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भारत में Elon Musk ने की सॉफ्ट लैंडिंग! Starlink को मिला सैटेलाइट इंटरनेट का लाइसेंस

Updated at : 06 Jun 2025 7:39 PM (IST)
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Elon Musk

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Elon Musk: एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए जरूरी जीएमपीसीएस लाइसेंस मिल गया है. इससे दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी. स्टारलिंक का मुकाबला भारत में जियो और वनवेब से होगा. हालांकि, स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया को लेकर अब भी असमंजस है. स्टारलिंक की सेवाएं महंगी हो सकती हैं, लेकिन यह तकनीक भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम दे सकती है.

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Elon Musk: दुनिया के अरबपति अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भारत में धमाकेदार एंट्री मारी है. एलन मस्क की महत्वाकांक्षी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक को भारत में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है. अब इस सेवा को भारत में लॉन्च करने का रास्ता लगभग साफ होता दिखाई दे रहा है. भारतीय दूरसंचार मंत्रालय ने स्टारलिंक को ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट सर्विस (जीएमपीसीएस) का लाइसेंस दे दिया है, जो देश में इसकी आधिकारिक एंट्री की मंजूरी जैसा है.

भारत के और करीब पहुंची स्टारलिंक

स्टारलिंक को भारत में तीसरी ऐसी कंपनी बनने का गौरव मिला है, जिसे यह सैटेलाइट इंटरनेट सेवा का लाइसेंस मिला है. इससे पहले वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्यूनिकेशन्स को यह लाइसेंस मिल चुका है. इस उपलब्धि के साथ, एलन मस्क की स्टारलिं भारत में सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा देने की दौड़ में आधिकारिक रूप से शामिल हो गई है.

केंद्रीय मंत्री सिंधिया का बयान

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “स्टारलिंक की सैटेलाइट सेवा भारत के टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम में एक नए फूल की तरह जुड़ रही है. पहले जहां सिर्फ फिक्स्ड लाइन मौजूद थी. अब मोबाइल और ब्रॉडबैंड दोनों की सुविधा है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में जहां फाइबर केबल या टावर लगाना संभव नहीं होता, वहां सैटेलाइट कनेक्टिविटी ही एकमात्र विकल्प है.

स्टारलिंक कैसे करती है काम?

स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का हिस्सा है, जो लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में 500–550 किमी की ऊंचाई पर मौजूद हजारों छोटे सैटेलाइट्स के जरिए इंटरनेट सेवा प्रदान करता है. इसका मकसद दुनिया के उन इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है, जहां अब तक ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं है.

स्टारलिंक की भारत में पुरानी कोशिशें

स्टारलिंक ने 2021 में भारत में प्री-बुकिंग शुरू कर दी थी और बड़ी संख्या में लोगों ने रजिस्ट्रेशन भी करवाया था. लेकिन, उस वक्त भारत सरकार से मंजूरी न मिलने के कारण कंपनी को प्री-बुकिंग रोकनी पड़ी थी. अब लाइसेंस मिलने से कंपनी को फिर से भारत में अपनी योजना पर आगे बढ़ने का मौका मिला है.

रिलायंस जियो और वनवेब से होगा मुकाबला

भारत में स्टारलिंक की सीधी टक्कर रिलायंस जियो और भारती एयरटेल की वनवेब से होगी. हालांकि, हाल ही में स्टारलिंक ने इन दोनों कंपनियों के साथ हार्डवेयर वितरण को लेकर साझेदारी का ऐलान भी किया है, जिससे इसके विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है.

स्पेक्ट्रम आवंटन अगला बड़ा सवाल

हालांकि, स्टारलिंक को लाइसेंस तो मिल गया है, लेकिन अभी तक सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. स्पेक्ट्रम के बंटवारे को लेकर कंपनियों की राय बंटी हुई है. जियो और एयरटेल नीलामी प्रक्रिया के पक्ष में हैं. वहीं, स्टारलिंक प्रशासनिक तरीके से आवंटन की मांग कर रही है. जब तक यह मुद्दा सुलझता नहीं, भारत में सेवा की शुरुआत अधर में ही रहेगी.

सैटेलाइट इंटरनेट से किसे होगा फायदा

सैटेलाइट इंटरनेट से सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों को होगा, जहां आज भी नेटवर्क कवरेज या ब्रॉडबैंड पहुंच बेहद सीमित है. इससे ऑनलाइन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल बैंकिंग जैसी सेवाएं उन क्षेत्रों में भी सुलभ हो सकेंगी.

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कीमत बनी सबसे बड़ी चिंता

जहां स्टारलिंक की सेवा तकनीकी रूप से बेहद प्रभावशाली है, वहीं उसकी लागत को लेकर चिंता जताई जा रही है. स्टारलिंक की किट और सर्विस प्लान पारंपरिक ब्रॉडबैंड से कई गुना महंगे हो सकते हैं. प्रीमियम हार्डवेयर और मासिक चार्जेस इसे आम भारतीय उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर कर सकते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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