Industrial Production: औद्योगिक उत्पादन 13 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा, अक्टूबर में मामूली बढ़ोतरी

भारत का औद्योगिक उत्पादन अक्टूबर 2025 में सिर्फ 0.4% बढ़ा.
Industrial Production: भारत का औद्योगिक उत्पादन अक्टूबर 2025 में सिर्फ 0.4% बढ़ा, जो 13 महीनों का सबसे निचला स्तर है. विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों की सुस्ती से आईआईपी दबाव में रहा. अक्टूबर में उपभोक्ता वस्तुएं कमजोर रहीं, जबकि इन्फ्रास्ट्रक्चर उत्पादन में सुधार दिखा. कुल मिलाकर औद्योगिक क्षेत्र को नई ऊर्जा और मांग बढ़ाने की जरूरत है.
Industrial Production: भारत के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि अक्टूबर 2025 में गंभीर रूप से सुस्त पड़ गई. विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्रों की कमजोर चाल ने इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) को सिर्फ 0.4% की सालाना वृद्धि तक सीमित कर दिया, जो 13 महीनों का सबसे निचला स्तर है. यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब वैश्विक मांग कमजोर है और घरेलू लागत में दबाव बढ़ रहे हैं.
अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2024 की तुलना में इस साल की वृद्धि दर लगभग ठहर-सी गई. पिछले वर्ष इसी अवधि में औद्योगिक उत्पादन 3.7% बढ़ा था, जबकि इस बार वृद्धि लगभग रुक गई. गौर करने वाली बात यह है कि एनएसओ ने सितंबर 2025 के आंकड़ों में संशोधन करते हुए वृद्धि दर को 4.0% से बढ़ाकर 4.6% किया है. इससे संकेत मिलता है कि सितंबर में औद्योगिक गतिविधि अपेक्षा से बेहतर रही थी, लेकिन अक्टूबर में स्थिति पूरी तरह उलट गई.
विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि आधी से भी कम
भारतीय उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे ज्यादा चिंता का विषय रहा. अक्टूबर 2025 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 1.8% रह गई, जबकि एक साल पहले यह 4.4% थी. इसके पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं. पहला, ऑर्डर बुकिंग में कमी और दूसरा उत्पादन लागत में बढ़ोतरी (कच्चे माल, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स) है. विनिर्माण के 23 उप-क्षेत्रों में से सिर्फ 9 में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली, जो सेक्टर में व्यापक कमजोरी दर्शाता है.
खनन और बिजली क्षेत्र में गिरावट
अक्टूबर में खनन उत्पादन 1.8% गिर गया, जबकि पिछले वर्ष इस महीने 0.9% वृद्धि हुई थी. कोयला, अयस्क और पेट्रोलियम उत्पादन में कमी इसका कारण बनी. बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन सबसे खराब रहा. अक्टूबर में बिजली उत्पादन 6.9% घट गया, जबकि पिछले वर्ष इसी माह में 2% की बढ़त थी. ऊर्जा क्षेत्र में ऐसी गिरावट आमतौर पर औद्योगिक गतिविधियों की कुल कमजोरी का संकेत देती है.
पिछले वर्ष से भी धीमा रहा अप्रैल–अक्टूबर का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025–26 के पहले सात महीनों में आईआईपी की औसत वृद्धि मात्र 2.7% रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में वृद्धि 4% थी. यह दर्शाता है कि वित्त वर्ष 2025-26 में औद्योगिक रिकवरी अपेक्षित गति से नहीं हो रही है.
कैपिटल गुड्स में हल्की बढ़त, उपभोक्ता वर्ग कमजोर
कैपिटल गुड्स उत्पादन में 2.4% की वृद्धि हुई, लेकिन यह भी पिछले वर्ष के 2.9% से कम है. हालांकि, यह संकेत देता है कि निवेश गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हैं. उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की श्रेणी में 0.5% की गिरावट आई. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 5.5% बढ़ी थीं, यानी ग्रामीण और शहरी उपभोग दोनों में दबाव साफ दिख रहा है.
गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं
गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की श्रेणी 4.4% गिरावट के साथ सबसे चिंताजनक स्थिति में रही. पिछले साल यह 2.8% बढ़ी थी. ढांचागत क्षेत्र की श्रेणी में उत्पादन 7.1% बढ़ा, जो पिछले वर्ष के 4.7% की तुलना में बेहतर है. यह बढ़ोतरी सरकार के इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश और निर्माण गतिविधियों में मजबूती दर्शाती है.
प्राथमिक और मध्यवर्ती वस्तुएं
प्राथमिक वस्तुओं का उत्पादन 0.6% घटा और मध्यवर्ती वस्तुओं में 0.9% वृद्धि (पिछले साल 4.8%) देखने को मिली. ये आंकड़े बताते हैं कि उत्पादन चेन के शुरुआती चरणों में सुस्ती है.
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औद्योगिक क्षेत्र को नई ऊर्जा की जरूरत
अक्टूबर के आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय उद्योग कई मोर्चों पर दबाव में है, चाहे वह मांग की कमी हो, ऊर्जा लागत हो या ग्लोबल अनिश्चितता. हालांकि, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स जैसे कुछ क्षेत्रों में मजबूती है, लेकिन समग्र तस्वीर बताती है कि औद्योगिक क्षेत्र को प्रोत्साहन उपायों और मांग बढ़ाने वाली नीतियों की आवश्यकता है.
भाषा इनपुट के साथ
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By Kumarvishwat Sen
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