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40 साल में चीन की तरक्की सबसे कम, आर्थिक मोर्चे पर हालत पतली

Updated at : 17 Jan 2023 12:31 PM (IST)
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40 साल में चीन की तरक्की सबसे कम, आर्थिक मोर्चे पर हालत पतली

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन वर्ष 2022 के दौरान 3 फीसदी की दर से ही विकास कर पाया, जो वर्ष 2021 के आर्थिक विकास 8.1 फीसदी के मुकाबले आधे से भी कम है. आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2020 के बाद चीन की अर्थव्यवस्था में यह गिरावट वर्ष 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ी गिरावट है.

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बीजिंग : भारत के कट्टर दुश्मनों में से एक चीन इस समय आर्थिक मोर्चे पर जोरदार तरीके से हांफ रहा है. आलम यह है कि उसकी आर्थिक विकास दर में पिछले 40 सालों के दौरान की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. मीडिया की रिपोर्ट की मानें, तो चीन की आर्थिक विकास दर में वर्ष 2022 के दौरान तीन फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. मीडिया रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि कोरोना महामारी को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपायों और रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी की वजह से चीन को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है.

हालांकि, कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार की जीरो कोविड पॉलिसी की वजह से लॉकडाउन लगाकर लाखों लोगों को घरों के अंदर रहने के लिए मजबूर कर दिया गया था, लेकिन चीन के निवासियों के भारी विरोध-प्रदर्शनों की वजह से प्रतिबंधों में ढील देनी पड़ी. इसके बाद वहां की आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी हलचल दिखाई पड़ रही है.

2022 में 3 फीसदी की दर से विकास कर पाया चीन

मंगलवार को जारी अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार चीन वर्ष 2022 के दौरान 3 फीसदी की दर से ही विकास कर पाया, जो वर्ष 2021 के आर्थिक विकास 8.1 फीसदी के मुकाबले आधे से भी कम है. आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2020 के बाद चीन की अर्थव्यवस्था में यह गिरावट वर्ष 1970 के दशक के बाद दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है. इसका मतलब यह कि पिछले 40 सालों के दौरान यह सबसे बड़ी आर्थिक गिरावट है. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी की शुरुआत के दौरान चीन के आर्थिक विकास में करीब 2.4 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई थी.

रियल एस्टेट सेक्टर में कमजोरी के संकेत

चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो ने बताया कि दिसंबर में समाप्त हुए तीन महीनों में आर्थिक विकास दर एक साल पहले की तुलना में 2.9 फीसदी कम हो गई, जो पिछली तिमाही में 3.9 फीसदी थी. चीन की मंदी ने तेल, भोजन, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य आयातों की मांग को कम करके उसके व्यापारिक भागीदारों को नुकसान पहुंचाया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और निजी क्षेत्र वित्तीय एजेंसियों ने इस वर्ष विकास में सुधार की सलाह दी है, लेकिन चीन की आर्थिक विकास दर अब भी करीब 5 फीसदी के मामूली स्तर पर है. आईएमएफ समेत तमाम वित्तीय एजेंसियों ने चीन के रियल एस्टेट उद्योग में कमजोरी का संकेत दिया हे, जो एक महत्वपूर्ण आर्थिक इंजन है.

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दिसंबर में खुदरा बिक्री में गिरावट दर्ज

राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, चीन में एक साल पहले की तुलना में दिसंबर में खुदरा बिक्री में 1.8 फीसदी की गिरावट आई थी, लेकिन यह पिछले महीने के 5.9 फीसदी के संकुचन में सुधार था. 2022 में औद्योगिक उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 3.6 फीसदी बढ़ गया, जो यह संकेत देता है कि वर्ष की तीसरी तिमाही में 4.8 फीसदी की कमजोरी के बाद गतिविधि में गिरावट आई है, क्योंकि अमेरिका और यूरोपीय देशों में ब्याज दर में वृद्धि की वजह से चीनी वस्तुओं की मांग में कमजोरी दर्ज की गई है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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