी के साथ प्रति किलोग्राम या जिस भी इकाई के हिसाब से बिक्री की जाएगी, उसका यूएसपी को दर्शाना होगा.
नई दिल्ली : उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियां अब वस्तुओं की कीमतों को लेकर कस्टमर्स को झांसे में नहीं रख सकेंगी. फिलहाल, आंटे-चावल की बोरी या बिस्कुट के पैकेट से यह पता लगा पाना कठिन है कि वह दूसरे उत्पादों के मुकाबले सस्ता है या महंगा, लेकिन अब अप्रैल महीने से महंगाई का आकलन करना आसान हो जाएगा. इसका कारण यह है कि पैकेटबंद उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियों को उत्पाद के पैकेट पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के साथ-साथ यूनिट सेल प्राइस (यूएसपी) भी लिखना होगा.
उपभोक्ताओं को खरीद के संबंध में उचित फैसला लेने में मदद करने के साथ-साथ उद्योग के कारोबारियों पर अनुपालन बोझ कम करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ‘विधि माप विज्ञान (पैकेटबंद वस्तुएं) नियम, 2011′ में संशोधन किया है. इसके तहत कंपनियों को पैकटबंद सामान के पैक पर यूनिट सेल प्राइस को छापना जरूरी हो जाएगा.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 1 किलोग्राम से अधिक की मात्रा का पैकटबंद सामान बेचने वाली कंपनियों को एमआरपी के साथ प्रति किलोग्राम या जिस भी इकाई के हिसाब से बिक्री की जाएगी, उसका यूएसपी को दर्शाना होगा. मसलन, 2.5 किलो के एक पैकेटबंद आटे की बोरी पर कुल एमआरपी के साथ प्रति किलो यूएसपी को भी छापना और दर्शाना होगा.
इसी तरह एक किलो से कम मात्रा में पैकटबंद वस्तु के पैक पर उत्पाद के कुल एमआरपी के साथ प्रति ग्राम यूएसपी छापना होगा. अनुपालन आवश्यकताओं को आसान बनाने के लिए मंत्रालय ने नियमों की अनुसूची 2 को रद्द कर दिया है, जिसके तहत 19 प्रकार की वस्तुओं को एक निर्दिष्ट तरीके से वजन, माप या संख्या द्वारा मात्रा में पैक किया जाना था.
उस नियम के अनुसार, चावल या आटे को 100 ग्राम, 200 ग्राम, 500 ग्राम और 1 किलो, 1.25 किलो, 1.5, 1.75 किग्रा, 2 किग्रा, 5 किग्रा और उसके बाद 5 किग्रा के गुणकों पैक करना जरूरी था. अधिकारी ने कहा कि लेकिन, उद्योग अलग-अलग मात्रा में बेचना चाहता था और मंत्रालय से मंजूरी मांग रहा था. कुछ को मंजूरी दी गई और कुछ को नहीं. नियमों को लचीलापन देने के लिए उसकी अनुसूची दो को खत्म कर दिया गया है और हम यूनिट बिक्री मूल्य की अवधारणा सामने लाए हैं.
अधिकारी के अनुसार, यह फैसला खरीद-बिक्री के बेहतर तौर-तरीकों पर आधारित है और यह उद्योग पर अनुपालन बोझ को कम करेगा. इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को खरीदारी के संबंध में फैसला लेने से पहले उत्पाद की कीमत का पता लगाने में मदद करेगा. नियमों में किया गया दूसरा बदलाव पैकेज्ड कमोडिटी पर एमआरपी प्रिंट करने का तरीका है.
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फिलहाल, नियमों में उल्लिखित प्रारूप में एमआरपी मुद्रित नहीं होने पर कंपनियों को नोटिस जारी किए जाते हैं. वर्तमान प्रारूप है कि अधिकतम या अधिकतम खुदरा मूल्य 00.00 रुपये छपा हो, लेकिन यदि किसी कंपनी ने दशमलव के पहले के मूल्य का ही उल्लेख किया है और दशमलव के बाद के .00 रुपये का उल्लेख नहीं किया है, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाता है और नोटिस जारी किए जाते हैं.
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