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सरकार के रडार पर ई-फार्मेसी, सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

डीसीजीआई द्वारा 8 फरवरी को ऑनलाइन फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें दो दिनों के अंदर जवाब देने या देश में दवाओं की बिक्री और वितरण पर बिना किसी नोटिस के कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए कहा गया था.

नई दिल्ली : ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और सप्लाई करने वाली ई-फार्मेसी कंपनियां सरकार के रडार पर है. खबर है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इन ई-फार्मेसी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में जुट गई है. समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट दी है, जिसमें कहा गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ई-फार्मेसी कंपनियों द्वारा दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की संभावना है. सूत्रों ने बताया कि ई-फार्मेसी फिलहाल उस बिजनेस मॉडल का पालन कर रहे हैं, जो उन रोगियों के लिए समस्याग्रस्त हो सकता है, जो ऑनलाइन दवाओं का ऑर्डर दे रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि उनका निजी डेटा की गोपनीयता खतरे में है और दवाओं के दुरुपयोग की संभावना है.

डीसीजीआई ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने इंटरनेट पर दवाइयां बेचने वाली अवैध ई-फार्मेसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. डीसीजीआई द्वारा 8 फरवरी को ऑनलाइन फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें दो दिनों के अंदर जवाब देने या देश में दवाओं की बिक्री और वितरण पर बिना किसी नोटिस के कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिए कहा गया था. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ई-फार्मेसी कंपनियां ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट-1940 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन कर रही हैं. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने 20 से अधिक ऑनलाइन फार्मेसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. जिन कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें Tayalmg, प्रैक्टो, अपोलो अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे कुछ बड़े खिलाड़ी भी शामिल हैं.

नियमों का कर रहे उल्लंघन

अखिल भारतीय ओरिजिन केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स (एआईओसीडी) लगातार केंद्र सरकार को आगाह कर रहा था कि ड्रग एक्ट, फार्मेसी एक्ट और अन्य दवाओं से संबंधित नियम और आदेश, आचार संहिता, इंटरनेट पर दवाओं की बिक्री की अनुमति नहीं देते हैं और छूट और योजना के साथ विज्ञापन द्वारा दवा की बिक्री को बढ़ावा देते हैं. यह जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. एआईओसीडी ने कहा कि सभी वैध अपीलों, अनुरोधों, बैठकों और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद कॉरपोरेट घराने अवैध रूप से वित्तीय शक्ति के साथ इस क्षेत्र के खिलाड़ी मूल्य निर्धारण करने में लिप्त थे. ऐसा करना अधिक खतरनाक है, क्योंकि ई-फार्मेसियों ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का संचालन शुरू कर दिया था. देश में राज्यों की सीमाओं में नकली दवाओं की बिक्री में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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ऑनलाइन नकली दवाओं की बिक्री

एआईसीओडी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ऑनलाइन ऐप से नारकोटिक ड्रग्स, गर्भावस्था समाप्ति किट, एंटीबायोटिक्स आदि दवाओं तक पहुंचना आसान हो गया है और इसकी अंतरराज्यीय आपूर्ति सीधे रोगियों तक की जा रही है, जिससे एफडीए द्वारा इसका पता लगाना और ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो गया है. एआईओसीडी ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी भी अपना डेटा बना रही है. एआईओसीडी ने हमेशा सभी ज्वलंत मुद्दों को उजागर किया है कि ये अवैध ई-फार्मेसी कंपनियां अपने पोर्टल पपर अपना स्वयं का स्वास्थ्य डेटा बना रहे हैं, जो व्यक्तिगत स्वास्थ्य डेटा को उजागर करने के लिए खतरा भी है और यह एनएचआरएम की पीएम स्वास्थ्य डेटा नीति के खिलाफ भी है.

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KumarVishwat Sen
KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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