कच्चा तेल फिर हुआ महंगा, 7% गिरावट के बाद पलटा बाजार, ब्रेंट 84.46 डॉलर के पार
कच्चे तेल के दाम चढ़े (Photo: AI)
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने में देरी की आशंका से कच्चे तेल के दाम फिर चढ़े हैं. जानें ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतें कितनी बढ़ीं.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार, 10 अगस्त को फिर तेजी देखने को मिली. इसकी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द खोलने को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है. पिछले हफ्ते ईरान और ओमान के बीच समझौते की उम्मीद से तेल की कीमतों में 7 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी, लेकिन अब तस्वीर फिर बदलती नजर आ रही है.
सोमवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 91 सेंट यानी 1.09% चढ़कर 84.46 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 61 सेंट यानी 0.78% बढ़कर 78.79 डॉलर प्रति बैरल हो गया.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर क्या अपडेट है?
ईरान ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ नए शिपिंग रूट तय करने वाला समझौता अंतिम दौर में है. हालांकि, तेहरान ने साफ किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तभी खुलेगा, जब अमेरिका उसकी दूसरी शर्तें भी पूरी करेगा. ईरान की मांगों में अमेरिकी हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवजा भी शामिल है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत नहीं हो रही है. उनका कहना है कि जून में हुए अंतरिम समझौते के उल्लंघन तक तेहरान बातचीत शुरू नहीं करेगा.
तेल की कीमतों पर इसका असर क्यों पड़ा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए बेहद अहम तेल मार्ग है. युद्ध से पहले दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता था. ऐसे में इस जलमार्ग के खुलने में देरी की आशंका से ट्रेडर्स को सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. यही वजह है कि पिछले हफ्ते कीमतों में तेज गिरावट के बाद सोमवार को कच्चे तेल के दाम फिर ऊपर चले गए.
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सऊदी अरब और यूएई से क्या खबर आई?
तेल सप्लाई को लेकर चिंता सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक सीमित नहीं है. वीकेंड पर सऊदी अरब की एक तेल फैसिलिटी को भी निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई. ईरान समर्थित हूतियों ने रविवार को सऊदी अरामको की जिजान रिफाइनरी पर हमला करने का दावा किया. यह घटना उस समय हुई जब सऊदी अरब ने बढ़ती क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच तुर्की और पाकिस्तान के साथ डिफेंस पैक्ट साइन किया है. वहीं, यूएई की एडीएनओसी ने शुक्रवार को बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसके 15 जहाजों पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते समय हमला हो चुका है.
भारत के लिए क्यों अहम है कच्चे तेल की कीमत?
कच्चे तेल के दामों में लगातार तेजी बनी रहती है तो इसका असर उन देशों पर ज्यादा पड़ सकता है, जो तेल की सप्लाई के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर हैं. इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर आगे आने वाला हर अपडेट ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए अहम है. फिलहाल बाजार की नजर ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते और अमेरिका से जुड़ी ईरान की शर्तों पर है. अगर जलमार्ग खोलने को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो तेल की कीमतों पर दबाव आगे भी देखने को मिल सकता है.
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