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तीन महीने तक EMI में छूट पाने वाले धोखेबाजों से रहें सावधान! बचाव के हैं ये 5 प्वाइंट्स...

By KumarVishwat Sen
Updated Date
साइबर ठगों से रहें सावधान, ओटीपी न करें साझा.
साइबर ठगों से रहें सावधान, ओटीपी न करें साझा.

नयी दिल्ली : अगर आप कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए 25 मार्च से लागू लॉकडाउन में आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे है, तो रिजर्व बैंक जैसी सरकार और सरकारी संस्थाएं आपकी आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए राहत पैकेज के साथ सामने आयी हैं. इन्हीं आर्थिक राहत पैकेज में से एक आपको आपके लोन की ईएमआई भुगतान से तीन महीने के लिए छूट देना शामिल है. सबसे अहम यह है कि रिजर्व बैंक के निर्देश के बाद यदि आपने अपने बैंक से तीन महीने की ईएमआई भुगतान से राहत (ईएमआई स्थगन) पाने के लिए आवेदन किया है, तो आपको साइबर धोखेबाजों से सावधान रहना होगा. आइए, हम इन पांच प्वाइंट्स में जानते हैं कि आपको टिड्डियों की तरह मंडरा रहे साइबर धोखेबाजों से कैसे सावधान रहना है...

किसी से भी ओटीपी को साझा न करें : यदि आपने तीन महीने तक की ईएमआई टालने या अधिस्थगन करने का आवेदन किया है, तो आपका बैंक आपका ओटीपी या पासवर्ड जानने के लिए आपको कभी भी फोन कॉल नहीं करेगा या आपके ईएमआई या ब्याज भुगतान (स्थगन) को स्थगित करने के लिए आपके ओटीपी या पासवर्ड का ब्योरा जानने के लिए कोई ईमेल भी नहीं भेजेगा. किसी भी गोपनीय या निजी जानकारी जैसे ओटीपी, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड नंबर, सीवीवी नंबर, नेटबैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग पासवर्ड, ग्राहक आईडी, यूपीआई पिन आदि को किसी भी बैंक कर्मचारी सहित सत्यापन के लिए किसी से साझा न करें.

यदि आपके पास आपके बैंक का कर्मचारी बनकर कोई व्यक्ति आपसे ओटीपी, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड का नंबर, सीवीवी नंबर, नेटबैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड, ग्राहक आईउी, यूपीआई पिन आदि की जानकारी मांगता है, तो आप सावधान हो जाएं और तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस के साथ ही अपने बैंक को भी दें.

इसे भी पढ़ें : SBI और सरकार ने किया आगाह : EMI को तीन महीने तक टालने के लिए किसी को मत बताइए अपना सीक्रेट नंबर, वर्ना

अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप पर 'ऑटो सेव' या 'ऑटो कम्प्लीट' फीचर्स को डिसेबल करें : मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए यूजर आईडी या पासवर्ड को ऑटो-फिल या सेव न करें. हालांकि, यह सुविधाजनक है, लेकिन यह आपके लिए जोखिम भरा भी साबित हो हो सकता है.

फ़िशिंग टेक्स्ट पर प्रतिक्रिया न दें : यदि आपके मोबाइल पर कोई एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिये संदेश भेजकर URL भेजता है और उसे क्लिक करने के लिए प्रेरित करता है, तो आप कभी भी उस URL वाले मैसेज का अनुसरण नहीं करें, जो आप अज्ञात स्रोतों से प्राप्त करते हैं या व्यक्तिगत जानकारी या ऑनलाइन बैंकिंग क्रेडेंशियल्स को ई-मेल या पाठ संदेश के माध्यम से प्रकट करते हैं. अक्सर इनका उपयोग आपके खाते में साइबर सेंध लगाकर चोरी के लिए किया जाता है.

सत्यापन कॉल से सावधान रहें : आम तौर पर आपके फोन पर कॉल करने वाला व्यक्ति बैंक का प्रतिनिधि या बैंक की तकनीकी टीम का कोई व्यक्ति होने का दिखावा करता है. सुरक्षा का झूठा अहसास कराने या आपके मन में असुरक्षा का दहशत फैलाने के बाद कॉल करने वाला व्यक्ति पीड़ित को अपना व्यक्तिगत और गोपनीय डेटा जानने की कोशिश करता है. जब संदेह हो, तो हमेशा अपने बैंक से संबंधित बैंक या वित्तीय सेवा संस्थान को कॉल या ईमेल करें और उनसे कॉल के बारे में पूछें.

खाता चेक-अप का संचालन करें : अपने वित्तीय स्थिति के बारे में जानने के प्रति जागरूक होना भी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. अपने पैसों का हिसाब रखने के लिए अपने बैंक खातों की नियमित जांच करें. हर बार जब आप लेन-देन करते हैं, तो वापस जाएं और शेष राशि की जांच करके सुनिश्चित करें कि सही राशि का भुगतान किया गया है या प्राप्त किया गया है या कि नहीं? किसी भी विसंगति के मामले में आप तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें.

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