घर बैठे KFC से मंगवाना पड़ेगा महंगा, अब सस्ते मील और धमाकेदार ऑफर्स सिर्फ रेस्टोरेंट में मिलेंगे 

Published by :Soumya Shahdeo
Published at :02 May 2026 1:00 PM (IST)
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KFC In-Store Strategy

केएफसी इन-स्टोर स्ट्रेटजी (Photo: Justdial)

KFC In-Store Strategy: क्या आप भी KFC से खाना ऑर्डर करते हैं? अब सस्ते ऑफर्स के लिए आपको रेस्टोरेंट जाना होगा. कंपनी ने मुनाफा बढ़ाने के लिए इन-स्टोर सेल्स पर फोकस करना शुरू किया है.

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KFC In-Store Strategy: अगर आप घर बैठे खाना ऑर्डर करने के शौकीन हैं, तो शायद अब आपको अपनी आदत बदलनी पड़े. भारत में KFC का संचालन करने वाली कंपनी ‘सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड’ (Sapphire Foods) अब एक नई दिशा में कदम बढ़ा रही है. कंपनी चाहती है कि आप घर पर डिलीवरी मंगवाने के बजाय उनके रेस्टोरेंट में आकर खाना खाएं या वहां से टेकअवे (Takeaway) लें. 

क्या अब घर पर खाना मंगाना महंगा पड़ेगा?

NDTV Profit की रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के दौरान हम सभी को घर पर खाना मंगवाने की आदत लग गई थी. उस वक्त ऑनलाइन डिलीवरी ही कमाई का मुख्य जरिया थी. लेकिन अब वक्त बदल चुका है. कंपनी ने देखा है कि इन-स्टोर सेल्स (Dine-in) में अब स्थिरता आ रही है. इस बदलाव को और मजबूत करने के लिए KFC ऐसे स्पेशल ऑफर्स और मील डील्स ला रहा है जो सिर्फ रेस्टोरेंट में जाकर ऑर्डर करने पर ही मिलेंगे. पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में, इस बार डाइन-इन और टेकअवे का हिस्सा कुल बिक्री में 57% रहा है. इसका सीधा मतलब है कि कंपनी अब डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है ताकि मुनाफा बढ़ाया जा सके. 

ग्राहकों को लुभाने के लिए क्या है खास तैयारी?

KFC की यह रणनीति सिर्फ छोटे समय का डिस्काउंट नहीं है. ग्रुप CEO संजय पुरोहित के मुताबिक, कंपनी एक परमानेंट वैल्यू लेयर तैयार कर रही है. इसमें कम कीमत वाले एंट्री-लेवल मील्स शामिल हैं, ताकि नए ग्राहक पहली बार ब्रांड से जुड़ें. कंपनी का मुख्य फोकस उन लोगों पर है जो ब्रांड को जानते तो हैं पर वहां से अक्सर खरीदारी नहीं करते. ऐसे अवेयर नॉन-यूजर्स को खींचने के लिए मार्केटिंग बजट भी बढ़ाया गया है. 

रेस्टोरेंट के अंदर क्या बदल रहा है?

सिर्फ ऑफर्स ही नहीं, KFC तकनीक के जरिए भी आपका अनुभव बदल रहा है. अब करीब 73% स्टोर्स में डिजिटल कियोस्क (Digital Kiosks) लग चुके हैं. आंकड़े बताते हैं कि जब लोग काउंटर के बजाय खुद मशीन से ऑर्डर करते हैं, तो वे ज्यादा खर्च करते हैं. इससे न केवल बिल का साइज बढ़ता है, बल्कि स्टोर के अंदर भीड़ को मैनेज करना भी आसान हो जाता है. 

इस बदलाव का कंपनी को क्या फायदा मिला?

विजय जैन (CFO, सैफायर फूड्स) का कहना है कि इन रणनीतियों से ट्रांजेक्शन और सेम-स्टोर सेल्स (Same-store sales) में सुधार हुआ है. जब ग्राहक स्टोर पर आता है, तो कंपनी को डिलीवरी पार्टनर्स को कमीशन नहीं देना पड़ता, जिससे प्रॉफिट मार्जिन बेहतर होता है. कंपनी अब डिलीवरी के भरोसे बैठने के बजाय फुटफॉल (ग्राहकों की आवाजाही) बढ़ाने पर जोर दे रही है.

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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