सोने-चांदी में 40 साल की सबसे बड़ी गिरावट, ऑल-टाइम हाई से चांदी ₹1.67 लाख और सोना ₹36 हजार सस्ता

सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva )
Gold-Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में पिछले 40 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी है, जिससे 29 जनवरी के ऑल-टाइम हाई से सोना ₹36,552 और चांदी ₹1.67 लाख तक सस्ती हो गई है. 23 मार्च को भारी उतार-चढ़ाव के बाद सोना ₹1.40 लाख और चांदी ₹2.19 लाख पर बंद हुई. जानिए इस गिरावट के पीछे के वैश्विक कारण.
Gold-Silver Price: निवेशकों के लिए सुरक्षित माने जाने वाले सोने और चांदी के बाजार में सोमवार, 23 मार्च को हाहाकार मच गया. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में ऐसी गिरावट दर्ज की गई है जैसी पिछले चार दशकों में नहीं देखी गई.
बाजार का हाल: सुबह गिरावट, शाम को मामूली रिकवरी
कल बाजार खुलने और बंद होने के बीच भारी उतार-चढ़ाव देखा गया.
- सोना (24 कैरेट): सुबह यह ₹12,077 गिरकर ₹1.35 लाख पर खुला था, लेकिन शाम तक कुछ सुधार के साथ ₹1.40 लाख पर बंद हुआ. (शुक्रवार को यह ₹1.47 लाख था).
- चांदी: सुबह ₹30,864 की भारी गिरावट के साथ ₹2.01 लाख पर खुली थी, लेकिन शाम को थोड़ी रिकवरी के बाद ₹2.19 लाख पर बंद हुई. (शुक्रवार को यह ₹2.32 लाख थी).
क्यों आई 40 साल की सबसे बड़ी गिरावट ?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस भारी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग है. युद्ध की अनिश्चितता के कारण निवेशक सोने को ‘कैश’ में बदल रहे हैं. केवल 24 दिनों के भीतर सोना ₹19,528 और चांदी ₹47,440 सस्ती हो चुकी है.
ऑल-टाइम हाई से अब तक का सफर
इस साल की शुरुआत में कीमतों ने आसमान छुआ था, लेकिन अब वे तेजी से नीचे आ रही हैं.
- सोना: 29 जनवरी को ₹1.76 लाख (ऑल-टाइम हाई) पर था, जो अब ₹36,552 सस्ता हो चुका है.
- चांदी: 29 जनवरी को ₹3.86 लाख (ऑल-टाइम हाई) पर थी, जो अब तक ₹1.67 लाख टूट चुकी है.
अलग-अलग शहरों में अलग रेट क्यों ?
अक्सर लोग पूछते हैं कि दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में सोने के भाव अलग क्यों होते हैं? इसके 4 मुख्य कारण हैं.
- ट्रांसपोर्टेशन और सुरक्षा: आयात केंद्रों से शहर की दूरी बढ़ने पर सुरक्षा और ईंधन का खर्च बढ़ जाता है.
- खरीद की मात्रा: दक्षिण भारत में खपत ज्यादा होने के कारण ज्वेलर्स थोक में खरीदारी करते हैं, जिससे उन्हें डिस्काउंट मिलता है और ग्राहकों को कम रेट.
- लोकल एसोसिएशन: हर शहर की ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग के आधार पर अपनी दरें तय करती है.
- पुराना स्टॉक: ज्वेलर्स ने अपना पुराना माल किस रेट पर खरीदा था, वह भी बिक्री मूल्य को प्रभावित करता है.
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By Abhishek Pandey
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