झारखंड में कैसे मिलता कड़कनाथ मुर्गा? कीमत जानकर पेट करने लगेगा कुकड़ूकू

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Kadaknath Chicken Price

Kadaknath Chicken Price: झारखंड में कड़कनाथ मुर्गा अपनी काली त्वचा, उच्च प्रोटीन और कम कोलेस्ट्रॉल के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसकी कीमत सामान्य मुर्गे से कहीं अधिक है, जो 800 से 1500 रुपये प्रति किलो तक जाती है. कड़कनाथ अंडे भी 30-50 रुपये में बिकते हैं. सरकार इसकी खेती पर सब्सिडी दे रही है, जिससे यह किसानों के लिए मुनाफेदार व्यवसाय बन रहा है. कड़कनाथ मुर्गा स्वास्थ्य, स्वाद और आय का अनूठा संगम है.

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Kadaknath Chicken Price: कड़कनाथ मुर्गा को “कालीमासी” और “ब्लैक चिकन” के नाम से भी जाना जाता है. यह अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण झारखंड में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसकी त्वचा, मांस, हड्डियां और यहां तक कि खून भी काले रंग का होता है. कड़कनाथ में कम कोलेस्ट्रॉल (180 मिग्रा/100 ग्राम) और 25% से अधिक प्रोटीन होता है, जिससे यह हृदय, डायबिटीज और कैंसर रोगियों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है.

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झारखंड में कड़कनाथ की बढ़ती मांग और कीमत

झारखंड में रांची, बोकारो और जमशेदपुर जैसे शहरों में कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गों की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसके चलते कड़कनाथ मांस की कीमत सामान्य चिकन की तुलना में कहीं ज्यादा है.

  • कड़कनाथ मुर्गे के मांस की कीमत: 800 रुपये से 1200 रुपये प्रति किलो
  • सर्दियों में कड़कनाथ मुर्गे की कीमत: 1000 रुपये से 1500 रुपये प्रति किलो
  • कड़कनाथ मुर्गे के अंडे की: 30 रुपये से 50 रुपये प्रति अंडा (बोकारो में कुछ ऑफर 5 रुपये प्रति अंडा भी)

एक व्यस्क कड़कनाथ मुर्गे का वजन 1.8 से 2.5 किलोग्राम तक होता है, जिससे प्रति मुर्गा 3000 रुपये से 4000 रुपये की कीमत लग सकती है.

सरकारी योजनाएं और पोल्ट्री फार्म का योगदान

झारखंड सरकार राष्ट्रीय पशुधन योजना के तहत कड़कनाथ पालन को बढ़ावा दे रही है. इसमें किसानों को 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी और बैंक लोन की सुविधा मिलती है. रांची, बोकारो और दुमका जैसे जिलों में कई पोल्ट्री फार्म इस नस्ल का पालन कर रहे हैं, जिससे स्थानीय आपूर्ति में वृद्धि हुई है.

कड़कनाथ पालन: कम लागत, अधिक मुनाफा

कड़कनाथ पालन किसानों के लिए एक लाभकारी व्यवसाय बन चुका है.

  • 100 चूजों पर प्रारंभिक निवेश: 15,000 रुपये से 20,000 रुपये
  • खुराक पर खर्च: 500 रुपये ये 700 रुपये प्रति चूजा
  • कड़कनाथ मुर्गे की मृत्यु दर कम होने से जोखिम भी कम है.

इस नस्ल की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में यह किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन रही है.

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सेहत के लिए स्वास्थ्यवर्धक है कड़कनाथ मुर्गा

झारखंड में कड़कनाथ मुर्गा अब केवल स्वाद का मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मुनाफे का भी प्रतीक बन चुका है. अगर आप इसका पालन शुरू करना चाहते हैं या खरीदना चाहते हैं, तो समय और जानकारी ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है.

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