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5 साल से कम उम्र के शिशुओं का भी बना सकते हैं बाल आधार कार्ड, जानें क्या है प्रक्रिया

Updated at : 20 Jul 2024 5:59 PM (IST)
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5 साल से कम उम्र के शिशुओं का भी बना सकते हैं बाल आधार कार्ड, जानें क्या है प्रक्रिया

Baal Aadhar Card

Baal Aadhar Card: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के नियमों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों का बाल आधार कार्ड बनाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना जरूरी है. दूसरे दस्तावेज के तौर पर माता या पिता में से किसी का आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या कोई भी वैध एड्रेस प्रूफ होना जरूरी है.

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Baal Aadhaar Card: भारत में आधार कार्ड (Aadhaar Card) अहम दस्तावेज हो गया है. इसके बिना अब कोई भी काम करना आसान नहीं रह गया है. सरकारी स्कूल में बच्चे का दाखिला कराना हो, बैंक में खाता खुलवाना हो, मोबाइल सिम खरीदना हो या फिर आवासीय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस आदि बनवाने के लिए भी आधार कार्ड की जरूरत पड़ती है. आधार बनाने की कोई न्यूनतम सीमा निर्धारित नहीं है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का कहना है कि नवजात शिश का भी आधार कार्ड बनवाया जा सकता है. भारतीय डाक विभाग की इंडिया पोस्ट स्टेप सर्विस (India Post Step Service) के जरिए भी नजदीकी डाकघर से 5 साल से कम उम्र के बच्चों का बाल आधार कार्ड (Baal Aadhaar Card) बनवाया जा सकता है. अब तो बाल आधार कार्ड बनवाना बेहद आसान हो गया है. आइए, जानते हैं कि 5 साल के कम उम्र के बच्चों का बाल आधार कैसे बनवाया जा सकता है?

बाल आधार कार्ड बनाने के लिए कितनी फीस लगती है?

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों का बाल आधार कार्ड (Baal Aadhaar Card) बनवाने के लिए किसी प्रकार की फीस नहीं लगती है. खास बात यह है कि ऐसे शिशुओं के बाल आधार कार्ड बनाने के बायोमीट्रिक भी नहीं ली जाती और न ही रेटिना स्कैन किया जाता है. शिशुओं के बाल आधार कार्ड को रीन्यू कराना पड़ता है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण कहता है कि शिशु की उम्र जब पांच साल से अधिक हो जाए, तो फिर उसका नया आधार कार्ड बनाना होगा. इसके लिए प्राधिकरण की ओर से डोरस्टेप सर्विस (Door Step Service) भी मुहैया कराई जाती है.

क्या बाल आधार कार्ड बनाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र देना जरूरी है?

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के नियमों के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों का बाल आधार कार्ड बनाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना जरूरी है. अगर किसी माता-पिता के पास शिशुओं का जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, तो अस्पताल की ओर से जारी किया डिस्चार्ज सर्टिफिकेट या स्कूल के पहचान पत्र से भी काम चल जाएगा. अगर इन दोनों में से कुछ नहीं है, तब फिर जन्म प्रमाणपत्र बनाने की जरूरत है. दूसरे दस्तावेज के तौर पर माता या पिता में से किसी का आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या कोई भी वैध एड्रेस प्रूफ होना जरूरी है.

बाल आधार कार्ड बनाने के ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

पांच साल से कम उम्र के शिशुओं का बाला आधार कार्ड बनाने के लिए सबसे पहले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट uidai.gov.in पर विजिट करना होगा. इसके बाद रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके लिए ‘आधार कार्ड रजिस्ट्रेशन’ पर क्लिक करें. इसके बाद बच्चे के माता-पिता को अपनी डिटेल देनी होगी. इसमें बच्चे का नाम, माता-पिता का फोन नंबर और बायोमैट्रिक डेटा दर्ज होना जरूरी है. फिर डेमोग्राफिक जानकारी जैसे घर का पता, कम्यूनिटी, राज्य समेत अन्य जानकारी को फॉर्म में दर्ज करना होगा. इसके बाद आगे की कार्रवाई के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के नजदीकी केंद्र पर विजिट करना होगा. आधार सेंटर पर बच्चे और अपनी पूरी जानकारी को वेरिफाई करना होगा. इस तरह बाल आधार बन जाएगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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