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नये फॉर्म में दाखिल करना होगा आयकर रिटर्न

आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कुछ बदलाव किये हैं, जिनके अनुसार ही अब करदाताओं को आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा. व्यक्तिगत करदाता के लिए जहां नये आइटीआर फॉर्म अधिसूचित किये गये हैं, वहीं ट्रस्टों व एनजीओ में दिये गये दान की भी पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए पहली बार आयकर विभाग ने पहल की है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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Income Tax Returned
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आयकर विभाग ने हाल ही में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आइटीआर फॉर्म-1 (सहज) और आइटीआर फॉर्म-4 (सुगम) को अधिसूचित किया है. ये फॉर्म व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म द्वारा दायर किये जा सकते हैं जिनकी सकल आय वित्त वर्ष 2021-22 में 50 लाख रुपये तक है. हालांकि, क्यूटीआर-4 का टीडीएस रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 मई 2022 है और इसलिए कर योग्य आय वाले लोगों की श्रेणी को क्यूटीआर-4 टीडीएस रिटर्न को आयकर वेबसाइट में अपडेट होने का इंतजार करना होगा. इस साल फॉर्म में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है लेकिन उसमें कुछ जोड़ दिये गये हैं, जो इस प्रकार हैं -

1. सीबीडीटी ने 4 अप्रैल 2022 को जारी अधिसूचना में 'कनाडा', 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका' और 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आयरलैंड' देशों को धारा 89ए के लिए अधिसूचित किया है. आइटीआर-1 फॉर्म में सेवानिवृत्ति का विवरण मांगा गया है. आयकर अधिनियम की धारा 89ए के तहत अधिसूचित देश में बनाये गये लाभ खाते, जिन्हें शुद्ध वेतन में शामिल किया जाना चाहिए. यह अन्य देशों में बनाये गये सेवानिवृत्ति लाभ खातों से आय विवरण भी मांगता है. करदाताओं को उक्त धारा के तहत कराधान से कम की जाने वाली राहत राशि का उल्लेख करना होगा.

2. करदाताओं को अनुसूची ओएस- अन्य स्रोतों से आय के तहत कर योग्य भविष्य निधि खाते (2.5 लाख रुपये से अधिक पीएफ योगदान) में योगदान की राशि पर अर्जित ब्याज का उल्लेख करना होगा.

3. आइटीआर-2 और आइटीआर-3 में एक 'शेड्यूल: टैक्स डिफर्ड ऑन ईएसओपी' डाला गया है. योग्य स्टार्टअप द्वारा प्रदान किये गये इएसओपीएस का एक अलग प्रकटीकरण आवश्यक है क्योंकि कराधान की घटना को बिक्री के स्थान पर स्थगित कर दिया गया है.

4. करदाताओं को यह खुलासा करना होगा कि क्या उन्होंने धारा 115बीएसी के तहत नयी कर व्यवस्था का विकल्प चुना था और फॉर्म 10-आइइ वित्त वर्ष 2020-21 में दाखिल किया गया था. इसके अलावा, करदाता वित्त वर्ष 2021-22 के लिए नयी कर व्यवस्था को जारी रखने या छोड़ने का विकल्प चुन सकते हैं.

5. करदाता को पूंजीगत लाभ लेनदेन से संबंधित अतिरिक्त जानकारी देनी होगी.

टीडीएस नहीं कटने पर भी देनी होगी आय की जानकारी

वित्त वर्ष 2021-22 में, विभिन्न आय हैं जिनका खुलासा करना अनिवार्य है, भले ही स्रोत पर कर की कटौती (टीडीएस) न की गयी हो या स्रोत पर कर एकत्र नहीं किया गया हो. नये फॉर्म एआइएस (वार्षिक सूचना प्रणाली) और टीआइएस (करदाता सूचना प्रणाली) में सभी लेनदेन संबंधी विवरण हैं जिनके लिए पैन/आधार कार्ड पहचान प्रमाण के रूप में दिया गया है.

आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए निम्नलिखित

आय का खुलासा करना अनिवार्य है.

1. बचत खातों पर अर्जित ब्याज

2. 30000 (एकल बिल)/ 100000 (पूरे वर्ष के लिए ) रुपये से कम प्राप्त संविदात्मक आय.

3. 50,00,000 रुपये से कम अचल संपत्ति की बिक्री की आय

4. कृषि वस्तुओं की बिक्री से आय

5. करदाता द्वारा धारित सभी बैंक खातों का विवरण

6. वर्ष के दौरान असूचीबद्ध शेयरों के धारित और लेन-देन का विवरण

7. वर्ष के दौरान करदाता द्वारा धारित निदेशकों का विवरण

8. वर्ष के दौरान करदाता द्वारा धारित विदेशी संपत्ति का विवरण

9. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के बिक्री से प्राप्त आय का विवरण. इसमें टीडीएस नहीं कटता, न ब्याज पर और न ही उसके खरीद-बिक्री पर.

ट्रस्टों और एनजीओ के लिए पहली बार जारी हुए 10बीडी फॉर्म

सीबीडीटी ने निर्धारिती द्वारा दावा की गयी कटौती और ट्रस्ट व एनजीओ द्वारा प्राप्त दान के समाधान पर अधिक पारदर्शिता और सटीकता की सुविधा के लिए फॉर्म 10बीडी और 10बीइ को अधिसूचित किया है. वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए, फॉर्म 10बीडी को 31 मई 2022 को या उससे पहले दाखिल करना जरूरी है.

फॉर्म 10बीडी दाखिल करने के लिए आवश्यक

1. दाता का नाम

2. दाता का संपर्क पता

3. दान की प्रकृति (कॉर्पस फंड/विशिष्ट अनुदान/अन्य)

4. प्राप्ति का तरीका

5. दान की राशि

6. पैन/आधार/कर पहचान संख्या (विदेशी दाता के मामले में)

7. धारा जिसके तहत दान प्राप्त किया गया था

10बीडी के लिए दाखिल न करने के परिणाम

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80जी के तहत पंजीकृत प्रत्येक ट्रस्ट या एनजीओ संगठन, जिन्होंने दान प्राप्त किया है, को अधिसूचना में निर्दिष्ट तिथि (अगले वित्तीय वर्ष के 31 मई) के भीतर फॉर्म 10बीडी दाखिल करना आवश्यक है. ऐसा नहीं करने पर आयकर अधिनियम की धारा 234जी के तहत 200 रुपये प्रति दिन का विलंब शुल्क लगेगा जो दान की हुई राशि से अधिक नहीं होगी और धारा 271के के तहत जुर्माना भी लगेगा. यह जुर्माना कि 10,000 रुपये से कम नहीं होगा.

विभाग द्वारा प्रमाण-पत्र 10बीइ के रूप में जारी किया जायेगा

एक बार धर्मार्थ संगठन द्वारा फॉर्म 10बीडी दाखिल करने के बाद, उन्हें फॉर्म 10बीइ में प्रमाण पत्र डाउनलोड करना और जारी करना आवश्यक है. किसी भी वित्तीय वर्ष के लिए दाताओं को प्रमाण पत्र जारी करने की नियत तारीख अगले वित्तीय वर्ष की 31 मई है. प्रमाण पत्र में धर्मार्थ संगठन का नाम, स्थायी खाता संख्या पैन, पता और प्राप्त दान के विवरण के साथ आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80जी के तहत स्वीकृति संख्या लिखा होगा.

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