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बाबा रामदेव का दावा : पतंजलि ने विदेशी कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ा, अब हेल्थ-एग्रीकल्चर पर होगा फोकस

Updated at : 13 Jul 2021 3:36 PM (IST)
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बाबा रामदेव का दावा : पतंजलि ने विदेशी कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ा, अब हेल्थ-एग्रीकल्चर पर होगा फोकस

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि योग और आयुर्वेद में जो रिसर्च सरकार भी नहीं कर पाई, उसे पतंजिल ने कर दिखाया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पतंजलि ब्रांड नहीं आदोलन है. हमने पांच साल में पांच लाख लोगों को रोजगार दिया है और आने वाले पांच सालों में पांच लाख लोगों को रोजगार देंगे.

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हरिद्वार : योगगुरु बाबा रामदेव ने मंगलवार को कहा है कि पतंजलि ने विदेशी कंपनियों के वर्चस्व को चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि अब देश के लिए हमें स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में काम करना है. उन्होंने कहा कि सिर्फ दो लोगों से योग सिखाना शुरू किया था और आज दुनिया के करीब 200 देशों में लोग योग कर रहे हैं. यह मेरे लिए गर्व की बात है.

बाबा रामदेव ने आगे कहा कि योग और आयुर्वेद में जो रिसर्च सरकार भी नहीं कर पाई, उसे पतंजिल ने कर दिखाया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पतंजलि ब्रांड नहीं आदोलन है. हमने पांच साल में पांच लाख लोगों को रोजगार दिया है और आने वाले पांच सालों में पांच लाख लोगों को रोजगार देंगे.

विदेशी कंपनियों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर था कब्जा

उन्होंने कहा कि ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर आज तक तमाम मल्टीनेशनल कंपनियों ने इस देश को आत्मग्लानि के भाव से भर दिया था. विदेशी कंपनियां हमारी अर्थव्यवस्था पर एकाधिकार कायम किए हुए थीं. उनके एकाधिकार और प्रभुत्व को पतंजलि ने तोड़ा है और आज हमें गर्व है कि पतंजलि ने एक आत्मनिर्भर भारत की एक नई प्रेरणा कायम की है.

सबसे अधिक बोली लगाकर रुचि सोया को खरीदा

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भता की आवाज को इतनी बुलंदी की है कि आज सिर्फ यूनिलीवर को छोड़कर बाकी सभी विदेशी कंपनियों को परास्त किया है और राष्ट्र सेवा का नया कीर्तिमान बनाया है. उन्होंने कहा कि हमने एक बीमार कंपनी को सबसे अधिक बोली लगाकर खरीदा. हालांकि, इसमें 18 देसी-विदेशी कंपनियों ने भी बोली लगाई थी. उन्होंने कहा कि पतंजलि ने करीब 3300 करोड़ रुपये निवेश करके रुचि सोया को खरीदा और उसके बाद 24.4 फीसदी की दर से हमने उसका सालाना टर्नओवर 16,318 करोड़ रुपये तक पहुंचाया.

भारत में 90 फीसदी लोगों में विटामिन की कमी

उन्होंने कहा कि आज औषधियों की एक नई शृंखला पेश कर रहे हैं, भारत में आज 80-90 फीसदी लोगों में विटामिन-डी की कमी है. वहीं, 50-60 फीसदी लोगों में प्रोटीन की कमी है. इसी तरह लोगों में अलग-अलग विटामिन की कमी है. हमने आयुर्वेदिक तरीके से इन सभी को उपबल्ध करवाया है. उन्होंने कहा कि आगे हमारा फोकस रिसर्च, स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा पर है.

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