पुरानी कंपनी ने ठुकराई सैलरी बढ़ाने की मांग, अब उसी काम के लिए रखे दो नए लोग, Reddit पर पोस्ट वायरल

Corporate Reality: 11 साल की वफादारी और भारी वर्कलोड के बदले जब कंपनी ने सिर्फ 10% हाइक दिया, तो कर्मचारी ने इस्तीफा दे दिया. आज उसी काम के लिए कंपनी दो लोगों को डबल सैलरी पर रख रही है. यह कहानी सिखाती है कि बर्नआउट को अनदेखा करना कंपनियों को बहुत महंगा पड़ता है.
Corporate Reality: आज के दौर में ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ सिर्फ एक शब्द बनकर रह गया है, खासकर उन लोगों के लिए जो अपनी कंपनी के प्रति बहुत वफादार होते हैं. कई बार कंपनियां अपने सबसे मेहनती कर्मचारियों को ‘ग्रांटेड’ (For granted) लेने लगती हैं. यानी यह मान लेती हैं कि ये तो कहीं नहीं जाएंगे.
लेकिन जब पानी सिर से ऊपर निकल जाता है और वही वफादार कर्मचारी इस्तीफा देता है, तब कंपनी को अपनी गलती का अहसास होता है, जो अक्सर बहुत महंगा पड़ता है. हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक पूर्व कर्मचारी ने अपनी आपबीती सुनाई, जो यह साबित करती है कि कभी-कभी कंपनी को छोड़ देना ही खुद के लिए सबसे सही फैसला होता है.

11 साल का सफर और मिला सिर्फ ‘धोखा’
इस कर्मचारी ने कॉलेज से निकलते ही इस कंपनी में कदम रखा था. 11 साल तक उसने पूरी ईमानदारी से काम किया और कई प्रमोशन पाए. धीरे-धीरे उस पर काम का बोझ इतना बढ़ गया कि वह अकेले ही दो बड़े पदों (प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर और टीम मैनेजर) की जिम्मेदारी संभाल रहा था. लेकिन जब उसने अपनी मेहनत के बदले वाजिब सैलरी मांगी, तो मैनेजमेंट ने उसे सिर्फ 10% की मामूली बढ़ोतरी देकर टरका दिया.
मानसिक शांति के लिए कम सैलरी भी मंजूर
लगातार बढ़ते काम और कम सैलरी की वजह से वह कर्मचारी ‘बर्नआउट’ (पूरी तरह मानसिक थकान) का शिकार हो गया. उसने फैसला किया कि अब बहुत हो चुका. उसने अपनी पुरानी कंपनी छोड़ी और एक दूसरी जगह एंट्री-लेवल की नौकरी पकड़ ली, जहाँ उसे सैलरी भी कम मिल रही थी. उसका कहना है कि कंपनी छोड़ते ही उसकी मानसिक हालत में जो सुधार आया, वह किसी भी सैलरी से बढ़कर था.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।
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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।
करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।
इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।
शिक्षा
अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।
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