India China Export: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पदभार ग्रहण करने के साथ ही भारत के साथ टैरिफ का खेलते रहे और चालू वित्त वर्ष 2025-26 में चीन भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बनकर उभरा है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से नवंबर के दौरान चीन को भारत का निर्यात 33% बढ़कर 12.22 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब अमेरिका में ट्रंप टैरिफ और ऊंचे शुल्कों के कारण भारतीय निर्यातकों को वहां कड़ी प्रतिस्पर्धा और दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
द्विपक्षीय व्यापार में संरचनात्मक बदलाव के संकेत
विशेषज्ञों के मुताबिक, ये आंकड़े केवल अस्थायी उछाल नहीं, बल्कि भारत-चीन व्यापार संबंधों में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत दे रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में जहां चीन से भारत का आयात ज्यादा चर्चा में रहा. वहीं, अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है. निर्यात के मोर्चे पर भी भारत की बढ़ती हिस्सेदारी यह दिखाती है कि भारतीय उद्योग अब चीन को केवल आयात स्रोत नहीं, बल्कि बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में भी देख रहा है.
पिछले वर्षों के आंकड़ों से समझें तेजी की रफ्तार
अगर पिछले वर्षों से तुलना करें तो यह उछाल और भी अहम हो जाता है. अप्रैल-नवंबर 2024-25 के दौरान भारत ने चीन को 9.2 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात किया था. वहीं, 2023-24 में यह आंकड़ा 10.28 अरब डॉलर और 2022-23 में 9.89 अरब डॉलर रहा था. 2025-26 में 12.22 अरब डॉलर तक पहुंचना न केवल पिछले साल की गिरावट के उलट है, बल्कि बीते चार वर्षों में सबसे अधिक भी है. इससे साफ है कि भारत का निर्यात आधार अब ज्यादा विविध और मजबूत होता जा रहा है.
किन उत्पादों का किया गया निर्यात
निर्यात में इस बढ़ोतरी के पीछे कई सेक्टरों का योगदान रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, तेल खली, समुद्री उत्पाद, दूरसंचार उपकरण और मसाले प्रमुख कारक रहे. कृषि और समुद्री उत्पादों में सूखी मिर्च, ब्लैक टाइगर झींगा, वन्नामेई झींगा, हरी मूंग और तेल खली के अवशेषों की मांग तेजी से बढ़ी है. इसके साथ ही, एल्युमीनियम और रिफाइन्ड कॉपर के बिलेट ने भी निर्यात को मजबूती दी.
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर बना गेमचेंजर
इस पूरे उछाल में सबसे दिलचस्प भूमिका इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की रही है. अप्रैल से नवंबर के दौरान ‘पॉपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड’ का निर्यात 2.39 करोड़ डॉलर से उछलकर 92.24 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया. इसके अलावा, फ्लैट पैनल डिस्प्ले मॉड्यूल और टेलीफोनी से जुड़े दूसरे बिजली उपकरणों में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई. यह संकेत देता है कि भारत अब केवल कच्चे माल या कृषि उत्पादों तक सीमित नहीं, बल्कि उच्च मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में भी चीन के बाजार में जगह बना रहा है.
निर्यात में व्यापक विस्तार
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कृषि उत्पाद और मूल धातुओं में फैली यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत का निर्यात उछाल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है. यह चीन को भारत के निर्यात के व्यापक संरचनात्मक विस्तार को दर्शाता है. यानी भारत का एक्सपोर्ट बास्केट ज्यादा विविध हो रहा है, जिससे भविष्य में निर्यात स्थिर और टिकाऊ बने रहने की संभावना बढ़ती है.
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ट्रंप टैरिफ के बीच भारत की नई रणनीति
एक निर्यातक ने बताया कि अमेरिकी बाजार में ऊंचे शुल्क और सख्त व्यापार शर्तों के कारण भारतीय कंपनियों के लिए वहां प्रतिस्पर्धी कीमतों पर माल भेजना मुश्किल हो गया है. इसी वजह से भारतीय उद्योग अब वैकल्पिक बाजारों की ओर तेजी से रुख कर रहा है, जिसमें चीन एक बड़ा और आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है. माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में भारत-चीन व्यापार में यह बदलाव और गहरा हो सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार मानचित्र पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी.
भाषा इनपुट के साथ
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