कच्चे तेल के भाव औंधे मुंह गिरे, $120 वाला ब्रेंट क्रूड आया $93 पर 

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Crude Oil Price (Photo: Freepik)

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Crude Oil Price: 2020 के बाद कच्चे तेल में आई सबसे बड़ी मासिक गिरावट, ब्रेंट क्रूड 18% तक फिसला. जानिए क्यों अचानक टूटे दाम और क्या तेल की सप्लाई जल्द सामान्य होगी.

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Crude Oil Price: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. शुक्रवार को तेल की कीमतों में और कमी आई, जिससे ब्रेंट क्रूड साल 2020 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट की तरफ बढ़ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में प्रगति के संकेतों से ग्लोबल मार्केट में यह राहत देखने को मिली है. 

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तेल की कीमतों में इतनी अचानक गिरावट क्यों आई?

ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड फिसलकर 93 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे इस महीने इसकी कुल गिरावट लगभग 18% हो गई है. वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 88 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है. दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की आशंका से बाजार में भारी उतार-चढ़ाव था. अब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से इन्वेस्टर्स का भरोसा दोबारा लौटा है और कीमतें तेजी से नीचे आई हैं. 

क्या अमेरिका और ईरान के बीच बात बन गई है?

मीडिया रिपोर्ट्स (Axios) के मुताबिक, वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीजफायर को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर अस्थायी सहमति बन गई है. इस चर्चा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बिना किसी रोक-टोक के जहाजों की आवाजाही को दोबारा शुरू करने का प्रावधान भी शामिल है. हालांकि, अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन शर्तों को फॉर्मल मंजूरी नहीं दी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी साफ किया है कि किसी अंतिम समझौते पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी. इसके साथ ही ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेन्ट ने भी कहा है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत अभी जारी है. 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना इतना बड़ा मुद्दा क्यों था?

यह गिरावट इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इसी महीने की शुरुआत में सप्लाई रुकने के डर से ब्रेंट क्रूड अचानक 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी चोकपॉइंट है, जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा (1/5th) गुजरता है. इसके बंद होने से पूरी दुनिया में तेल का संकट खड़ा हो गया था. 

क्या तेल की सप्लाई तुरंत सामान्य हो जाएगी?

जानकारों का मानना है कि अगर दोनों देशों में समझौता हो भी जाता है, तो भी तेल की सप्लाई को पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा. इसके पीछे मुख्य वजहें ये हैं:

  • रास्ते की सफाई: शिपिंग चैनलों में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines) को हटाना होगा. 
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को ठीक करना और बंद पड़े तेल क्षेत्रों को दोबारा शुरू करना होगा. 
  • ट्रांसपोर्टेशन: बड़े टैंकरों के जरिए तेल को खरीदार देशों तक पहुंचने में कई हफ्तों का समय लगेगा. 

इसके अलावा, कुछ अन्य चुनौतियां भी हैं. ईरान का परमाणु कार्यक्रम, उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भविष्य का नियंत्रण अभी भी बातचीत के मुख्य पेचीदा मुद्दे हैं. अमेरिका की मुख्य मांग है कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) को सरेंडर करे. दूसरी तरफ, अमेरिका के अंदरूनी आंकड़े बता रहे हैं कि वहां डिस्टिलेट (Distillate) का स्टॉक पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर आ गया है, और कुशिंग, ओकलाहोमा हब में भी कच्चे तेल का स्टॉक लगातार पांचवें हफ्ते कम हुआ है. 

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