पेट्रोल-डीजल की क्वालिटी पर सोशल मीडिया में उठे सवाल, IOC, BPCL और HPCL ने बढ़ाई जांच

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पेट्रोल-डीजल की क्वालिटी पर सोशल मीडिया में उठे सवाल, IOC, BPCL और HPCL ने बढ़ाई जांच

अगर आपने भी पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर पेट्रोल या डीजल की क्वालिटी को लेकर वायरल पोस्ट देखी हैं और मन में सवाल आया कि कहीं गाड़ी में खराब फ्यूल तो नहीं भर रहा, तो यह खबर आपके लिए है.

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सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने देशभर में बड़े स्तर पर अचानक जांच कर साफ किया है कि उनके पेट्रोल पंपों पर फ्यूल तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही मिल रहा है. कंपनियों के मुताबिक, जांच के दौरान मिलावट, प्रदूषण (Contamination) या किसी बड़ी गड़बड़ी का कोई मामला सामने नहीं आया.

सोशल मीडिया पर क्या चल रहा था?

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की क्वालिटी को लेकर कई तरह के दावे और पोस्ट वायरल हो रहे थे. इन्हीं चिंताओं के बीच तीनों सरकारी तेल कंपनियों ने अपने रिटेल नेटवर्क पर निगरानी और जांच का दायरा बढ़ा दिया ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे और हर पेट्रोल पंप पर तय गुणवत्ता वाला फ्यूल ही मिले. कंपनियों ने लोगों से अपील भी की है कि अगर फ्यूल की गुणवत्ता को लेकर कोई शिकायत हो तो सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा करने के बजाय सीधे कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर चैनल पर शिकायत दर्ज करें.

किस कंपनी ने कितनी जांच की?

कंपनीकब और कितनी जांच हुई?क्या मिला?
IOCपिछले एक सप्ताह में करीब 10,000 सरप्राइज इंस्पेक्शन और 8,500 से ज्यादा क्वालिटी टेस्टगुणवत्ता से जुड़ी कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली
BPCL3 से 13 जुलाई के बीच 932 सरप्राइज इंस्पेक्शन, क्वालिटी कंट्रोल सेल की 111 जांच और मोबाइल लैब से 50 ऑन-साइट टेस्टमिलावट, कंटैमिनेशन, नियमों के उल्लंघन या गुणवत्ता में कमी का कोई मामला नहीं मिला
HPCL7 से 13 जुलाई के बीच 2,173 सरप्राइज इंस्पेक्शन (एथेनॉल ब्लेंडिंग नियमों की जांच), 3 से 13 जुलाई के बीच 1,385 नियमित निरीक्षण, क्वालिटी एश्योरेंस सेल की 93 सरप्राइज जांच और मोबाइल लैब से 49 सैंपल टेस्टमिलावट, कंटैमिनेशन या गुणवत्ता से जुड़ी कोई गड़बड़ी नहीं मिली

IOC ने डीलरों को लेकर क्या कहा?

IOC ने कहा कि फ्यूल की गुणवत्ता उसके लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है. कंपनी की टीमें हर दिन देशभर में पेट्रोल पंपों पर नियमित जांच, अचानक निरीक्षण और वैज्ञानिक तरीके से फ्यूल की टेस्टिंग करती हैं. कंपनी ने यह भी साफ किया कि मिलावट, कंटैमिनेशन या गुणवत्ता नियमों के उल्लंघन पर उसकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति है. अगर किसी जांच या ग्राहक की शिकायत में गड़बड़ी सही पाई जाती है, तो संबंधित डीलर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है.

आखिर ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

तीनों सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि उनके यहां फ्यूल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कई स्तर की व्यवस्था लागू है. इसमें नियमित फील्ड इंस्पेक्शन, अचानक जांच, लैब टेस्ट, मोबाइल लैब से सैंपल जांच और लगातार निगरानी शामिल है. 

अगर आपको कभी फ्यूल की गुणवत्ता पर संदेह हो तो ये करें:

  • सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट देखकर तुरंत निष्कर्ष न निकालें. 
  • शिकायत होने पर संबंधित तेल कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर पर संपर्क करें. 
  • रसीद (बिल) संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर शिकायत दर्ज करने में आसानी हो. 
  • कंपनियों का कहना है कि उनके रिटेल नेटवर्क पर ग्राहकों को तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही पेट्रोल और डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है. 

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सौम्या शाहदेव

लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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