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ट्रंप ने फिर दी धमकी, बोले- भारत ने की नाममात्र टैरिफ की पेशकश, अब हो चुकी देर

Updated at : 01 Sep 2025 10:21 PM (IST)
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Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

Donald Trump: डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एक बार फिर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि भारत ने अब टैरिफ घटाने की पेशकश की है, लेकिन बहुत देर हो चुकी है. ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत अमेरिका से बेहद कम तेल और सैन्य सामान खरीदता है, जबकि रूस से उसकी खरीद अधिक है. अमेरिका ने भारत पर 50% शुल्क लगाया है. पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत किसानों और छोटे उद्योगों के हितों से समझौता नहीं करेगा.

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Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को लेकर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत ने अब शुल्क में कटौती कर इसे नाममात्र करने की पेशकश की है, लेकिन इसमें काफी देर हो चुकी है. ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका से बेहद कम तेल और सैन्य सामान खरीदता है, जबकि रूस से उसकी खरीद काफी अधिक है.

भारत हमें अधिक सामान बेचता है: ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका का भारत के साथ व्यापार बहुत सीमित है, जबकि भारत अमेरिकी बाजार में बड़े पैमाने पर सामान बेचता है. उन्होंने इसे पिछले कई दशकों से चला आ रहा एकतरफा रिश्ता बताया. ट्रंप ने कहा कि भारत ने हमेशा अमेरिका से सबसे अधिक शुल्क वसूले, जिसके चलते अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में अपनी पकड़ बनाना मुश्किल रहा.

रूस से खरीद पर आपत्ति

ट्रंप ने भारत के रूस से तेल और सैन्य उपकरणों की बड़ी मात्रा में खरीद पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका से बहुत कम खरीद करता है. अब जबकि भारत ने अपने शुल्क कम करने की पेशकश की है, तब भी यह कदम देर से उठाया गया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भारत को ऐसा सालों पहले करना चाहिए था.

मोदी की बैठकें और एससीओ सम्मेलन

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया. यहां उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर द्विपक्षीय वार्ताएं कीं. ट्रंप का बयान कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत-रूस और भारत-चीन समीकरणों से भी जुड़ा है.

अमेरिका का 50% शुल्क और भारत की प्रतिक्रिया

ट्रंप प्रशासन ने भारत पर दोहरी मार डाली है. अमेरिका ने भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया है. इस तरह भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया है, जो दुनिया में सबसे अधिक माना जाता है. भारत ने इन शुल्कों को अनुचित बताते हुए इसका विरोध किया है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि वह किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्योगों के हितों से समझौता नहीं कर सकते.

मोदी का स्पष्ट संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा है कि चाहे दबाव कितना भी बढ़ जाए, भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत किसानों और छोटे उद्योगों के हितों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा.

विदेश मंत्री का रुख

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत में भारत की कुछ सीमाएं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों को प्राथमिकता देगी और उनकी सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जाएगा.

भारत-अमेरिका व्यापारिक आंकड़े

आर्थिक दृष्टि से देखें, तो भारत और अमेरिका के बीच 2024-25 में वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 131.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा. इसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से आयात 45.3 अरब डॉलर का हुआ. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि व्यापारिक असंतुलन के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते मजबूत बने हुए हैं.

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ट्रंप ने बयान देकर नई बहस दिया जन्म

डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. जहां अमेरिका भारत पर शुल्कों को लेकर दबाव बना रहा है, वहीं भारत अपने किसानों, उद्योगों और आर्थिक सुरक्षा से समझौता करने को तैयार नहीं है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश व्यापारिक मसलों पर किस हद तक लचीलापन दिखाते हैं और आर्थिक रिश्तों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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