FDI में सख्त हुआ भारत तो चीन को लग गयी मिर्ची, बौखलाहट में देने लगा नसीहत...
Author : KumarVishwat Sen Published by : Prabhat Khabar Updated At : 21 Apr 2020 6:56 PM
भारत की ओर से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में बदलाव किये जाने के बाद पड़ोसी देश चीन पूरी तरह से बौखलाया हुआ दिखायी दे रहा है.
नयी दिल्ली : भारत की ओर से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में बदलाव किये जाने के बाद पड़ोसी देश चीन पूरी तरह से बौखलाया हुआ दिखायी दे रहा है. समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि कुछ खास देशों से प्रत्यक्ष विदेश निवेश के लिए भारत के नये नियम डब्ल्यूटीओ के गैर-भेदभाव वाले सिद्धांन्त का उल्लंघन करते हैं और मुक्त व्यापार की सामान्य प्रवृत्ति के खिलाफ हैं.
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अधिकारी ने कहा कि ‘अतिरिक्त बाधाओं’ को लागू करने वाली नयी नीति G20 ग्रुप में निवेश के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण और पारदर्शी वातावरण के लिए बनी आम सहमति के खिलाफ भी है. केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह कोरोना वायरस महामारी के बाद घरेलू कंपनियों के ‘अवसरवादी अधिग्रहण’ पर अंकुश लगाने के लिए भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी को अनिवार्य कर दिया.
चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने एक बयान में कहा, ‘भारतीय पक्ष द्वारा विशिष्ट देशों से निवेश के लिए लगायी गयी अतिरिक्त बाधाएं डब्ल्यूटीओ के गैर-भेदभाव वाले सिद्धांत का उल्लंघन करती हैं और उदारीकरण तथा व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने की सामान्य प्रवृत्ति के खिलाफ हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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