GDP: वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी 7 फीसदी रहने का अनुमान, वैश्विक संकट का असर

Published by : Pritish Sahay Updated At : 06 Jan 2023 6:45 PM

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GDP: 2022-23 में स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी 157.60 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जबकि 2021-22 के लिए अनंतिम अनुमान 147.36 लाख करोड़ रुपये था. यानी 2022-23 में वास्तविक जीडीपी में वृद्धि 7 फीसदी अनुमानित है. जबकि 2021-22 में यह 8.7 फीसदी था.

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GDP: चालू वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी 7 फीसदी रह सकता है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने सालाना जीडीपी ग्रोथ का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है. 2022-23 में स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी 157.60 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जबकि 2021-22 के लिए अंतिम अनुमान 147.36 लाख करोड़ रुपये था. यानी 2022-23 में वास्तविक जीडीपी में वृद्धि 7 फीसदी अनुमानित है. जबकि 2021-22 में यह 8.7 फीसदी था.

अनुमान बजट तैयार करने में होता है सहायक: वित्त वर्ष 2022-23 के लिए राष्ट्रीय आय का पहला अग्रिम अनुमान काफी अहम होता है क्योंकि इन आंकड़ों का उपयोग केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बजट तैयार करने के लिए करती है. बीते महीने, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमान को पहले के सात फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया था. ऐसा भू राजनीतिक तनाव और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के मद्देनजर किया गया था.

गौरतलब है कि एक फरवरी 2023 को लोकसभा में बजट पेश किया जाएगा. बता दें,  भू राजनीतिक तनाव और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के कारण बीते महीने भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि के अनुमान को पहले के सात फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया था. वहीं अनुमान में आरबीआई ने 2022-23 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. तीसरी तिमाही में वृद्धि दर 4.4 फीसदी और चौथी तिमाही में वृद्धि दर 4.2 फीसदी रहने की संभावना जताई थी.

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बता दें, चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि अनुमान को दिसंबर 2022 में तीसरी बार संशोधित किया गया. अप्रैल 2022 में केंद्रीय बैंक ने जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया था वहीं पिछले वर्ष सितंबर में इसे और घटाकर सात फीसदी कर दिया गया था. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी भारत की वृद्धि के अनुमान को पहले के 7.4 फीसदी से घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया था.
भाषा इनपुट से साभार

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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