Moonlighting से क्यों घबराई हैं IT कंपनियां? क्या है ये और कहां से आया यह ट्रेंड?

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 28 Sep 2022 4:40 PM

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Moonlighting से क्यों घबराई हैं IT कंपनियां? क्या है ये और कहां से आया यह ट्रेंड?

Why IT Companies Worry About Moonlighting: आईटी कंपनी विप्रो ने नियमित के साथ दूसरी नौकरी करनेवाले अपने 300 कर्मचारियों को पिछले ही दिनों नौकरी से हटा दिया. वहीं, इंफोसिस ने भी मूनलाइटिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है.

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What Is Moonlighting: ‘मूनलाइटिंग’ शब्द इन दिनों खूब चर्चा में है. नियमित नौकरी के अलावा, साइड जॉब का चलन इधर काफी बढ़ा है. यह बात अलग है कि पहले भी कर्मचारी ऐसा करते रहे हैं, लेकिन जब नौकरी देनेवालों को इसके बारे में पता चलता है, तो वे कर्मचारियों पर सख्ती बरतते हैं. पिछले ही दिनों आईटी कंपनी विप्रो ने नियमित के साथ दूसरी नौकरी करनेवाले अपने 300 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया. वहीं, इंफोसिस ने भी मूनलाइटिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. मूनलाइटिंग से आइटी कंपनियां ही नहीं, बल्कि टीचिंग, डिजाइनिंग, वीडियाे एडिटिंग, सेल्स, मार्केटिंग समेत कई ऐसे क्षेत्र जूझ रहे हैं. यह मूनलाइटिंग क्या है? कर्मचारियों के बीच इसका चलन क्यों बढ़ रहा है? आइए जानें-

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By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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