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सरकारी बैंकों ने कबाड़ से छाप दिए करोड़ों रुपये, एक महीने तक चली सफाई

Updated at : 02 Nov 2024 10:06 AM (IST)
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सरकारी बैंकों ने कबाड़ से छाप दिए करोड़ों रुपये, एक महीने तक चली सफाई

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Scrap: वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग की अगुवाई में आयोजित इस अभियान में सरकारी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और नाबार्ड, सिडबी, एक्जिम बैंक, एनएचबी, आईआईएफसीएल जैसे अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थान शामिल हुए.

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Scrap: साफ-सफाई आदमी के जीवन के लिए सबसे अधिक महत्व है. इससे घर और दफ्तर की सफाई होने के साथ-साथ कमाई भी हो जाती है. आपके घर-दफ्तर में सालों से पड़ी बेकार चीजें आपके लिए भले ही कबाड़ हो, लेकिन वह किसी के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है. घर-दफ्तर से निकले कबाड़ को बाजार में खरीदार भी मिल जाते हैं और इसे बेचकर मोटी कमाई भी हो जाती है. यह जानकर आप चौंक जाएंगे कि इस साल दिवाली के मौके पर साफ-सफाई के दौरान निकले कबाड़ को बेचकर सरकारी बैंक और वित्तीय संस्थानों ने करीब 4.5 करोड़ रुपये की मोटी कमाई की है.

एक महीने तक चला सफाई का विशेष अभियान

समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और वित्तीय संस्थानों ने करीब एक महीने तक चले विशेष सफाई अभियान के दौरान कबाड़ का निपटारा कर 4.5 करोड़ रुपये की कमाई कर ली. रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबित मामलों की संख्या में कटौती और स्वच्छता को संस्थागत बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए यह अभियान महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर से लेकर 31 अक्टूबर 2024 तक चलाया गया था.

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38,500 से अधिक स्थानों पर चलाया गया सफाई अभियान

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) की अगुवाई में आयोजित इस अभियान में सरकारी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और नाबार्ड, सिडबी, एक्जिम बैंक, एनएचबी, आईआईएफसीएल जैसे अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थान शामिल हुए. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस अभियान में डीएफएस ने सभी चिह्नित लोक शिकायतों, लोक अपीलों, पीएमओ संदर्भों और सांसदों के संदर्भों का 100% समाधान किया. इस विशेष अभियान के दौरान 11.79 लाख वर्ग फीट जगह खाली हुई और कबाड़ निपटान के जरिये 4.50 करोड़ रुपये की कमाई हुई. यह अभियान देश भर में 38,500 से अधिक स्थानों पर संचालित किया गया. बयान के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों और 43 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने पेंशन शिकायत सप्ताह का आयोजन भी किया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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