भूल जाइए 15CA और 15CB, अब विदेश पैसे भेजने के लिए भरना होगा फॉर्म 145 और 146

Published by :Soumya Shahdeo
Published at :28 Apr 2026 5:54 AM (IST)
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Income Tax Form 145 and 146

विदेश पैसे भेजने के लिए अब फॉर्म 145 और 146 जरूरी (Photo: AI)

Income Tax Form 145 and 146: विदेश पैसे भेजने की प्रक्रिया अब बदल गई है क्योंकि सरकार ने रिपोर्टिंग के लिए नए फॉर्म जारी किए हैं. जानिए फॉर्म 145 और 146 आपके ट्रांजैक्शन को कैसे आसान बनाएंगे.

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Income Tax Form 145 and 146: अगर आप विदेश में रहने वाले अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त को पैसे भेजना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने विदेशी लेनदेन (Foreign Remittance) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब पुराने फॉर्म 15CA और 15CB को रिटायर कर दिया गया है और उनकी जगह फॉर्म 145 और फॉर्म 146 ने ले ली है.

इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना और विदेशों में जाने वाले पैसे का हिसाब-किताब पहले से ज्यादा ट्रांसपेरेंट बनाना है. 

क्या है फॉर्म 145 और यह क्यों जरूरी है?

फॉर्म 145 एक तरह का डेक्लरेशन फॉर्म है जिसे वह व्यक्ति भरता है जो पैसा भेज रहा है. इसमें आपको यह बताना होगा कि आप कितना पैसा भेज रहे हैं, पैसा भेजने की वजह (Nature of remittance) क्या है और क्या उस पर नियमानुसार टैक्स (TDS) काटा गया है. बैंक आपकी ट्रांजैक्शन तभी आगे बढ़ाएगा जब आप यह फॉर्म ऑनलाइन पोर्टल पर भरकर सबमिट करेंगे. यह फॉर्म हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो किसी एनआरआई या विदेशी संस्था को भुगतान कर रहा है. 

फॉर्म 146 की जरूरत कब पड़ेगी?

फॉर्म 146 एक सर्टिफिकेट है जिसे आपको खुद नहीं भरना है, बल्कि इसे एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से प्रूफ करवाना होगा. यह फॉर्म हर मामले में जरूरी नहीं होता, लेकिन जहां ट्रांजैक्शन टैक्सेबल होता है या जहां नियमों की बारीकियां उलझी हुई होती हैं, वहां इसकी जरूरत पड़ती है. सीए इस फॉर्म के जरिए यह कन्फर्म करता है कि जो पैसा बाहर भेजा जा रहा है, उस पर सही दर से टैक्स काटा गया है और वह इनकम टैक्स के नियमों के अनुकूल है. 

क्या बिना इन फॉर्म के पैसा भेजा जा सकता है?

नहीं, अब बैंकों और ऑथराइज्ड डीलर्स के लिए इन फॉर्म्स की जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है. अगर आपकी ट्रांजैक्शन टैक्सेबल नहीं है या वह किसी खास छूट के दायरे में आती है, तो शायद आपका काम सिर्फ फॉर्म 145 से हो जाए और सीए सर्टिफिकेट (146) की जरूरत न पड़े. लेकिन अगर आप फीस, प्रोफेशनल सर्विस या किसी बड़ी कमाई का हिस्सा बाहर भेज रहे हैं, तो बैंक आपसे दोनों फॉर्म की मांग करेगा. 

इस बदलाव से आप पर क्या असर होगा?

सबसे बड़ा असर यह है कि अब आपको पुराने सिस्टम को छोड़कर नए फॉर्मेट को समझना होगा. पुराने फॉर्म अब एक्सेप्ट नहीं किए जाएंगे. अगर आपके पास सही और अपडेटेड डॉक्युमेंट्स नहीं हैं, तो बैंक आपका पैसा ट्रांसफर करने से मना कर सकता है, जिससे आपकी पेमेंट में देरी हो सकती है. विदेशी लेनदेन पर सरकार की पैनी नजर रहती है, इसलिए किसी भी परेशानी से बचने के लिए ट्रांजैक्शन शुरू करने से पहले ही ये फॉर्म तैयार कर लें. 

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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