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DA Hike: दशहरा से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, डीए में 3% की बढ़ोतरी

Updated at : 01 Oct 2025 4:16 PM (IST)
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DA Hike

केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में बढ़ोतरी.

DA Hike: मोदी सरकार ने दशहरा और दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनभोगियों को बड़ा तोहफा दिया है. कैबिनेट ने महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 3% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है. यह बढ़ोतरी 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होगी और अक्टूबर की सैलरी के साथ जुलाई-सितंबर का बकाया भी मिलेगा. इससे 48 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों को लाभ होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह 7वें वेतन आयोग का आखिरी संशोधन हो सकता है.

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DA Hike: केंद्र की मोदी सरकार ने देश के लाखों कर्मचारियों को दशहरा से पहले बड़ा तोहफा दिया है. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 3% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. यह फैसला दशहरा और दिवाली से पहले कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है.

बेसिक वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी

सरकार की ओर से वृद्धि के साथ ही बेसिक वेतन और पेंशन का दर 55% से बढ़कर 58% हो गया है. बढ़ोतरी का लाभ 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा. जुलाई, अगस्त और सितंबर का बकाया दिवाली से पहले, अक्टूबर की सैलरी में समायोजित कर दिया जाएगा. इससे त्योहारों के मौसम में करोड़ों परिवारों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी.

7वें वेतन आयोग के तहत लाभ

महंगाई भत्ता (डीए) की यह बढ़ोतरी 7वें वेतन आयोग के दायरे में आने वाले सभी केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और परिवार पेंशनभोगियों को मिलेगी. अनुमान है कि इस फैसले से 48 लाख कर्मचारी और 68 लाख पेंशनभोगी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे.

कितना मिलेगा महंगाई भत्ता

जिन कर्मचारियों का बेसिक वेतन 30,000 रुपये है, उन्हें हर महीने 900 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे. जिनकी बेसिक सैलरी 40,000 रुपये है, उन्हें हर महीने 1,200 रुपये अतिरिक्त का लाभ होगा. इस तरह, तीन महीने का बकाया 2,700 से 3,600 रुपये तक बनता है, जो दिवाली के समय कर्मचारियों के हाथ में अतिरिक्त बोनस की तरह पहुंचेगा.

महंगाई भत्ता तय करने का आधार

महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) की दरें हर साल जनवरी और जुलाई में तय की जाती हैं. इसके लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (सीपीआई-आईडब्ल्यू) के आंकड़ों का इस्तेमाल होता है. हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा अक्सर देर से होती है, लेकिन बकाया राशि के भुगतान से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इसका पूरा लाभ मिल जाता है.

त्योहारों से पहले राहत

त्योहारों के सीजन में महंगाई के दबाव के बीच सरकार का यह कदम कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा राहत पैकेज साबित होगा. दिवाली से पहले अतिरिक्त नकदी मिलने से घर-गृहस्थी और खरीदारी में आसानी होगी.

7वें वेतन आयोग का आखिरी संशोधन

विशेषज्ञों के अनुसार, यह 7वें वेतन आयोग के तहत होने वाला अंतिम संशोधन हो सकता है. संभावना है कि 8वां वेतन आयोग जनवरी 2026 से लागू होगा, जिसमें कर्मचारियों के वेतनमान और भत्तों की नई संरचना तय की जाएगी.

आर्थिक प्रभाव और सरकारी खर्च

इस बढ़ोतरी से केंद्र सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ेगा. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे बाजार में मांग को बल मिलेगा और त्योहारों के दौरान आर्थिक गतिविधियां और तेज होंगी.

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सरकारी कर्मचारियों को दशहरा का तोहफा

दशहरा और दिवाली से पहले महंगाई भत्ते में 3% की बढ़ोतरी का फैसला मोदी सरकार का कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा उपहार है. इससे न केवल उनकी आय में इजाफा होगा, बल्कि त्योहारों के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी. आने वाले महीनों में जब 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें सामने आएंगी, तब कर्मचारियों को और अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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